इन हॉकी खिलाड़ियों ने जादू की छड़ी से देश ही नहीं, विदेश में भी लहराया परचम

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Bharat ke famous hockey khiladiyon ke naam –  भारत में बहुत से ऐसे हॉकी प्लेयर हैं जिन्होंने अपने अच्छे खेल के कारण पूरी दुनिया में नाम रोशन किया और भारत का मान बढ़ाया।  बेहतरीन खेल के चलते इन्हें कई बार सम्मानित किया गया है। भारतीय खेल के इतिहास में हॉकी का बहुत महत्व रहा है| तो चलिए आज हम आपको भारत के उन प्लेयर के बारे में बताते हैं जिन्होंने हॉकी में इतिहास रचा|bharat ke famous hockey khiladiyon ke naam

Bharat ke famous hockey khiladiyon ke naam – Indian hockey players ke bare mein – भारत के फेमस हॉकी खिलाडियों के बारे में

ध्यानचंद

dhyan chand

  • ध्यानचंद को हॉकी की दुनिया का भगवान कहा जाता है| उनका जन्म का नाम ध्यान सिंह था, मगर उनके दोस्तों ने उन्हें मेजर ध्यानचंद नाम दिया|
  • मेजर ध्यानचंद हॉकी के जादूगर कहे जाते थे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर में 400 से ज़्यादा गोल किए और लगातार तीन ओलंपिक स्वर्ण पदक के लिए भारत का नेतृत्व किया|
  • अपने शानदार करियर में मेजर ध्यानचंद ने एम्स्टर्डम (1928), लॉस एंजिल्स (1932) और बर्लिन (1936) ओलंपिक जीते थे|
  • भारत को इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाने का सारा श्रेय उन्हें ही जाता है|
  • साल 1926 में भारत की हॉकी टीम विदेश दौरे पर गई थी| यह पहला मौका था जब न्यूजीलैंड में टीम ने कुल 21 मैच खेले और कुल 18 मैच जीते| इस बड़ी कामयाबी में मेजर ध्यानचंद ने ज़रुरी भागीदारी निभाई थी|
  • उन्हें भारत के सर्वोच्च पुरस्कार लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी नवाज़ा गया था|
  • साल 1956 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था|

Bharat ke famous hockey khiladiyon ke naam

बलबीर सिंह – Top  Hockey Players of India

balbir singh

  • बलबीर सिंह हॉकी की दुनिया के वो सितारे थे जिनकी चमक कभी खत्म नहीं होती थी|
  • खालसा कॉलेज हॉकी टीम के कोच हरबैल सिंह ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और हॉकी में मौका दिया|
  • बलबीर सिंह एकमात्र ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने ओलंपिक मैच में नीदरलैंड के साथ फाइनल खेलते हुए 5 गोल किए|
  • बलबीर सिंह लंदन (1948), हेलसिंकी (1952) और मेलबर्न (1956) में तीन ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी थे|
  • मेलबर्न ओलंपिक में साल 1958 और 1962 के एशियाई खेलों में रजत पदक के लिए बलबीर सिंह ने कप्तानी करते हुए भारतीय टीम का भी प्रतिनिधित्व किया|
  • हॉकी के प्रति इनके जुनून और मेहनत को देखते हुए साल 1957 में बलबीर सिंह को पद्म श्री पुरस्कार दिया गया|
  • वह 1975 विश्व कप विजेता भारतीय टीम के मैनेजर भी थे|
  • अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक कमेटी ने आधुनिक ओलंपिक इतिहास के 16 महानतम खिलाड़ियों में उनका नाम शामिल किया था|
  • हॉकी के अलावा बलबीर सिंह लिखने के शौक़ीन थे उन्होंने दो ऑटो बायोग्राफी लिखी “दा गोल्डन हैटट्रिक” और “दा गोल्डन यार्डट्रिक”।
  • 25 मई 2020 को सांस की तकलीफ होने से 96 साल की उम्र में उनका निधन हो गया|

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धनराज पिल्लै – Top  Hockey Players of India in Hindi

dhanraj pillay

  • धनराज पिल्लै फील्ड हॉकी खिलाड़ी और भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान हैं| उनका जन्म महाराष्ट्र में पूना के पास खड़की में हुआ|
  • अंतरराष्ट्रीय हॉकी में धनराज पिल्लै की शुरुआत 1989 में नई दिल्ली में आयोजित एल्विन एशिया कप से हुई थी| उन्होंने कुल 339 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और 170 से ज़्यादा गोल किये हैं|
  • धनराज इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने चार ओलंपिक, चार विश्व कप, चार चैंपियंस ट्राफी और चार एशियाई खेलों में भाग लिया है|
  • इंडियन टीम के साथ-साथ वह विदेशी क्लब में खेल चुके हैं जिसमें द इंडियन जिमखाना (लंदन), एचसी ल्योन (फ़्रांस), बीएसएन एचसी एंड टेलीकोम मलेशिया एचसी (मलेशिया), अबाहनी लिमिटेड (ढाका) और एचटीसी स्टुटगार्ट किकर्स (जर्मनी) शामिल हैं|
  • धनराज पिल्लै की कप्तानी में भारत ने 1998 का एशियाई खेल और 2003 में एशिया कप जीता|
  • अपने शानदार करियर के बाद अगस्त 2004 में उन्होंने रिटायरमेंट लिया|
  • इस समय वह भारतीय हॉकी फेडरेशन के सदस्य और भारतीय हॉकी टीम के प्रबंधक हैं|
  • उनके जीवन पर संदीप मिश्रा द्वारा एक किताब भी लिखी गयी जिसका नाम “फोर्गिव मी अम्मा (मुझे माफ कर दो माँ)” हैं, इस किताब में उनके करियर से जुड़ी कई अहम बाते बताई गयी हैं|

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धनराज पिल्लै को दिए गए अवार्ड

  • भारत के सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया|
  • 2000 में उन्हें नागरिक सम्मान पद्म श्री दिया गया|
  • जर्मनी में आयोजित 2002 चैंपियंस ट्रॉफी में उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया|

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लेस्ली क्लॉडियस

leslie claudius

  • लेस्ली क्लॉडियस का जन्म 25 मार्च 1927 को बिलासपुर,छत्तीसगढ़ में हुआ| बचपन से वह खेलों में अपनी रुचि रखते थे|
  • क्लॉडियस पहले बंगाल नागपुर रेलवे टीम के लिए फुटबॉल खेलते थे, मगर 1946 में उन्हें बेटन कप के लिए बंगाल नागपुर हॉकी टीम में चयनित किया गया, जिसके बाद उन्होंने हमेशा के लिए फुटबॉल को अलविदा कह दिया|
  • वह 1948 के लंदन ओलंपिक, 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक और 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य थे|
  • लेस्ली क्लॉडियस ने उधम सिंह के साथ मिलकर भारत के लिए सबसे ज़्यादा ओलंपिक मेडल जीते जिसमें 3 गोल्ड और 1 सिल्वर है|
  • वह पहले ऐसे हॉकी खिलाड़ी थे जिन्होंने लगातार चार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 100 कैप जीते|
  • साल 1960 में रोम ओलंपिक में भारतीय टीम की कप्तानी की और सिल्वर मेडल जीता|
  • साल 1978 में वह बैंकाक एशियाई खेलों में भारतीय टीम के मैनेजर रह चुके हैं|
  • साल 2012 में लंदन ओलंपिक्स के दौरान तीन भारतीय खिलाड़ियों के नाम पर वहां की मेट्रो स्टेशन के नाम रखे गए जिनमें भारतीय हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद, रूप सिंह और क्लॉडियस के नाम शामिल हैं|
  • 20 दिसंबर 2013 को क्लॉडियस का निधन 85 वर्ष की आयु में हुआ|

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उधम सिंह – Indian hockey players ke bare mein

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  • जालंधर, पंजाब के रहने वाले उधम सिंह का जन्म 4 अगस्त 1928 को हुआ था, उन्होंने विक्टर हाई स्कूल और डीएवी कॉलेज, जलंधर से पढ़ाई पूरी की|
  • उधम सिंह को उनकी प्रतिभा के साथ-साथ छोटे कद काठी की वजह से भी जाना जाता था, उनकी हाइट केवल 5 फुट 6 इंच थी|
  • 1947 में उधम सिंह को कॉलेज हॉकी टीम का कप्तान बनाया गया था और बहुत सालों तक वह पंजाब पुलिस के लिए खेले। इसके बाद उनकी प्रतिभा को देखते हुए 1954 में पंजाब की स्टेट हॉकी टीम का कप्तान बनाया गया|
  • अपने हॉकी करियर के दौरान उन्होंने 3 ओलंपिक स्वर्ण पदक और 1 सिल्वर मेडल जीता|
  • 1960 के रोम ओलंपिक में रजत पदक जीतने के अलावा यह हेलसिंकी (1952), मेलबर्न (1956) और टोक्यो (1964) ओलंपिक स्वर्ण विजेता टीमों का हिस्सा रह चुके हैं|
  • भारत सरकार द्वारा उन्हें 1965 में अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया|
  • वह अपने खेल के स्टाइल को लेकर भी बहुत मशहूर थे, ज़्यादातर उधम सिंह लेफ्ट इनसाइड, राइट इनसाइड, सेंटर फॉरवर्ड और सेंटर हाफ पोजीशन के साथ खेलते थे|

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अजीत पाल सिंह

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  • भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान को दुनिया के सबसे असाधारण सेंटर-हाफ खिलाड़ियों में से एक माना जाता है|
  • अजीत सिंह का जन्म 1 अप्रैल 1947 को पंजाब के जालंधर छावनी के पास एक छोटे से गाँव संसारपुर में हुआ|
  • वह बचपन सेर हॉकी खेलने के शौक़ीन थे| लायलपुर खालसा कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ उन्होंने हॉकी का अभ्यास जारी रखा और पढ़ाई पूरी होने के बाद बॉर्डर सिक्योरिटी फॉर्स में शामिल हुए|
  • साल 1966 में जापान जाने वाली टीम में उन्हें चुना गया जिसके बाद उनके कदम कभी नहीं रुके|
  • अजीत पाल सिंह ने भारत में 1975 में विश्व कप जीतने में अहम रोल निभाया था|
  • वह सेंटर हाफ पोजीशन खेलने के लिए जाने जाते हैं|
  • भारत सरकार द्वारा उन्हें 1992 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया जिसके बाद
  • भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) ने 2012 में कैप्टन अजीत पाल सिंह को लंदन ओलम्पिक के लिए भारतीय दल का प्रमुख नियुक्त किया|

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