Chandrayaan-2: जानिए इस मिशन से जुड़े सभी सवालों के बारे में 

Chandrayaan 2 mission details – पहले चंद्रयान 2  (Chandrayaan 2)को 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था पर तकनीकी खराबी के कारण अब इसकी लॉन्चिंग 22 जुलाई को की जाएगी। भारत इससे पहले चंद्रयान 1 (Chandrayaan 1)को सफलतापूर्वक लॉन्च कर चुका है। अब सभी भारतवासियों को चंद्रयान 2 से काफी उम्मीदें हैं। तो चलिए हम आपको बताते हैं क्या है चंद्रयान-2 और क्या है इसका उद्देश्य?

Chandrayaan 2 mission detailsChandrayaan2 mission details

क्या है चंद्रयान-2 ?

  • चंद्रयान-2 असल में चंद्रयान-1 मिशन की ही अगली कड़ी है। इस कड़ी में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल है।

आखिर क्या है मिशन का उद्देश्य ?- Chandrayaan 2 mission details

  • पृथ्‍वी का सबसे नज़दीकी उपग्रह चंद्रमा है। इस वजह से यहां जाना अन्य ग्रहों की तुलना में आसान है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की पकड़ मजबूत करने के लिए यह मिशन ज़रूरी है। 
  • चंद्रयान 2, खोज के एक नए युग को बढ़ावा देने, अंतरिक्ष के प्रति हमारी समझ बढ़ाने, प्रौद्योगिकी की प्रगति को बढ़ावा देने, वैश्विक तालमेल को आगे बढ़ाने और खोज कर्ताओं तथा वैज्ञानिकों की भावी पीढ़ी को प्रेरित करने में भी सहायक होगा।
  • चंद्रयान 2 के मिशन के बाद अंतरिक्ष विज्ञान में भी नई खोजों का रास्ता खुलेगा।

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क्या अंतर है चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 में?

  • चंद्रयान-2 मिशन के द्धारा चांद की सतह पर विक्रममॉड्यूल उतारने की कोशिश की जाएगी। साथ ही  छह पहियों वाले रोवर प्रज्ञानको चांद पर फिट किया जाएगा और इसके ज़रिए कई वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे।
  • जबकि चंद्रयान-1 यह काम नहीं कर पाया था। चंद्रयान-1 का लिफ्ट ऑफ भार 1380 किलोग्राम था, वहीं चंद्रयान-2 का भार 3850 किलोग्राम है।

चंद्रयान-2 अपने साथ किन उपकरणों को लेकर जाएगा?

  • ऑर्बिटर में चंद्रमा की सतह का मानचित्र बनाने और वहां के वायुमंडल (बाहरी वातावरण) के अध्‍ययन के लिए आठ वैज्ञानिक पे-लोड रखे गये हैं।
  • लैंडर में चंद्रमा की सतह और उपसतह के परीक्षणों के लिए तीन वैज्ञानिक पे-लोड लगाए गये हैं। 
  • रोवर में दो पे-लोड हैं जिनसे हमें चंद्रमा की सतह के बारे और ज्‍यादा जानकारी मिल सकेगी। नासा में भी एक अप्रत्‍यक्ष परीक्षण चंद्रयान-2 से किया जाएगा।

चंद्रयान-2 चंद्रमा पर कहां उतरेगा?

  • चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा जहां आज तक कोई नहीं पहुंच पाया है।
  • ऐसा होते ही भारत चांद की सतह पर लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा। इससे पहले चीन, अमेरिका और रूस चांद की धरती पर कदम रख चुके हैं।

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दक्षिणी ध्रुव ही क्यों चुना?

  • चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सूर्य की किरणें सीधी नहीं बल्कि तिरछी पड़ती हैं इसलिए यहां का तापमान बहुत कम होता है। 
  • इसके अलावा इस सतह पर अभी तक कोई भी देश नही पहुंचा है। इससे भ​विष्य में चांद पर होने वाली गतिविधियों का बारीकी से पता चलेगा। 

मिशन पर ​कितना खर्चा और चांद पर पहुंचने का समय ?

  • चंद्रयान-2 मिशन की कुल लागत 978 करोड़ रूपए है। चांद की सतह पर पहुंचने के लिए इसे 54 दिनों का समय लगेगा। 
  • इसके बाद ऑर्बिटर अपना मिशन एक साल तक जारी रखेगा।

मिशन के बारे में 

  • अभी तक चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के कुल 38 प्रयास किये गए हैं, जिनमें से 52 प्रतिशत मौकों पर सफलता मिली है। 

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