Bharat china yudh kab kab hua – जानिए भारत और चीन के बीच युद्ध कब-कब हुआ

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Bharat china yudh kab kab hua – भारत ने हाल ही में 59 चाइनीज़ ऐप को बैन कर दिया है| यह फैसला भारत सरकार ने पूर्वी लदाख के गलवान घाटी में हुए सैन्य हिंसा के बाद लिया| इस सैन्य हिंसा में भारत के 20 जवान शहीद हुए हैं| भारत के इतिहास में यह कोई पहली घटना नहीं है, पहले भी भारत और चीन के बीच कई युद्ध हो चुके हैं| तो चलिए आपको बताते हैं कि कितनी बार भारत और चीन के बीच युद्ध हुए हैं|

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Bharat china yudh kab kab hua भारत और चीन के बीच युद्ध

1962 में हुआ पहला युद्ध – India China war

bharat china yudh 1962

  • यह साल ऐसा था जब हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा दिया जा रहा था|
  • साल 1962 में चीन के नेता माओत्से तुंग ने ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ आंदोलन की असफलता के कारण कम्युनिस्ट पार्टी पर अपना फिर से नियंत्रण कायम करने के लिए युद्ध का ऐलान कर दिया था|
  • 20 अक्तूबर 1962 को भारत पर चीन ने मैकमोहन रेखा के पार पहली बार हमला किया गया था|
  • जब साल 1959 में भारत ने दलाई लामा को शरण दी थी| तब से चीन भारतीय सीमाओं पर हिंसक घटनाओं को अंजाम दे रहा था|
  • युद्ध में ज़्यादातर लड़ाई 4250 मीटर (14,000 फिट) से अधिक ऊंचाई पर लड़ी गयी|
  • इस युद्ध में दोनों पक्ष द्वारा वायु सेना और नौसेना का इस्तेमाल नहीं किया गया था|
  • साल 1962 के युद्ध में चीन को जीत मिली थी| कहा जाता है कि भारत युद्ध के लिए तैयार ही नहीं था, जिसके वजह से उन्हें ये शिकस्त झेलनी पड़ी|

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1967 नाथू ला और चो ला संघर्ष – Bharat china yudh kab kab hua

1967 की पहली लड़ाई – India China war

bharat china yudh 1967

  • नाथु ला दर्रे पर सैन्य गश्त के दौरान चीन और भारतीय सैनिकों के बीच अक्सर ज़ुबानी लड़ाई होती रहती थी। एक दिन ये ज़ुबानी जंग धक्का मुक्की में बदल गई। 11 सितंबर 1967 को धक्का मुक्की की इस झड़प को देखते हुए भारतीय सेना ने नाथू ला से सेबु ला के बीच में तार बिछाने का निर्णय लिया|
  • चीनी सेना ने इस फैसले का विरोध किया और जब वहां बाड़बंदी शुरू हुई तो चीन के पॉलिटिकल कमीसार ने राय सिंह से इस कार्य को रोकने को कहा। दोनों देशों के बीच इसको लेकर बहस शुरू हुई और चीन के अधिकारी के साथ धक्का मुक्की से ये तनाव और ज़्यादा बढ़ गया।
  • इसके बाद चीन की सेना अपने बंकर में वापस लौट गई, लेकिन इस दैरान भारत की ओर से वहां तार बिछाना जारी रहा। इसके कुछ मिनटों के अंदर चीनी सीमा से चीनी सैनिकों ने मेडियम मशीन गनों से भारतीय सैनिकों पर गोलियां दागना शुरू कर दिया, जिसमें भारत के 70 सैनिक शहीद हो गए और कई घायल हुए।
  • भारत की ओर से जवाबी कार्यवाही की गई, जिसमें उन्होंने जमकर आर्टिलरी पावर का इस्तेमाल किया, जिससे कई चीनी बंकर नष्ट हो गए। खुद चीन की ओर से ये बयान दिया गया कि इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने उनके तीस हज़ार से ज़्यादा जवान मारे हैं।
  • इस दौरान तीन दिनों तक भारतीय सेना ने लगातार फायरिंग की थी और चीन की मशीनगन यूनिट को पूरी तरह से तबाह कर दिया था। चीन को इस युद्ध में हार का सामना करन पड़ा था।
  • 14 सितम्बर को चीनियों ने धमकी दी कि अगर भारत की ओर से फायरिंग बंद नहीं हुई तो वह हवाई हमला करेगा। तब तक चीन को सबक मिल चुका था और फायरिंग रोक दी गयी और युदध पर विराम लगा दिया गया।
  • नाथु ला दर्रा 14,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित तिब्बत-सिक्किम सीमा है|
  • 1967 के टकराव के दौरान भारत की 2 ग्रेनेडियर्स बटालियन के जिम्मे नाथु ला की सुरक्षा थी|
  • इस बटालियन की कमान तब लेफ्टिनेन्ट कर्नल (बाद में ब्रिगेडियर) राय सिंह के हाथों में थी|

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1967 की दूसरी लड़ाई – India China war

bharat china yudh 2nd 1967

  • 1 अक्टूबर 1967 को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने चाओ ला इलाके में भारतीय सैनकों पर एक बार फिर से हमला किया, लेकिन 7/11 गोरखा राइफल्स एवं 10 जैक राइफल्स नामक भारतीय बटालियनों ने चीनी सेना को दबारा से नाकाम कर दिया|
  • दरअसल भारतीय सैनिक करीब 13 हज़ार फुट ऊंचे चो ला दर्रे पर बनी अपनी चौकियों को ठंड शुरु होते ही खाली कर देते थे। इसके बाद गर्मियों में वो दोबारा से वहां जाकर तैनात हो जाते थे और ये बात चीनी सैनिकों को पता थी।
  • इसी का फायदा उठाते हुए चीनी सैनिकों ने एक अक्टूबर को यह सोचकर चौकियों पर हमला कर दिया कि वो चौकियां अभी खाली होंगी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने उस समय अपनी चौकियों को खाली नहीं किया था।
  • इसके बाद दोनों देशों के सैनिकों के बीच आमने – सामने की सीधी लड़ाई शुरु हो गई। भारतीय सेना ने इस युद्ध में चीनी सैनिकों पर जमकर गोले दागे और चीनी सेना को दोबारा से हराकर जीत हासिल की।
  • इस लड़ाई का नेतृत्व 17वीं माउंटेन डिवीजन के मेजर जनरल सागत सिंह ने किया था।
  • लड़ाई के बाद घायल कर्नल राय सिंह को महावीर चक्र, शहादत के बाद कैप्टन डागर को वीर चक्र और मेजर हरभजन सिंह को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था| इस युद्ध में इन सभी लोगों ने अहम रोल निभाया था|

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1987 में हुआ भारत – चीन का तीसरा युद्ध – India China war

bharat china yudh 1987

  • साल 1987 में भी चीन और भारतीय सेना के बीच टकराव देखने को मिला। इसकी पहल भी चीन की तरफ से की गयी थी। इस झड़प की शुरुआत अरुणाचल प्रदेश के नामका चू से हुई थी।
  • साल 1985 में भारतीय सेना पूरी गर्मी में यहां तैनात रही, लेकिन जब 1986 की गर्मियों में सेना वहां तैनाती के लिए पहुंची तो यहां चीनी सैनिक पहले से मौजूद थे।
  • समदोरांग चू के इस भारतीय इलाके में चीनी सेना अपने तंबू गाड़ चुकी थी। इसे देखते हुए भारतीय सेना ने पूरी कोशिश की कि चीन की सेना यहां से अपनी सीमा में वापस लौट जाए, इसके लिए उन्हें समझाया भी गया, लेकिन चीनी सेना नहीं मानी और वहां पर डटी रही।
  • इन्हें हटाने के लिए तब भारतीय सेना ने ऑपरेशन फाल्कन चलाया और अपने सैनिकों को जगह-जगह एयरलैंड किया। भारतीय सैनिकों ने हाथुंग ला पहाड़ी पर अपनी पोजीशन संभाली, यहां से समदोई चू के साथ ही तीन और पहाड़ी इलाकों पर सैनिकों द्वारा नज़र रखी जा सकती थी।
  • लद्दाख से लेकर सिक्किम तक भारतीय जवान तैनात किए गए। इस गर्मागर्मी के बाद दोनों देशों के बीच हालात काबू में आ गए और बातचीत के माध्यम से इस मामले को शांत किया गया।
  • भारत की इस कार्यवाही से चीन बुरी तरह से हिल गया था। लद्दाख से लेकर सिक्किम तक चीनी सैनाओं ने घुटने टेक दिए थे।
  • साल 1987 के इस युद्ध में कोई हिंसा नहीं हुई और न ही किसी जवान की जान गई। इसी बीच भारत ने मौके का लाभ उठाकर अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया था।

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