क्यों मनाई जाती है अक्षय तृतीया, जानें पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त

Akshaya Tritiya 2019 – इस बार अक्षय तृतीया 7 मई को मनाई जा रही है। अक्षय तृतीया के दिन दान-पुण्य किया जाता है। कहते हैं इस दिन दान करने से उसका पुण्‍य कई गुना बढ़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वाहन, वस्त्र-आभूषण आदि की खरीदारी से संबंधित कार्य किए जाते हैं। तो जानिए क्यों मनाई जाती है अक्षय तृतीया, जानें पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त

कब मनाई जाती है अक्षय तृतीया?

  • हिन्‍दू कैलेंडर के मुताबिक वैशाख महीने की शुक्‍ल पक्ष तृतीया को अक्षय तृतीया मनाई जाती है। इसे अखाती तीज भी कहते हैं।
  • पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है, इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।
  • यह हिंदुओं के साथ-साथ जैन समुदायों के लिए एक बहुत ही शुभ और पवित्र दिन है।

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क्या है अक्षय तृतीया का महत्‍व?  

  • यह पर्व भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन विष्णु जी के अवतार परशुराम का धरती पर जन्म हुआ था। इसी वजह से अक्षय तृतीया को परशुराम के जन्‍म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
  • अक्षय तृतीया को लेकर एक और मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी स्वर्ग से धरती पर आईं थीं।
  • इस दिन भोजन की देवी अन्‍नपूर्णा का जन्‍मदिन भी मनाया जाता है।
  • कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था। कृष्ण और सुदामा का मिलन अक्षय तृतीया के ही दिन हुआ था
  • प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण मंदिर के कपाट अक्षय तृतीया के दिन ही खुलते हैं। आज के ही दिन महाभारत युद्ध की समाप्ति हुई थी।
  • मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीदारी आदि कार्य किए जाते हैं, जिन्हें करना शुभ माना जाता है।
  • पुराणों में लिखा है कि इस दिन पितरों को किया गया तर्पण तथा पिन्डदान अथवा किसी और प्रकार का दान, अक्षय फल प्रदान करता है।
  • अक्षय तृतीया के दिन गंगा स्नान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन किया गया जप, तप, हवन, और दान भी अक्षय हो जाता है।

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ये कथा प्रचलित है

  • कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक धर्मदास नामक वैश्य था। धर्मदास बहुत ही गरीब था, लेकिन उसकी ब्राह्मणों के प्रति काफी श्रद्धा थी।
  • एक बार उसने अक्षय तृतीया का व्रत करने का मन बनाया और इस पर्व के आने पर गंगा में स्नान करके विधि- विधान से देवी-देवताओं की पूजा की और व्रत रखा।
  • व्रत के दिन उसने बिना कोई संकोच किए स्वर्ण, वस्त्र तथा दिव्य वस्तुएँ ब्राह्मणों को दान में दी। अनेक रोगों से ग्रस्त तथा वृद्ध होने के बावजूद भी उसने उपवास करके धर्म-कर्म और दान पुण्य किया।
  • यही वैश्य दूसरे जन्म में कुशावती का राजा बना। कहते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन किए गए दान व पूजन के कारण वह बहुत धनी व्यक्ति बना।
  • वह इतना धनी और प्रतापी राजा था कि त्रिदेव तक उसके दरबार में अक्षय तृतीया के दिन ब्राह्मण का रुप धारण करके उसके महायज्ञ में शामिल होते थे।
  • अपनी श्रद्धा और भक्ति का उसे कभी घमंड नहीं हुआ और महान वैभवशाली होने के बावजूद भी वह धर्म मार्ग से विचलित नहीं हुआ।
  • माना जाता है कि यही राजा आगे चलकर राजा चंद्रगुप्त के रूप में पैदा हुआ।

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अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जयंती

  • अनुसार स्कंद पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को रेणुका के गर्भ से भगवान विष्णु ने परशुराम रूप में जन्म लिया।
  • कोंकण और चिप्लून के परशुराम मंदिरों में इस तिथि को परशुराम जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है।
  • दक्षिण भारत में परशुराम जयंती का विशेष महत्व है। इस दिन परशुराम की कथा भी सुनी जाती है।
  • महिलाएं और कुवारी कन्याएँ इस दिन गौरी-पूजा करके मिठाई, फल और भीगे हुए चने बाँटती हैं, गौरी-पार्वती की पूजा करके धातु या मिट्टी के कलश में जल, फल, फूल, तिल, आदि लेकर दान करती हैं।

ऐसे करें पूजन  

  • अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है।
  • कुछ लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं।
  • सुबह उठकर स्नान करने के बाद पीले कपड़े पहनते हैं।
  • सबसे पहले विष्णु जी को गंगाजल से स्नान कराएं।
  • उनपर सफेद कमल, सफेद गुलाब या पीले गुलाब की माला चढ़ाएं।
  • जौ या गेहूँ का सत्तू, ककड़ी और चने की दाल, फल आदि अर्पित करें।
  • गरीबों को भोजन कराएं और दान करें।
  • फल, फूल, बरतन, वस्त्र, स्वर्ण पात्र के साथ जल से भरे घडे, कुल्हड, सकोरे, पंखे, खडाऊँ, छाता, चावल, नमक, घी, खरबूजा, ककड़ी, चीनी, साग, इमली, सत्तू आदि गरमी में लाभकारी वस्तुओं का दान पुण्यकारी माना गया है, इसलिए ये सब चीजे दान करें।

शुभ मुहूर्त

  • अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त समय = 05:40 से 12:18 तक
  • अवधि = 6 घंटे 37 मिनट

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