India FDI Policy: भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने की ज़रुरी जानकारी

India FDI Policy videshi nivesh in hindiभारत में विदेशी निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भारत सरकार भी लगातार विदेशी निवेश को आसान बनाने के लिए समय- समय पर नई – नई गाइडलाइन्स और पॉलिसी लागू कर रही है। इन गाइडलाइन्स का उपयोग करके विदेशी निवेशक आसानी से भारत के व्यापार में निवेश कर सकते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं इससे जुड़ी ज़रुरी जानकारी।india FDI policy videshi nivesh in hindi

एफडीआई क्या है – India FDI Policy videshi nivesh in hindi – Setting up business in India

सरल शब्दों में कहा जाए तो जब किसी एक देश की कंपनी, दूसरे देश में निवेश करती है तो वो निवेश एफडीआई कहलाता है। ऐसे निवेश से ये निवेशक दूसरे देश में की अपनी खुद की कंपनी शुरु कर सकते हैं या फिर उस देश की किसी कंपनी के साथ मिलकर काम कर सकते हैं।

विदेशी निवेशक भारत में इन तीन तरीकों से निवेश कर सकते हैं – India FDI Policy videshi nivesh in hindi 

भारतीय कंपनी में 

जॉइंट वेंचर के द्वारा 

पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी

प्राइवेट लिमिटेड या ब्लिक लिमिटेड कंपनी

इनवर्ड एफडीआई में विदेशी निवेशक भारत में अपना व्यापार शुरू कर के यहां के बाज़ार में प्रवेश कर सकता है। इसके लिए वह किसी भी भारतीय कंपनी (इंडियन कंपनी) के साथ संयुक्त उद्यम बना सकता है या पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी (Wholly Owned Subsidiary) यानी सब्सिडियरी शुरू कर सकता है। 

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इसके साथ ही विदेशी निवेशक विदेशी कंपनी का दर्जा बरकरार रखते हुए इंडिया में संपर्क, लीएजॉन ऑफ़िस, शाखा ऑफिस (ब्रांच ऑफिस) और प्रोजेक्ट कार्यालय खोल सकता है। आमतौर पर यह भी उम्मीद की जाती है कि एफडीआई निवेशक का निवेश दीर्घ अवधि के लिए होगा। इसमें उनका वित्त के अलावा दूसरी तरह का भी योगदान होगा।

लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप – LLP –  Setting up business in India – India FDI Policy videshi nivesh in hindi

– देश में कंपनियों के रजिस्ट्रेशन के कई तरीके हैं, इनमें से एक है लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP)| एलएलपी के तहत, दो या उससे अधिक पार्टनर एक स्पेशल एग्रीमेंट बनाते हैं और उनकी सीमित ज़िम्मेदारियां होती हैं। 

– यह कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) के अनुपालन और नियमों के अनुसार रजिस्टरड होते हैं| एलएलपी अधिनियम, 2008 के प्रावधानों के अधीन है। 

– जिन क्षेत्रों में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति है, वहां पर निवेश के साथ परफॉर्मेंस शर्तें लागू नहीं होती और ऑटोमेटिक रुट से निवेश की इजाज़त मिल जाती है। 

यहां पढिए आरबीआई की पूरी गाइडलाइन्स

भारत सरकार ने हर क्षेत्र में निवेश करने के लिए अलग- अलग नियम बनाए हैं। इसकी पूरी जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। 

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