Darsh Amavasya 2021 – जानिए दर्श अमावस्या का महत्व, कथा और शुभ मुहूर्त

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Darsha amavasya shubh muhurat katha in hindi – Darsha amavasy mahatva, katha, shubhu muhurat – दर्श अमावस्या को साल भर में पड़ने वाली समस्त अमावस्याओं में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। आमतौर पर अमावस्या हर महीने के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को मनाई जाती है, लेकिन दर्श अमावस्या हर वर्ष शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है जिस कारण इसे दर्श अमावस्या के नाम से जाना जाता है। दर्श अमावस्या के दिन आसमान में चांद पूरी तरह से गायब हो जाता है और इस दिन विशेष रूप से चंद्र देवता की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। तो चलिए जानते हैं इस साल कब है दर्श अमावस्या, इसकी पूजा विधि, कथा और महत्व।Darsha amavasya shubh muhurat katha in hindi

Darsha amavasya shubh muhurat katha in hindi – Darsha amavasya 2021

कब है दर्श अमावस्या? kab hai Darsha Amavasya

इस साल दर्श अमावस्या 3 दिसंबर 2021 को पड़ेगी। पूरे विधि- विधान से इस दिन पूजा की जाएगी।

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दर्श अमावस्या का महत्व – Darsha Amavasya mahatva in hindi

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति दर्श अमावस्या के दिन अपने पितरों को पूजते हैं, उनकी कुंडली से पितृ दोष हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। ऐसा माना जाता है कि दर्श अमावस्या के दिन चंद्र देवता को प्रसन्न करने से व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं भी पूर्ण हो जाती हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के बाद चंद्रमा को ही सबसे शक्तिशाली ग्रह का दर्जा दिया गया है। ऐसे में माना जाता है कि यदि आप दर्श अमावस्या के दिन चंद्र देवता को खुश रखने के लिए विधिवत उपाय करते हैं, तो वह आपकी कुंडली में मजबूत स्थिति में आ जाता है जिससे आपके जीवन में शारीरिक और मानसिक कष्टों का भी निवारण होता है। इसके साथ ही पितरों को प्रसन्न करके आप उनका भी आशीर्वाद पाते हैं। इस दिन चंद्र देवता और श्राद्ध की महत्ता के चलते इसे चांद या श्राद्ध की अमावस्या भी कहा जाता है। दर्श अमावस्या के दिन चंद्र देव की आराधना करने से आपके जीवन में समृद्धि बनी रहती है और यह आपके सौभाग्य में भी वृद्धि का सूचक है। दर्श अमावस्या के दिन गंगा स्नान, दान पुण्य और उपवास का विशेष महत्व है। जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखते हैं, उन पर चंद्र देवता की कृपा सदैव बनी रहती है।

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दर्श अमावस्या की कथा – Darsha Amavasya katha in hindi – Darsha Amavasya katha pdf in hindi

पौराणिक कथा के अनुसार, पुराने समय की बात है कि समस्त बारहसिंह आत्माएं सोमरोस पर रहा करती थीं। उनमें से एक आत्मा ने गर्भ धारण करने के बाद एक खूबसूरत सी कन्या को जन्म दिया जिसका नाम अछोदा रखा गया। अछोदा बचपन से ही अपनी माता की देख रेख में पली बढ़ी। ऐसे में उसे शुरू से ही अपने पिता की कमी महसूस होती थी जिस कारण एक बार उसे सारी आत्माओं ने मिलकर धरती लोक पर राजा अमावसु की पुत्री के रूप में जन्म लेने को कहा। राजा अमावसु एक प्रसिद्ध और महान राजा थे जिन्होंने अपनी पुत्री अछोदा का लालन पोषण बहुत अच्छे से किया। ऐसे में पिता का प्यार पाकर अछोदा काफी प्रसन्न रहने लगी और आगे चलकर उसने पितरों को इतनी अच्छी ज़िंदगी प्रदान करने के लिए धन्यवाद करने की सोची जिसके लिए उसने राजमहल में पितृ पूजन की व्यवस्था कराई। तभी से श्राद्ध अमावस्या के दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए दान पुण्य इत्यादि किया जाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि पितरों का श्राद्ध करते समय चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए, इसलिए दर्श अमावस्या के दिन चांद की अनुपस्थिति में व्रत और दान पुण्य आदि विधि – विधान से किया जाता है।

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दर्श अमावस्या का शुभ मुहूर्त – Darsha Amavasya shubh muhurat

  • दिसम्बर 3, 2021, दर्श अमावस्या
  • दर्श अमावस्या प्रारम्भ – 04:55 पी एम, दिसम्बर 03
  • दर्श अमावस्या समाप्त – 01:12 पी एम, दिसम्बर 04

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दर्श अमावस्या के दिन कैसे करें पूजा? – Darsha Amavasya puja vidhi, Vrat Vidhi

  • दर्श अमावस्या के दिन सबसे पहले प्रात:काल उठकर गंगा स्नान या गंगा जल से स्नान करना चाहिए।
  • इसके बाद भगवान शिव और पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। आप ॐ नमः शिवाय या ओम श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्राय नम: (चंद्र देवता का बीज मंत्र) आदि का भी जाप कर सकते हैं।
  • दर्श अमावस्या के दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व होता है।
  • जो लोग चंद्र देवता का व्रत करते हैं, उन्हें रात्रि के समय चंद्रमा को अर्घ्य भी देना चाहिए।
  • दर्श अमावस्या के दिन हनुमान चालीसा या हनुमान जी की पूजा करने से भी विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसके चारों ओर परिक्रमा करें। इससे पितृ आपसे प्रसन्न हो सकते हैं।
  • शिव जी की मूर्ति पर कच्चे दूध, दही और शहद से अभिषेक करें। उन्हें काले तिल चढ़ाएं।
  • दर्श अमावस्या के दिन भगवान शनि देव को नीले फूल चढ़ाने चाहिए। इसके साथ ही काले तिल, साबुत उड़द, कड़वा तेल, काजल और काला कपड़ा आदि भी अर्पित कर सकते हैं।
  • दर्श अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए सूर्य भगवान को भी अर्घ्य दिया जाता है।
  • इस दिन रुद्र, अग्नि, ब्राह्मणों आदि को उड़द, दही और पूड़ी आदि दान करने से फल की प्राप्ति होती है।

इस प्रकार, यदि आपको जीवन में सफलता प्राप्त नहीं हो रही है, आपके कार्यों में काफी अड़चन आ रही हैं तो आपको दर्श अमावस्या के दिन चंद्र देवता का ध्यान अवश्य करना चाहिए।

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