Bonalu festival in Hindi – बोनालु त्यौहार कब और क्यों मनाया जाता है

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Bonalu festival in Hindi Bonalu kab hai 2022बोनालु या देवी महाकाली बोनुलू एक हिन्दू त्योहार है, जिसमें देवी महाकाली की पूजा की जाती है। ‘बोनालु’ मुख्यतः तेलंगाना राज्य के जुड़वाँ शहरों, हैदराबाद व सिकंदराबाद तथा इसके समीपवर्ती क्षेत्रों में प्रतिवर्ष हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से ‘आषाढ़ महीने’ (ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से जुलाई/अगस्त माह) में मनाया जाने वाला त्यौहार है। यह तेलंगाना के अलावा भारत के कई अन्य हिस्सों में भी मनाया जाता है। यह द्रविड़ संस्कृति का एक पारम्परिक हिंदू त्यौहार है, जो देवी महाकाली या येल्लम्मा को समर्पित है। त्यौहार के पहले और अन्तिम दिन देवी येलम्मा के लिए विशेष पूजा आयोजित की जाती है। इसमें माता से कामना की जाती है कि उन्हें बीमारियों से बचाएं और सुख-समृद्धि प्रदान करें। लोग माता से अच्छी फसल, खुशहाली और संक्रामक बीमारियों से बचाव की प्रार्थना करते हैं। तो चलिए आपको बताते हैं इस उत्सव को कैसे मनाया जाता है।Bonalu festival in Hindi

Bonalu festival in Hindi

बोनालु त्यौहार कब है 2022 – Bonalu utsav kab hai 2022

03 जुलाई 2022 से बोनालु पर्व शुरु होगा और 24 जुलाई 2022 को समाप्त होगा। बोनालु या देवी महाकाली बोनुलू एक हिन्दू त्यौहार है। इसे प्रतिवर्ष हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से ‘आषाढ़ महीने’ (ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से जुलाई/अगस्त माह) में मनाया जाता है।

बोनालु त्यौहार की शुरूआत कैसे हुई?kaise shuru hua Bonalu utsav –  kab hui Bonalu tyohar ki shuruat

लोगों का मानना था कि महाकाली के क्रोध के कारण महामारी आई थी और उन्हें शांत करने के लिए बोनालु त्यौहार की शुरुआत हुई। ऐसी मान्यता है कि साल 1813 में भारत के दो बड़े राज्यों हैदराबाद और सिंकदराबाद में हैजा नमक संक्रामक बीमारी बड़ी ही तेज़ी से फैली जिसके कारण हज़ारों मौतें हुईं थीं। इस बीमारी से बचने के लिए शहर की आर्मी ने मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में महाकाली के मंदिर में पूजा की और यह मन्नत मांगी की अगर यह बीमारी की समस्या टल जाती है तो वे शहर में मां काली की मूर्ति स्थापित करेंगे। पूजा के बाद शहर से हैजा का संक्रमण धीरे-धीरे कम होने लगा, जिसके बाद आर्मी के जवानों ने यहां मां काली की मूर्ति स्थापित की। तब से लेकर अब तक निरंतर प्रति वर्ष यह उत्सव मनाया जाता है।

बोनालु उत्सव में शोभा यात्रा निकाली जाती है –  Bonalu utsav mein shobha yatra nikali jati hai   

महाकाली की विशेष पूजा में एक बड़े जुलूस का आयोजन किया जाता है और इसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। शोभायात्रा के दौरान महिलाएं अपने सिर पर चावल, दूध और गुड़ से बने प्रसाद को मिट्टी के बर्तन में रख के मंदिर जाती हैं और इनके पीछे श्रद्धालु चलते हैं। इस उत्सव में महिलाएं और पुरुष पारंपरिक पोशाक पहनते हैं।

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बोनालु त्यौहार में पशुओं की बलि दी जाती है – Bonalu utsav me pashu ki bali di jati hai

इस उत्सव के दौरान देवी महाकाली को खुश करने के लिए पशुओं की बली भी दी जाती है। इसके बाद इस प्रसाद को परिवार के सदस्य मिलकर खाते हैं। देवी को मदिरा भी चढ़ाई जाती है।

रंगनधार्मिक प्रक्रिया से भविष्यवाणी  

बोनालु उत्सव के दौरान एक खास धार्मिक प्रक्रिया अपनाई जाती है जिसे ‘रंगन’ के नाम से जाना जाता है। इसके अंतर्गत एक महिला मिट्टी के बने किसी बड़े घड़े पर खड़ी होती है। अब यह माना जाता है कि उस महिला के अंदर साक्षात महाकाली आ गई हैं, जो लोगों को उनके भविष्य के बारे में बताती हैं। यह धार्मिक प्रक्रिया शोभायात्रा से पहले की जाती है। शोभायात्रा हैदराबाद के गोलकोंडा में स्थित श्री जगदंबिका मंदिर से शुरु होकर सिकंदराबाद के उज्जैनी महाकाली मंदिर और उसके बाद लाल दरवाज़ा माता मंदिर में जाकर समाप्त होती है।

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बोनालु पूजा विधि – Bonalu puja vidhi in hindi

  • बोनालु उत्सव के दौरान महिलाएँ मिट्टी के बर्तन में दूध, चावल और गुड़ को मिलाकर ‘बोनम’ तैयार करती हैं, जिसका तेलुगू भाषा में अर्थ है- ‘माँ को अर्पित किया जाने वाला प्रसाद’।
  • इस मिट्टी के बर्तन के ऊपर नीम के पत्ते, हल्दी, सिंदूर, साड़ी और चूड़ियाँ चढ़ाती हैं और इसके ऊपर एक जलता हुआ दीपक रख देते हैं।
  • महिलाएं इस बर्तन को अपने सिर पर रखकर मंदिरों में जाती हैं और माँ काली को यह बोनम चढ़ाती हैं।
  • बोनम के साथ माँ काली को श्रृंगार की अन्य वस्तुएं जैसे सिंदूर, चूड़ियां, हल्दी और साड़ी भी अर्पित की जाती है।
  • इस त्योहार में माँ के विभिन्न क्षेत्रीय स्वरूपों, जैसे- मयसम्मा, पोचम्मा, येल्लम्मा, पेडाम्मा, अंकलम्मा, मरेम्मा आदि की भी पूजा की जाती है।

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