बेहद कठिन धार्मिक यात्राओं के लिए जाने जाते हैं भारत के ये मंदिर

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bharat ki sabse kathin dharmik yatra – भारत में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं जिनकी यात्राएं बेहद कठिन हैं। इसी की वजह से यहां आना भक्तों के लिए कई बार बहुत मुश्किल हो जाता है। कठिन यात्रा होने के बाद भी श्रद्धालु मन में सच्ची आस्था लिए भगवान के मंदिरों तक चले जाते हैं। यहीं आस्था भक्तों को मंदिर तक आने के लिए मजबूर करती है। तो चलिए आज हम आपको ऐसे ही धार्मिक स्थलों के बारे में बताते हैं जिन्हें भारत की कठिन यात्राओं में गिना जाता है।

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वैष्णो देवी – bharat ki sabse kathin dharmik yatra

वैष्णो देवी

  • भारत के जम्मू और कश्मीर में स्थित वैष्‍णो देवी मंदिर अपनी धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है। यह मंदिर समुद्रतल से 5,200 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस मंदिर की यात्रा बेहद ही दुर्गम है।
  • इस मंदिर तक पहुंचने के लिए कटरा से 14 किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। हालांकि इस मंदिर तक जाने के लिए अब हेलीकॉप्‍टर की मदद भी ली जाती है।
  • माता वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा को देश के सबसे पवित्र और कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक माना जाता है। मुश्किलों से भरी इस यात्रा के बावजूद हर साल करीब 1 करोड़ श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन करने पहुंचते हैं।

अमरनाथ

अमरनाथ

  • अमरनाथ मंदिर, श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में 135 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। समुद्रतल से इसकी ऊंचाई 13600 फुट है।
  • अधिक ऊंचाई पर होने के कारण कभी—कभार यहां का तापमान शून्य से भी कम हो जाता है।
  • इस मंदिर की यात्रा करने से पहले रजिस्‍ट्रेशन करवाना होता है। बीमार और कमज़ोर व्यक्तियो को यहां जाने की अनुमति नहीं दी जाती है।
  • सुरक्षा की दृष्टि से ये यात्रा बेहद ही संवेदनशील और संदिग्ध मानी जाती है।

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कैलाश मानसरोवर

कैलाश मानसरोवर

  • कैलाश मानसरोवर की यात्रा शिव भक्तों के लिए जानी जाती है। यह मंदिर समुद्रतल से लगभग 4556 की ऊंचाई पर स्थित है।
  • यहां की कठिन यात्रा करने के लिए चीन से होकर जाना होता है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरे 28 दिन की होती है।
  • यहां से ही कई मुख्य नदियां निकलतीं हैं, जिनमें ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलुज आदि हैं। हिन्दू सनातन धर्म में इसे पवित्र माना गया है।

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शिखर जी

शिखर जी

  • झारखंड राज्य के गिरीडीह ज़िले में छोटा नागपुर पठार पर स्थित विश्व का सबसे महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल शिखर जी है। इस जगह के बारे में कहा जाता है कि जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने इसी जगह पर मोक्ष की प्राप्ति की थी।
  • 1,350 मीटर (4,430 फ़ुट) ऊँचा यह पहाड़ झारखंड का सबसे ऊंचा स्थान भी है। 20 तीर्थंकरों की मोक्ष प्राप्ति की जगह होने के कारण इस जगह को ‘तीर्थों का राजा’ के नाम से भी जाना जाता है।
  • यहाँ हर साल लाखों जैन धर्मावलंबी और अन्य पर्यटक वंदना करने आते हैं।

बद्रीनाथ

बद्रीनाथ

  • उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है। यह भारत के चार धामों में से एक है। यह एक प्राचीन मंदिर है जिसका निर्माण 7वीं और 9वीं सदी में होने के प्रमाण मिलते हैं।
  • इस मंदिर के बारे में विष्णु पुराण, महाभारत तथा स्कन्द पुराण जैसे कई प्राचीन ग्रन्थों में उल्लेख किया गया है।
  • समुद्रतल से बद्रीनाथ मंदिर की ऊँचाई 3,133 मीटर है, जिस वजह से यहां की यात्रा दुर्गम मानी जाती है। फिर भी यहां हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए आते हैं।
  • इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि नौवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य छह महीनों के लिए बद्रीनाथ और फिर शेष वर्ष केदारनाथ में रहते थे।

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हेमकुंड साहेब

हेमकुंड साहेब

  • उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित हेमकुंड साहिब सिखों का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। यह हिमालय में 4632 मीटर (15,200 फुट) की ऊँचाई पर एक बर्फ़ीली झील के किनारे सात पहाड़ों के बीच स्थित है।
  • इस स्थान का उल्लेख गुरु गोबिंद सिंह द्वारा रचित दसम ग्रंथ में आता है। इस कारण यह उन लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है जो दसम ग्रंथ में विश्वास रखते हैं। इसी कारण श्रद्धालु दूर—दूर से यहां आते हैं।
  • हेमकुंड साहेब तक पहुंचने के लिए 20 किलोमीटर से भी अधिक पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है और ये यात्रा बहुत ही दुर्गम है।

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