Chandrayaan-2: लैंडर विक्रम से भले संपर्क टूट गया, लेकिन इसरो ने रचा इतिहास

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Chandrayaan2 mission detail – चंद्रयान-2 में इसरो अपने मिशन से महज़ दो कदम दूर रह गया। ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ का चांद पर उतरने की प्रक्रिया के दौरान संपर्क टूट गया था। इसरो ने कई प्रयास के बाद मध्य रात्रि करीब सवा दो बजे बताया कि लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया है। ये सपंर्क तब टूटा जब ‘लैंडर विक्रम’ चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर की दूरी पर था। इसके साथ ही वैज्ञानिकों और देश के लोगों के चेहरे पर मायूसी छा गई।

Chandrayaan-2 live updates:

  • चंद्रयान-2 में इसरो अपने मिशन से महज़ दो कदम दूर रह गया। ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ का चांद पर उतरने की प्रक्रिया के दौरान संपर्क टूट गया था।
  • इसरो ने कई प्रयास के बाद मध्य रात्रि करीब सवा दो बजे बताया कि लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया है। ये सपंर्क तब टूटा जब ‘लैंडर विक्रम’ चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर की दूरी पर था। इसके साथ ही वैज्ञानिकों और देश के लोगों के चेहरे पर मायूसी छा गई।
  • अपने शुरुआती सभी चरणों को सफलतापूर्वक पार करने के बाद लैंडिंग से पहले लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया। इस दौरान इसरो प्रमुख के. सीवन ने वहां मौजूद पीएम मोदी से कुछ कहा और अटकलें लगाई जाने लगीं कि मिशन चंद्रयान-2 फेल हो गया है।
  • लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर से संपर्क टूटने के बावजूद मिशन की 95 प्रतिशत सफलता ऑर्बिटर पर निर्भर है जो अभी भी चंद्रमा का सफलतापूर्वक चक्कर काट रहा है।
  • मिशन असफल होने के बाद पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया और कहा कि जीवन में उतर-चढ़ाव आते रहते हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अभी इस मिशन को असफल नहीं कहा जा सकता है, लैंडर से पुन: स्थापित हो सकता है।
  • चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम शुक्रवार-शनिवार की रात 1.30 से 2.30 बजे के बीच चांद के दक्षिण ध्रुव पर उतरेगा।
  • विक्रम में से रोवर प्रज्ञान सुबह 5.30 से 6.30 के बीच बाहर आएगा। प्रज्ञान चंद्रमा की सतह पर एक लूनर डे (चांद का एक दिन) में ही कई प्रयोग करेगा।
  • लैंडर के अंदर ही रोवर (प्रज्ञान) रहेगा। प्रति 1 सेंटीमीटर/सेकंड की रफ्तार से लैंडर से बाहर निकलेगा। इसे निकलने में 4 घंटे लगेंगे। बाहर आने के बाद यह चांद की सतह पर 500 मीटर तक चलेगा। यह चंद्रमा पर 1 दिन (पृथ्वी के 14 दिन) काम करेगा।
  • चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहा ऑर्बिटर एक साल तक मिशन पर काम करता रहेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच कम्युनिकेशन करना है। इसके साथ ही ऑर्बिटर चांद की सतह का नक्शा तैयार करेगा, ताकि चांद के अस्तित्व और विकास का पता लगाया जा सके। रोवर चांद की सतह पर खनिज तत्वों की मौजूदगी का पता लगाएगा।
  • चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 के उतरने के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इसरो मुख्यालय में मौजूद रहेंगे।
  • मोदी के साथ स्पेस क्विज जीतने वाले देशभर के 70 बच्चे और उनके माता-पिता को भी इसरो ने आमंत्रित किया है।
  • इससे पहले अमेरिका, चीन और रूस के यान चांद के दूसरे हिस्से में उतर चुके हैं।

Chandrayaan2 mission detail
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क्या है चंद्रयान-2 ?

  • चंद्रयान-2 असल में चंद्रयान-1 मिशन की ही अगली कड़ी है। इस कड़ी में ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल है।

आखिर क्या है मिशन का उद्देश्य ?- Chandrayaan 2 mission details

  • पृथ्‍वी का सबसे नज़दीकी उपग्रह चंद्रमा है। इस वजह से यहां जाना अन्य ग्रहों की तुलना में आसान है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की पकड़ मजबूत करने के लिए यह मिशन ज़रूरी है। 
  • चंद्रयान 2, खोज के एक नए युग को बढ़ावा देने, अंतरिक्ष के प्रति हमारी समझ बढ़ाने, प्रौद्योगिकी की प्रगति को बढ़ावा देने, वैश्विक तालमेल को आगे बढ़ाने और खोज कर्ताओं तथा वैज्ञानिकों की भावी पीढ़ी को प्रेरित करने में भी सहायक होगा।
  • चंद्रयान 2 के मिशन के बाद अंतरिक्ष विज्ञान में भी नई खोजों का रास्ता खुलेगा।

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                            ये भी पढ़ें: जानिए चंद्रयान-2 मिशन से जुड़ी खास बातें

क्या अंतर है चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 में?

  • चंद्रयान-2 मिशन के द्धारा चांद की सतह पर विक्रममॉड्यूल उतारने की कोशिश की जाएगी। साथ ही  छह पहियों वाले रोवर प्रज्ञानको चांद पर फिट किया जाएगा और इसके ज़रिए कई वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे।
  • जबकि चंद्रयान-1 यह काम नहीं कर पाया था। चंद्रयान-1 का लिफ्ट ऑफ भार 1380 किलोग्राम था, वहीं चंद्रयान-2 का भार 3850 किलोग्राम है।

चंद्रयान-2 अपने साथ किन उपकरणों को लेकर जाएगा?

  • ऑर्बिटर में चंद्रमा की सतह का मानचित्र बनाने और वहां के वायुमंडल (बाहरी वातावरण) के अध्‍ययन के लिए आठ वैज्ञानिक पे-लोड रखे गये हैं।
  • लैंडर में चंद्रमा की सतह और उपसतह के परीक्षणों के लिए तीन वैज्ञानिक पे-लोड लगाए गये हैं। 
  • रोवर में दो पे-लोड हैं जिनसे हमें चंद्रमा की सतह के बारे और ज्‍यादा जानकारी मिल सकेगी। नासा में भी एक अप्रत्‍यक्ष परीक्षण चंद्रयान-2 से किया जाएगा।

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चंद्रयान-2 चंद्रमा पर कहां उतरेगा?

  • चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा जहां आज तक कोई नहीं पहुंच पाया है।
  • ऐसा होते ही भारत चांद की सतह पर लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा। इससे पहले चीन, अमेरिका और रूस चांद की धरती पर कदम रख चुके हैं।

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दक्षिणी ध्रुव ही क्यों चुना?

  • चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सूर्य की किरणें सीधी नहीं बल्कि तिरछी पड़ती हैं इसलिए यहां का तापमान बहुत कम होता है। 
  • इसके अलावा इस सतह पर अभी तक कोई भी देश नही पहुंचा है। इससे भ​विष्य में चांद पर होने वाली गतिविधियों का बारीकी से पता चलेगा।

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मिशन पर ​कितना खर्चा और चांद पर पहुंचने का समय ?

  • चंद्रयान-2 मिशन की कुल लागत 978 करोड़ रूपए है। चांद की सतह पर पहुंचने के लिए इसे 54 दिनों का समय लगेगा। 
  • इसके बाद ऑर्बिटर अपना मिशन एक साल तक जारी रखेगा।

मिशन के बारे में 

  • अभी तक चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के कुल 38 प्रयास किये गए हैं, जिनमें से 52 प्रतिशत मौकों पर सफलता मिली है। 

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