Anant Chaturdashi 2021: जानिए अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

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Anant Chaturdashi 2021 – भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा जाता है| इस साल यह व्रत 19 सितंबर 2021 को है| अनंत भगवान विष्णु का ही एक नाम है| तो जानिए अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारें में।

Anant Chaturdashi 2018अनंत चतुर्दशी का महत्व – anant chaturdashi mahatva

  • अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है| इस व्रत को लोग अनंत चौदस भी कहते हैं| इस दिन पूजा करने के बाद भक्त अपने  बाजू पर अनंत सूत्र बांधते हैं। इसकी खासियत यह है कि इस अनंत सूत्र में 14 गांठे बंधी होती हैं|
  • ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को यदि 14 वर्षों तक किया जाए, तो व्रत करने वाले को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। पुरुष और महिलाएं दोनों ही इस व्रत को कर सकते हैं।
  • इस दिन सत्यनारायण भगवान की व्रत कथा का पाठ किया जाता है और अनंत देव की कथा भी सुनी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को रखने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन- anant chaturdashi ganesh visarjan

  • अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा तो होती है, साथ ही गणेश विसर्जन भी किया जाता है। गणेश विसर्जन की वजह से इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन लोग हर्षोल्लास के साथ भगवान गणेश को अपने घर लाते हैं और अगले 10 दिनों तक उनकी खूब सेवा करते हैं| फिर चतुर्दशी के दिन धूमधाम से उनकी विदाई करते हैं। इस दिन कई झांकियां भी निकाली जाती हैं।

Anant Chaturdashi

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व्रत और पूजा विधि- anant chaturdashi puja vidhi in hindi

  • सुबह स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान की फोटो पर रोली, मौली, धूप, दीप, चंदन, पुष्प, फल, पंचामृत, जनेऊ, दूर्वा, लड्डू आदि अर्पण करें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • इसके बाद पूजा स्थल पर कलश की स्थापना करें।
  • एक धागे में कुमकुम, केसर और हल्दी का रंग लगाकर अनंत सूत्र बनाएं।
  • फिर इसमें 14 गांठें बना दें।
  • इसे भगवान विष्णु को चढ़ा दें।
  • अब भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की विधि-विधान के साथ पूजा करें।
  • पूजा के बाद अनंत सूत्र को बाजू में बांध लें।
  • अनंत सूत्र पुरुष अपने दाएं हाथ पर बांधेंगे और महिलाएं बाएं हाथ पर।
  • ऐसा करने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और  प्रसाद ग्रहण करें।

मंत्र का जप करें- anant chaturdashi mantra jaap

प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम्।
तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयो: शिवाय।।
प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोकदावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम्।
अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहमुत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य।।

अर्थ हिंदी में-  मैं ऐसे देवता का पूजन करता हूं, जिनकी पूजा स्वयं ब्रह्मदेव करते हैं। ऐसे देवता, जो मनोरथ सिद्धि करने वाले हैं, भय दूर करने वाले हैं, शोक का नाश करने वाले हैं, गुणों के नायक हैं, गजमुख हैं, अज्ञान का नाश करने वाले हैं। मैं शिव पुत्र श्री गणेश का सुख-सफलता की कामना से भजन, पूजन और स्मरण करता हूं।

लक्ष्मी-विनायक मंत्र का जप करें- lakshmi vinayak mantra jaap

दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरदे सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।।

इस लक्ष्मी-विनायक मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें। मंत्र जप के लिए कमल के गट्‌टे की माला का उपयोग करना चाहिए।
ध्यान रखें मंत्र का जप सही उच्चारण के साथ करना चाहिए। अगर आप इस मंत्र का जप नहीं कर पा रहे हैं तो इन सरल मंत्रों का जप कर सकते हैं।

मंत्र – mantra

श्रीगणेश मंत्र- ॐ महोदराय नम:। ॐ विनायकाय नम:।
महालक्ष्मी मंत्र- ॐ महालक्ष्म्यै नम:।

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अनंत चतुर्दशी शुभ मुहूर्त- shubh muhurat

  • अनन्त चतुर्दशी रविवार, 19 सितम्बर 2021
  • अनन्त चतुर्दशी पूजा मुहूर्त – 06:08 ए एम से 05:28 ए एम, 20 सितम्बर 2021
    अवधि – 23 घण्टे 20 मिनट्स
  • चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – सितम्बर 19, 2021 को 05:59 ए एम बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त – सितम्बर 20, 2021 को 05:28 ए एम बजे

मंत्र का जाप करें- mantra jaap

  • अनंत सूत्र को बाजू में बांधते समय इस मंत्र का जाप करें – अनंन्तसागर महासमुद्रे मग्नान्समभ्युद्धर वासुदेव।
    अनंतरूपे विनियोजितात्माह्यनन्तरूपाय नमो नमस्ते॥

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कथा-  Anant Chaturdashi katha 

  • एक दिन कौण्डिन्य मुनि की नज़र अपनी पत्नी के बाएं हाथ में बंधे अनन्तसूत्र पर पड़ी, जिसे देखकर वह भ्रमित हो गए और उन्होंने पूछा-क्या तुमने मुझे वश में करने के लिए यह सूत्र बांधा है? शीला ने उत्तर दिया-जी नहीं, यह अनंत भगवान का पवित्र सूत्र है, लेकिन कौण्डिन्यने ने अपनी पत्नी की सही बात को भी गलत समझा और अनन्त सूत्र को जादू-मंतर वाला वशीकरण करने का डोरा समझकर तोड़ दिया और उसे आग में डालकर जला दिया।
  • इसका परिणाम भी शीघ्र ही उनके सामने आ गया। उनकी सारी संपत्ति नष्ट हो गई। तब कौण्डिन्य ऋषि ने अपने इस अपराध का प्रायश्चित्त करने का निर्णय लिया। वे अनन्त भगवान से क्षमा मांगने वन में चले गए। उन्हें रास्ते में जो मिलता वे उससे अनन्तदेवका का पता पूछते थे। जब कौण्डिन्यमुनि को अनन्त भगवान का साक्षात्कार नहीं हुआ, तब उन्होंने निराश होकर अपने प्राण त्यागने का मन बनाया। तभी एक वृद्ध ब्राह्मण ने आकर उन्हें आत्महत्या करने से रोक दिया और एक गुफा में ले जाकर चतुर्भुज अनन्तदेव के दर्शन कराए।
  • भगवान ने मुनि से कहा तुमने जो अनन्तसूत्र का तिरस्कार किया है, यह सब उसी का फल है। इसके प्रायश्चित्त के लिए तुम 14 वर्ष तक निरंतर अनन्त-व्रत का पालन करो। इस व्रत का अनुष्ठान पूरा हो जाने पर तुम्हारी नष्ट हुई सम्पत्ति तुम्हें पुन:प्राप्त हो जाएगी और तुम सुखी-समृद्ध हो जाओगे। कौण्डिन्यमुनि ने इस आज्ञा को स्वीकार कर लिया। भगवान ने आगे कहा अनन्त-व्रत से सभी पाप नष्ट होते हैं तथा सुख-शांति प्राप्त होती है। कौण्डिन्यमुनि ने चौदह वर्ष तक अनन्त-व्रत का नियमपूर्वक पालन करके खोई हुई सम्पत्ति को पुन:प्राप्त कर लिया।

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