Bhojeshwar Mandir Bhojpur – ये मंदिर सदियों बाद भी है अधूरा, मंदिर में है विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग

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Bhojeshwar mandir Bhojpur –   भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जिनके बारे में आज भी इतिहासकार खोजबीन करने में लगे हुए हैं| ऐसा ही एक भोजेश्वर मंदिर है, जो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है| यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है| यह मगर मंदिर  अधूरा बना हुआ है जिसे आज भी अनसुलझा रहस्य कहा जाता है| तो चलिए आपको मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं और इतिहास के बारे में बताते हैं|

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Bhojeshwar mandir Bhojpur – भोजेश्वर मंदिर के बारे में – bhojpur temple facts

कहां है भोजेश्वर मंदिर? – Bhojeshwar temple story

  • भोजेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित भोजपुर नामक गाँव में है| यह मन्दिर बेतवा नदी के तट पर विन्ध्य पर्वतमालाओं के मध्य एक पहाड़ी पर बना हुआ है|
  • इस मंदिर का निर्माण और शिवलिंग की स्थापना धार के प्रसिद्ध परमार राजा भोज द्वारा की गयी थी| इसे भोजपुर मंदिर या भोजेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है|
  • यह मंदिर शिव को समर्पित है|

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मंदिर में रखा शिवलिंग क्यों है खास? bhojpur temple facts

  • मंदिर में रखा शिवलिंग सबसे ऊँचा और विशाल शिवलिंग माना जाता है|
  • मंदिर का एंट्री गेट भी किसी हिंदू भवन के दरवाजों में सबसे बड़ा है|
  • यहाँ मौजूद शिवलिंग की ऊंचाई 40 फीट से अधिक है और शिवलिंग की लंबाई 5 फीट है| यह शिवलिंग 21.5 फीट चौड़ा है|
  • चिकने लाल बलुआ पाषाण के बने इस शिवलिंग को एक ही तरह के पत्थर से तैयार किया गया है|

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मंदिर का इतिहास  – History of Bhojeshwar temple

  • किंवदंतियों के अनुसार इस स्थल के मूल मंदिर की स्थापना पाँडवों द्वारा की गई है|
  • इसे “उत्तर भारत का सोमनाथ” भी कहा जाता है|
  • मंदिर के शिलालेखों के अनुसार मंदिर की गुम्बद भारत में इस्लाम आने से भी पहले का है|
  • स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के पास बनी एक पहाड़ी में इस मंदिर का नक्शा आज भी देखा जा सकता है, जिससे सब यह अंदाज़ा लगाते हैं कि मंदिर को बनाने से पहले उसका नक्शा बनाया गया होगा|
  • मंदिर को भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा राष्ट्रीय महत्त्व का स्मारक घोषित किया गया है| इस मंदिर का रेनोवेशन का काम भी भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किया जा रहा है|
  • मगर इतिहासकारों का मानना है कि इस प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज (1010 ई-1055 ई) द्वारा किया गया था| कुछ मान्यताओं के अनुसार यहाँ के टूटे हुए बांध का निर्माण भी उनके द्वारा करवाया गया था|
  • इसके अलावा मंदिर के गर्भगृह पर शिव-पार्वती, ब्रह्मा-सरस्वती, राम-सीता एवं विष्णु-लक्ष्मी की मूर्तियां स्थापित हैं|
  • मंदिर की बाहरी दीवारों पर भी कुछ मूर्तियों के चित्र देखे जा सकते हैं|
  • यहाँ 40 फीट ऊंचाई वाले चार अनोखे स्तम्भ हैं|
  • मंदिर के चबूतरे को देख कर ऐसा कहा जाता है कि यहाँ अन्य मंदिर बनाने की भी योजना थी|
  • मुख्य मंदिर से लगभग 200 मी॰ की दूरी पर ही भोजेश्वर मंदिर को समर्पित एक संग्रहालय बना हुआ है|
  • मंदिर के पास बेतवा नदी है, जहां पर कुंती द्वारा कर्ण को छोड़ने की जनकथाएं प्रचलित हैं|

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मंदिर से जुड़ी कहानी –  stories related to Bhojeshwar temple
कहानी – 1

  • ऐसी कितवंती है कि द्वापर युग में पांडवों द्वारा माता कुंती द्वारा भगवान शिव की पूजा के लिए इस शिवलिंग का निर्माण एक रात में पूरा करने का संकल्प लिया गया था, जो पूरा नहीं हो सका|
  • आज भी यह मंदिर अधूरा बन हुआ है| माता कुंती के पिता का नाम भी राजाभोज था इस कारण इसका नाम भोजपुर पड़़ा|
  • यह द्वापर युग का निर्मित मंदिर है|

कहानी – 2

  • कुछ कहानियों का ऐसा भी कहना है कि भीम घुटनों के बल पर बैठकर यहाँ शिवलिंग पर फूल चढ़ाते थे।

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