Uprashtrapati ka chunav kaise hota hai – जानिए कैसे होता है उपराष्ट्रपति का चुनाव और कितनी मिलती है सैलरी

 Uprashtrapati ka chunav kaise hota hai hindiVice President Election Process In India –  भारत में राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति का पद कार्यकारिणी व संवैधानिक में दूसरा उच्चतम सबसे बड़ा पद होता है। उनका कार्यकाल पांच वर्ष की अवधि का होता है लेकिन वह इस अवधि के समाप्त हो जाने पर भी अपने उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक, पद पर बने रह सकते हैं। भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा के अध्यक्ष के तौर पर विधायी कार्यों में भी हिस्सा लेता है। भारत का उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होता है। तो चलिए आपको बताते हैं कैसे होता है उपराष्ट्रपति का चुनाव और किन – किन मापदंडों के आधार पर किया जाता है इनका चुनाव

Uprashtrapati ka chunav kaise hota

Uprashtrapati ka chunav kaise hota hai hindi

भारत का उपराष्ट्रपति – The Vice President of India

भारत के संविधान का अनुच्छेद 63 यह उपबंध करता है कि भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। अनुच्छेद-64 और 89 यह उपबंध करते हैं कि भारत का उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होगा और अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार भारत के उपराष्ट्रपति पद कार्यपालिका का भाग है परंतु राज्य सभा के सभापति के रूप में वह संसद का भाग है। इस प्रकार उपराष्ट्रपति की दोहरी भूमिका होती है और वह दो अलग-अलग और पृथक पद धारण करता है।

उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने की योग्यता – Qualification to be elected vice president

कोई व्यक्ति उपराष्ट्रपति होने का पात्र तभी होगा यदि वह-

भारत का नागरिक है

35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका है

राज्य सभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए अर्हित है

उसे उस राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना चाहिए जहां से वह प्रतिनिधित्व करने के लिए निर्वाचित होना चाहता है।

निर्वाचित होने के लिए शिक्षा से सम्बंधित कोई भी अनिवार्यता नहीं है

कोई व्यक्ति, जो भारत सरकार के या किसी राज्य सरकार के अधीन या किसी अधीनस्थ स्थानीय प्राधिकरण के अधीन कोई लाभ का पद धारण करता है, वह भी इसका पात्र नहीं है।

उपराष्ट्रपति का निर्वाचन – Election of vice president

उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है और ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त होता है। उपराष्ट्रपति पद के लिए किसी व्यक्ति को निर्वाचित किए जाने हेतु निर्वाचकगण में संसद के दोनों सदनों के सदस्य होते हैं। उपराष्ट्रपति यदि संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य है, तो यह समझा जाता है कि उसने उस सदन में अपना स्थान उपराष्ट्रपति के रूप में अपने पद ग्रहण की तारीख से रिक्त कर दिया है। उपराष्ट्रपति की पदावधि की समाप्ति से हुई रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन, पदावधि की समाप्ति से पहले ही पूर्ण कर लिया जाता है। यदि रिक्ति मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने या अन्य कारण से होती है, तब उस रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन, रिक्ति होने के पश्चात् यथाशीघ्र किया जाता है। इस प्रकार निर्वाचित व्यक्ति अपने पद ग्रहण की तारीख से पूरे पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करने का हकदार होता है। भारत के उपराष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने से पहले जब उनका पद रिक्त हो जाता है या जब उपराष्ट्रपति भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं, तब उपराष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन राज्य सभा के उप-सभापति द्वारा या भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए गए राज्य सभा के किसी अन्य सदस्य द्वारा किया जाता है। उपराष्ट्रपति अपने पद का त्याग भारत के राष्ट्रपति को अपना त्याग पत्र देकर किया जा सकता है। त्याग पत्र उस तारीख से प्रभावी हो जाता है जिससे उसे स्वीकार किया जाता है।

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उपराष्ट्रपति पद और गोपनीयता की शपथ – Oath of Office and Secrecy to the Vice President

उप राष्ट्रपति को उसके पद की शपथ राष्ट्रपति अथवा उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा दिलाई जाती है। राष्ट्रपति भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखने एवं अपने पद व कर्तव्य के पालन की शपथ लेता है।

उपराष्ट्रपति के पद का कार्यकाल – Term of office of Vice President

उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा। उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति को अपना पद त्याग सकता हैं। उपराष्ट्रपति, अपने पद की अवधि समाप्त हो जाने पर भी, तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है।

उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित महत्वपूर्ण उपबंध – Important provisions relating to the election of the Vice President

अगले उपराष्ट्रपति का निर्वाचन निवर्तमान उपराष्ट्रपति की पदावधि की समाप्ति के 60 दिनों के भीतर किया जाना होता है। निर्वाचित होने के लिए अर्हित तथा उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन के लिए खड़े होने वाले किसी भी व्यक्ति को कम-से-कम 20 संसद सदस्यों द्वारा प्रस्तावक के रूप में और कम से कम 20 संसद सदस्यों द्वारा समर्थक के रूप में नामित किया जाना अपेक्षित है। उम्मीदवार  को 15,000/- रू. की जमानत राशि जमा करनी होती है।

उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित विवाद –

उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के संबंध में पैदा होने वाले संदेहों और विवादों की भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा जांच की जाती है और निर्णय किया जाता है। उसका निर्णय अंतिम होता है। उपराष्ट्रपति के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर भारत के उच्चतम न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुनवाई की जाती है। इस याचिका के साथ अनिवार्य रूप से 20,000/-रूपये की जमानत राशि जमा करनी होती है।

राज्यसभा के सभापति के रूप में उपराष्ट्रपति –

उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होता है और वह लाभ का कोई अन्य पद धारण नहीं करता है। जब उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है, तब वे राज्य सभा के सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन नहीं कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में वे राज्यसभा के सभापति के किसी वेतन या भत्ते का हकदार नहीं होता।

कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में उपराष्ट्रपति – Vice President as Acting President

राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग, या बर्खास्तगी या अन्य कारणों से हुई राष्ट्रपति के पद की रिक्ति की स्थिति में नए राष्ट्रपति के निर्वाचन होने तक उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं। इस अवधि के दौरान, उप-राष्ट्रपति को राष्ट्रपति की सभी शक्तियां, उन्मुक्तियां और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं।

उपराष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया – Procedure for removal of Vice President

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-67 के अनुसार, भारत के उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के प्रभावी बहुमत और लोकसभा के सरल बहुमत द्वारा हटा दिया जाता है। भारत के उप-राष्ट्रपति को हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में पेश किया जाता है, परंतु इसे लोकसभा की समहति अवश्य प्राप्त होती है। उपराष्ट्रपति को अविश्वास प्रस्ताव द्वारा हटाया जाता है। इसकी सबसे पहले कार्यवाही राज्यसभा में होती है। 14 दिन की पूर्व सूचना के आधार पर राज्यसभा अपने दो तिहाई बहुमत से जिसे लोकसभा सहमत हो उपराष्ट्रपति को हटाया जा सकता है। जब उपराष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया चल रही हो, तो उस समय वे राज्यसभा के सभापति नहीं होते हैं।

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उपराष्ट्रपति की सैलरी – Salary to Vice President

उपराष्ट्रपति को प्रतिमाह 4 लाख रुपये सैलरी मिलती है। इसके अलावा इन्हें कई तरह के भत्ते भी मिलते हैं। रहने के लिए एक अच्छा बंगला मिलता है। मुफ्त चिकित्सा की सुविधा भी दी जाती है। ट्रेन और हवाई सफर की भी फ्री सुविधा मिलती है। पूरी सुरक्षा और पूरा स्टाफ मिलता है। लैंडलाइन कनेक्शन, मोबाइल फोन की भी सुविधा मिलती है। उपराष्ट्रपति के वेतन व भत्ते भारत की संचित निधि से दिए जाते हैं।

रिटायरमेंट के बाद की सुविधाएं – retirement benefits

उपराष्ट्रपति की सैलरी ‘संसद अधिकारी के सैलरी और भत्ते अधिनियम, 1953’ के तहत निर्धारित किया जाता है। रिटायरमेंट के बाद उपराष्ट्रपति को पेंशन के रूप में 1.5 लाख रुपये महीना मिलता है। इसके अलावा इन्‍हें भी राष्ट्रपति की तरह कई सुविधाएं भी मिलती हैं।

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भारत के उपराष्ट्रपतियों की सूची – List of Vice Presidents of India

उपराष्ट्रपति का नाम जन्म काल कार्यकाल राजनीतिक पार्टी
डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1888-1975 1952-1962 स्वतंत्र
डॉ जाकिर हुसैन 1897-1969 1962-1967 स्वतंत्र
वीवी वेंकटगिरी 1894-1980 1967-1969 स्वतंत्र
गोपाल स्वरूप पाठक 1896-1982 1969-1974 स्वतंत्र
बीडी जत्ती 1912-2002 1974-1979 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
न्यायमूर्ति मोहम्मद हिदायतुल्लाह 1905-1992 1979-1984 स्वतंत्र
आर वेंकटरमन 1910-2009 1984-1987 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
डॉ शंकर दयाल शर्मा 1918-1999 1987-1992 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
के आर नारायणन 1921-2005 1992-1997 स्वतंत्र
कृष्णकांत 1927-2002 1997-2002 जनता दल
भैरों सिंह शेखावत 1923-2010 2002-2007 भारतीय जनता पार्टी
मौहम्मद हामिद अंसारी 1937 2007-2017 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
मुप्पवरयु वेंकैया नायडू 1949 2017 से वर्तमान तक भारतीय जनता पार्टी

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उपराष्ट्रपति से सम्बंधित महत्वपूर्ण रोचक तथ्य – Important facts about Vice President

मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान नहीं करते हैं जबकि उप-राष्ट्रपति के चुनाव में इन्हें मतदान का अधिकार दिया गया है।

उप-राष्ट्रपति को वेतन राज्य-सभा के सभापति के रूप में दिया जाता है।

उप-राष्ट्रपति राष्ट्रपति के पद पर 6 महीने तक ही कार्य कर सकते हैं। इसी छह माह की अवधि में ही निर्वाचन आयोग को नए राष्ट्रपति का चुनाव एवं नियुक्ति करनी होती है।

राष्ट्रपति की तरह ही उप-राष्ट्रपति भी कितनी भी बार चुने जा सकते हैं, इसकि कोई सीमा नहीं है।

भारतीय संविधान में उप-राष्ट्रपति का पद संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है।

उपराष्ट्रपति अपने मत का प्रयोग मतों के बराबर रहने की स्थिति में करता है।

भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे।

उपराष्ट्रपति को लोकसभा अध्यक्ष के समान वेतन मिलता है।

उप-राष्ट्रपति पद से जुड़े किसी भी मामले की सुनवाई केवल सुप्रीम कोर्ट ही करता है।

उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य करते है। तो इस कारण उन्हें राज्यसभा के सभापति के रूप में वेतन व अन्य सुविधाएं प्राप्त होती है न कि उपराष्ट्रपति के रूप में।

उपराष्ट्रपति के चुनाव में राधाकृष्णन, हिदायतुल्ला तथा शंकर दयाल शर्मा सभी निर्विरोध चुने गए थे।

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्य का राज्यपाल और संघ अथवा राज्य का मंत्री लाभ के पद पर नही मने जाते हैं इसलिए सभी उपराष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ सकते हैं।

उपराष्ट्रपति, कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में अधिकत्तम 6 माह तक कार्य कर सकता है।

सर्वप्रथम 13 मई 1952 को भारत के पहले उपराष्ट्रपति ने शपथ ली थी।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63-73 भारत के उपराष्ट्रपति की अर्हता, निर्वाचन एवं पदच्युति से संबंधित हैं।

स्वतंत्रता के बाद, 1950 से पद की शुरुआत में, कुल 13 उपराष्ट्रपतियों ने भारत के इस पद को सुशोभित किया है।

उपराष्ट्रपति मोहम्मद हिदायतुल्ला भारत के पहले मुस्लिम मुख्य न्यायाधीश थे। यह कुल 2 बार भारत के कार्यवाहक राष्ट्रपति भी बने।

कष्ण कान्त भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति है जिनकी मृत्यु उपराष्ट्रपति पद पर हुई थी।

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