अगर कुंडली में है चंद्रमा कमज़ोर तो अपनाएं ये उपाय, मिलेगी मनचाही सफलता

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Chandra grah ko majboot karne ke upay – आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे क्या होता है चन्द्र ग्रह और किसी जातक की कुंडली में अगर चन्द्र ग्रह कमज़ोर हो तो उसे किन- किन उपायों से ठीक किया जा सकता है। लेकिन इन उपायों को करने से पहले आपका ये जानना बहुत ज़रुरी है कि आपका चन्द्र ग्रह कितना कमज़ोर है क्योंकि कर्क,मीन, वृश्चिक लग्न के जातकों के लिए चन्द्र,कारक ग्रह होता है और कारक ग्रह के दान नहीं होते। आप चाहें तो हमारी एक्सपर्ट टीम से भी इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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क्या है चंद्र ग्रह – chandra grah ko majboot karne ke upay

  • चन्द्र ग्रह कर्क राशि का स्वामी है। इसका मूल त्रिकोण वर्ष राशि का होता है। इसका रंग सफेद है। इसकी जाति वश्य है। चन्द्र की दिशा ववया कोण यानी उत्तर पश्चिम का कोना है। इसकी धातु कांसा है। यह स्त्री ग्रह है। इसका तत्व जल है। इसका प्रतिनिधि पशु बैल है।
  • यह सातवें घर को पूर्ण दृष्टि से देखता है। चन्द्र के मित्र सूर्य और बुध हैं। राहु इसका शत्रु है। मंगल, शुक्र, गुरु, शनि इसके सम ग्रह हैं न शत्रु न मित्र। काल पुरुष में ये मुख का प्रतिनिधित्व करता है। चंद्र एक राशि में सवा दो दिन रहता है। चन्द्र शुभ ग्रह है व इसका स्वभाव सात्विक है। चन्द्र वृषभ राशि में उच्च व वृश्चिक राशि में नीच का होता है।

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चन्द्र ग्रह दोष निवारण के विभिन्न उपाय- chandra grah ko majboot karne ke upay

मंत्रों व स्त्रोतों के जाप द्वारा निवारण:-

  • चन्द्र द्वारा उत्पन्न पीड़ा को शांत करने के लिए पीड़ित जातक को श्रद्धा पूर्वक नित्य चन्द्रमा के मंत्रों व स्त्रोतों का जाप करना चाहिए।

विनियोग ध्यान मन्त्र

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम ।
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।
ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:।
ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।
ॐ भूर्भुव: स्व: अमृतांगाय विदमहे कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमो प्रचोदयात्।

अन्य चन्द्र ग्रह मंत्र – चन्द्रमा का नाम मंत्र

 ॐ सों सोमाय नम:।

 चंद्रमा गायत्री मंत्र

 ॐ भूर्भुव: स्व: अमृतांगाय विदमहे कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमो प्रचोदयात्।

चंद्रमा का पौराणिक मंत्र

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम ।
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।।

चन्द्रमा के तांत्रोक्त मंत्र 

ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:।
ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।
ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम:।

चन्द्रमा का वैदिक मंत्र 

ॐ इमं देवा असपत्नं ग्वं सुवध्यं।
महते क्षत्राय महते ज्यैश्ठाय महते जानराज्यायेन्दस्येन्द्रियाय इमममुध्य पुत्रममुध्यै
पुत्रमस्यै विश वोsमी राज: सोमोsस्माकं ब्राह्माणाना ग्वं राजा।

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इन मंत्रों का जाप मोती की माला से किया जाता है। ध्यान मन्त्र के लिए किसी माला की ज़रूरत नहीं।

ॐ सों सोमाय नम:।

  • यदि सम्भव हो तो मोती की एक माला से अधिक जाप भी किया जा सकता है। चन्द्र ग्रह दोष निवारण हेतु जप संख्या 11000 होती है, पर कलयुग में इसके चार गुणा मंत्रों की जाप की जानी चाहिए यानी 44000 फिर इसके दस प्रतिशत हिस्से से हवन आहुति दी जाती है यानी 4400 मंत्रों से।
  • अगर खुद सम्भव न हो तो किसी योग्य पंडित से जाप करवाएं। ध्यान रहे यह जाप तब होता है जब अग्नि का वास पृथ्वी पर हो। फिर उपरोक्त सभी कार्य पूर्ण होने के बाद चंद्र देव से अपनी गलती भी माननी चाहिए व माफी मांगे।

यंत्रों द्वारा चन्द्र ग्रह दोष निवारण

  • इस मंत्र को अष्टगन्ध से अनार की कलम से बनाकर कंठ या दाहिनी भुजा पर भी बांध सकते हैं। चंद्र यंत्र की स्थापना करने से आपके मान सम्मान में वृद्धि होती है। चंद्रमा के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए चंद्र यंत्र को अपने घर या कार्यस्थल में स्थापित करें।
  • इस यंत्र को स्थापित कर पूजा करने से मन और मस्तिष्क को शांति मिलती है। चंद्र यंत्र से आपको नौकरी और व्यापार में सफलता प्राप्त होती है। आपके जीवन में आ रही समस्त बाधाओं को यह यंत्र दूर करता है।

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व्रत-उपवास द्वारा चन्द्र ग्रह दोष निवारण

  • सोमवार का व्रत रखने से भी चन्द्र दोष निवारण किया जा सकता है। इसको किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से शुरू करना चाहिए। इसके 16 सोमवार के व्रत रखें जाते हैं।
  • व्रत वाले दिन सुबह आप दूध पी सकते हैं। साय काल में एक समय फलाहार कर लेना चाहिए अथवा नमकरहित भोजन भी कर सकते हैं। साय काल शिव मंदिर में जाये व थोड़ी देर वहां शिव का ध्यान करें।

औषधियों द्वारा चंद्र ग्रह दोष निवारण

  • चन्द्र दोष पीड़ित जातक को नित्य पंचगव्य से स्नान करना अत्यंत लाभदायक है। पंचगव्य में दूध, दही,घी,गोबर तथा मूल का मिश्रण होता है।
  • इसके अतिरिक्त स्नान के जल में फिटकरी,सफेद चंदन,हाथी का मद आदि भी मिला सकते हैं। उपरोक्त सामग्री में से जो मिल जाये कम से कम उसे जल में मिलाकर स्नान करना चाहिए।

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रत्न द्वारा चन्द्र ग्रह दोष निवारण

  • चंद्रमा का प्रतिनिधि रत्न मोती है। इसके लिए सोमवार को या गुरुवार को शुक्लपक्ष में मोती खरीदना चाहिए। इसको जड़वाने का श्रेष्ठ समय पुष्य नक्षत्र है अगर पुष्य नक्षत्र नहीं है तो रोहिणी,हस्त,व श्रवण नक्षत्र भी उत्तम हैं। मोती अखंडित नहीं होने चाहिए।
  • मोती को अंगूठी में ऐसे जड़वाएं कि उसका निचला भाग उंगली को स्पर्श करें। इस अंगूठी को चन्द्र की होरा में साय काल धारण करना चाहिए। इसको पहनने से पूर्व इसको कच्चे दूध में रखें फिर गंगा जल से धोएं अगर गंगा जल उपलब्ध नहीं है तो चांदी के पात्र में रखा हुआ 12 घण्टे पुराना जल भी प्रयोग में ला सकते हैं। जल से धोने के बाद अंगूठी को सफेद कपड़े पर रखे जिस पर चन्द्र यन्त्र बनाया गया हो।
  • यन्त्र की पूजा धूप अगरबत्ती से करनी चाहिए साथ में रत्न की भी। अब निम्न मंत्र का 108 बार जाप करें। ॐ सोम सोमाय नमः इस मंत्र के बाद अंगूठी में चन्द्र देव का वास समझकर अनामिका उंगली में धारण करना चाहिए। इससे भी चन्द्र ग्रह दोष निवारण होता है।

मोती का विकल्प

  • मोती एक मूल्यवान रत्न है। यदि इसे खरीदना सम्भव नहीं है तो उसके उप रत्नों का प्रयोग किया जा सकता है। मोती के स्थान पर मुक्ता, मूनस्टोन व चन्द्र मणि का प्रयोग किया जा सकता है।
  • यदि इनको खरीदना भी सम्भव नहीं है तो फ्लॉस की जड़ का टुकड़ा सफेद धागे व सफेद कपड़े में कंठ में धारण करें इन सब की विधि भी मोती के समान ही है।

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दान से चन्द्र ग्रह दोष निवारण

  • विधिपूर्वक मोती सहित या इसके उपरत्न या जड़ सहित चन्द्र की वस्तुओं का दान करने से गोचरवश व कुंडली चन्द्र दोष का निवारण होता है। सोमवार को सुपात्र को निम्नलिखित वस्तुओं का दान दें। सफेद चीनी अथवा मिश्री, श्वेत शंख,श्वेत वस्त्र, चावल, घी, दही, कपूर तथा चांदी का अपने सामर्थ्य अनुसार दान करें।
  • प्राण प्रतिष्ठित चन्द्र यन्त्र दान करने से भी दोष निवारण होता है। इसमें चावल व चीनी की मात्रा जातक के वज़न के बराबर होनी चाहिए। दान के साथ सामर्थ्यानुसार दक्षिणा भी देनी चाहिए।

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भाव के अनुसार चन्द्र दोष उपाय

प्रथम भाव में चंद्रमा

  • चन्द्र के प्रथम भाव में होने पर बड़ के पेड़ की जड़ में पान डालने से चन्द्र के शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं।

द्वितीय भाव में चंद्रमा

  • चन्द्र के द्वितीय भाव में होने पर दूध व चावल मन्दिर में देना चाहिए। माता की आज्ञा का पालन करने से चन्द्र शुभ प्रभाव देता है। दीर्घायु के लिए माता से चांदी,चावल लेकर सफेद कपड़े में बांधकर अपने पास रखने से भी शुभ होता है। मकान की बुनियाद में चांदी का पत्र गाड़ने से भी चन्द्र अच्छा होता है।

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तृतीय भाव में चन्द्रमा

  • चन्द्र का तृतीय भाव में होने पर जातक को चन्द्र की वस्तुओं का दान करना चाहिए।

चतुर्थ भाव में चंद्रमा

  • यदि चंद्रमा चतुर्थ भाव में पीड़ित है तो दूध का दान करना चाहिए।

पंचम भाव में चंद्रमा

  • यदि पंचम में चन्द्र पीड़ित है तो सफेद कपड़े में चावल,मिश्री बांधकर,बहते पानी में बहाना चाहिए। शिवजी को नित्य सफेद पुष्प चढ़ाने चाहिए।

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छठे भाव में चंद्रमा

  • इस भाव में चन्द्र के होने पर दूध का दान नहीं करना चाहिए अपितु अस्पताल में प्याऊ लगवाना चाहिए।

सप्तम भाव में चन्द्रमा

  • यदि सप्तम में चन्द्र पीड़ित है तो दूध व पानी नहीं बेचना चाहिए।

अष्टम भाव में चंद्रमा

  • यदि अष्टम में चन्द्र पीड़ित है तो सोने में मोती पहनना चाहिए।

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नवम भाव में चंद्रमा

  • यदि चंद्रमा नवम में पीड़ित है तो पूर्णिमा की रात में दूध को चन्द्र रोशनी में रखकर पीना चाहिए।

दशम भाव में चंद्रमा

  • यदि दशम में चन्द्र पीड़ित है तो रात को दूध नहीं पीना चाहिए।

एकादश भाव में चंद्रमा

  • एकादश भाव में चन्द्र पीड़ित होने से चांदी में मोती पहनना चाहिए।

द्वादश भाव में चंद्रमा

  • यदि द्वादश भाव में चन्द्रमा पीड़ित है तो वर्षा का जल घर में रखना चाहिए।

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कुछ अन्य उपाय

  • पानी की टंकी की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • गंगा,यमुना या अन्य पवित्र नदी में स्नान करें।
  • घर की पूज्य स्त्रियों से आशीर्वाद प्राप्त करें।
  • चांदी की अंगूठी पहने।
  • रात्रि के समय दूध न पिएं।

नीचे एक तस्वीर दी जा रही है जिन जातकों को भाव का ज्ञान नहीं है वो यहाँ से भाव का ज्ञान ले सकते हैं। आपका चन्द्रमा खराब है कि नहीं ये जानने के लिए हमारी एक्सपर्ट टीम से सम्पर्क करें या पूछताछ पर क्लिक कर अपना प्रश्न पूछे नीचे ही चंद्र यन्त्र भी दिया जा रहा है।

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विशेष:- 21 जून 2020 को 2009 के बाद सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण है अगर आप जानना चाहते हैं कि यह सूर्य ग्रहण आप के लिए कैसा रहेगा व क्या करें या क्या न करें तो अपनी चन्द्र राशि हमें भेजे। हमारी एक्सपर्ट टीम से सम्पर्क करें या पूछताछ पर क्लिक कर अपने बारे में जाने कि सूर्य ग्रहण में क्या करें या क्या न करें। यह आप के लिए कैसा रहेगा।

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