चमोली के ऐसे पर्यटन स्थल जिनके बारे में आप नहीं जानते

Unknown places in chamoli in hindi – अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सहज समाज, परिवेश और यहां के प्रमुख तीर्थस्थानों की वजह से चमोली जिला यात्रियों के लिए स्वर्ग जैसा है। लेकिन क्या आपको पता है कि चमोली में कई ऐसी जगह भी हैं जिनके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं। तो चलिए आज हम आपको यहां के कुछ ऐसे स्थानों के बारे में बताएँगे जिनके बारे में आप लोग कम ही जानते हैं।

व्यास गुफा

व्यास गुफा

  • ये बात तो सबको पता है कि पुराणों की रचना वेद व्यास जी द्वारा की गई थी। ये बात बहुत कम ही लोग ही जानते होंगे की इन पुराणों की रचना चमोली जिले के माणा गांव में की गई थी।
  • महर्षि वेदव्यास जी ने भारत और चीन की सीमा के पास स्थित माणा गांव में रहकर इन पुराणों की रचना की।
  • माणा गांव उत्तराखंड में अलकनंदा और सरस्वती के संगम स्थल केशव प्रयाग के तट पर बद्रीनाथ धाम से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर बसा है।
  • माणा गांव में एक ऊंची पहाड़ी पर बहुत ही सुन्दर गुफा है।
  • वर्तमान में इस गुफा में व्यास जी का मंदिर बना हुआ है।

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वाण गांव में लाटू मंदिर

वाण गांव में लाटू मंदिर

  • वाण गांव भारत का आखरी गांव है। यह गांव चीन और भारत की सीमा पर स्थित है।
  • यहां का लाटू देवता का मंदिर बहुत की रहस्यमय है।
  • लाटू मंदिर के कपाट वर्षभर में एक बार ही खुलते हैं।
  • मान्यता है कि लाटू मंदिर के अंदर हीरे, मोती या फिर ज़हरीले नाग हो सकते हैं इसलिए पुजारी यहां पर आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करता हैं।
  • इस मंदिर में महिलाओं का जाना वर्जित है। श्रद्धालु भी दस मीटर दूर से दर्शन करते हैं।
  • वाण गांव में नंदा की डोली सहित समस्त गढ़वाल और कुमाऊं के देवताओं का मिलन होता है।
  • नंदा अपने भाई लाटू से मिलती हैं और यहां से लाटू यात्रा की अगुवाई करते हैं।

रूपकुंड झील

रूपकुंड झील

  • रूपकुंड झील के आसपास करीब 500 नरकंकाल पाए जाते हैं।
  • जब आप इन कंकालो को देखेंगे तो इनकी संरचना आपको हैरान कर देगी।
  • 10 से 11 फीट लंबे इन नरकंकालों के बारें में कई सारी कहानियां प्रचलित हैं।
  • इनकी अलसी कहानी कोई नहीं जानता और इसी कारण रूपकुंड झील को रहस्यमयी कहा जाता है।

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पंचप्रयाग

पंचप्रयाग

  • उत्तराखंड के पंचप्रयागों में से तीन प्रयाग चमोली जिले में हैं
  • विष्णुप्रयाग- यह स्थान जोशीमठ से 12 किमी की दूरी पर है। इस प्रयाग में अलकनंदा और धौलीगंगा का संगम है।
  • नंदप्रयाग- यह बद्रीनाथ मार्ग पर कर्णप्रयाग से 21 किमी की दूरी पर है। यहां पर अलकनंदा और नंदाकिनी नदी का संगम स्थल है।
  • कर्णप्रयाग- चमोली से 23 किमी दूर ये स्थान कर्ण मंदिर और उमादेवी के मंदिर के लिए फेमस है। यहां पर पिंडर नदी और अलकनंदा नदी का संगम है।

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