Dattatreya Jayanti shubh muhurat 2020 – जानिए दत्तात्रेय जयंती शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

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Dattatreya Jayanti shubh muhurat puja vidhi 2020 – दत्तात्रेय जयंती के दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा – अर्चना की जाती है। इसे दत्त जयंती के नाम से भी जाना जाता है। दत्तात्रेय जयंती को मुख्य रूप से महराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश में मनाया जाता है। तो चलिए जानते हैं दत्तात्रेय जयंती 2020 कब है। दत्तात्रेय जयंती शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि, कथा।dattatreya jayanti shubh muhurat puja vidhi

Dattatreya Jayanti shubh muhurat puja vidhi 2020दत्तात्रेय जयंती शुभ मुहूर्त, पूजा विधि

कब है दत्तात्रेय जयंती – Kab Hai Dattatreya Jayanti

  • दत्तात्रेय जयंती इस बार 29 दिसंबर 2020 को पड़ रही है। भगवान दत्तात्रेय को विष्णु भगवान का अवतार माना जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार इन्हें शिव भगवान का स्वरूप माना गया है। कहा जाता है कि मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा के दिन दत्तात्रेय जयंती पर पूजा करने पर विष्णु और शिव की कृपा मिलती है।
  • ऐसा माना जाता है कि दत्तात्रेय में विष्णु , ब्रह्मा और महेश तीनों देवों की शक्तियां समाहित हैं। इसके साथ ही इनकी गणना विष्णु भगवान के 24 अवतारों में छठे स्थान पर की जाती है।

दत्तात्रेय जयंती का महत्व  – Dattatreya Jayanti Ka Mahatva  

  • मार्गशीष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। दत्तात्रेय भगवान ऋषि अत्रि और देवी अनुसूया के पुत्र हैं जिन्हें शिव जी, विष्णु भगवान और ब्रह्मा जी तीनों का अवतार माना जाता है। पुराणों के अनुसार ऐसा माना गया है कि दत्तात्रेय ने 24 गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की थी।
  • ऐसा माना जाता है कि दत्तात्रेय भगवान का स्मरण मात्र करने से भक्तों से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इन्हें  ‘’स्मृतिमात्रानुगन्ता” और ”स्मर्तृगामी” भी कहा जाता है।
  • मार्गशीष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को प्रदोष काल में इनका जन्म हुआ था इसलिए हर साल इस दिन दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान दत्तात्रेय की मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है कि दत्तात्रेय भगवान की विधि-विधान से पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसकी कृपा से सभी बिगड़े कार्य बन जाते हैं।

Dattatreya Jayanti shubh muhurat puja vidhi 2020

पूजा विधि (Dattatreya Jayanti Puja Vidhi) 

  • दत्तात्रेय जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। साफ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद घर में भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा स्थापित करें। चाहें तो मंदिर में जाकर भी पूजा कर सकते हैं।
  • प्रतिमा को गंगाजल से साफ करें।
  • अब मूर्ती पर फूल, फल, माला, धूप, दीप, चंदन, हल्दी, मिठाई, अगरबत्ती आदि चीज़े अर्पित करें।
  • दत्तात्रेय भगवान को पीले फूल व पीली चीज़ें अर्पित करें।
  • इसके बाद ॐ द्रां दत्तात्रेयाय स्वाहा’ व ‘ॐ महानाथाय नमः’ इन मन्त्रों का जाप करें।
  •  भगवान से अब कामना की पूर्ति की प्रार्थना कर के व्रत का संकल्प लें।

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शुभ मुहूर्त – shubh muhurat

  • दत्तात्रेय जयन्ती मंगलवार, दिसम्बर 29, 2020
  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – दिसम्बर 29, 2020 को 07:54 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त – दिसम्बर 30, 2020 को 08:57 बजे

Dattatreya Jayanti shubh muhurat puja vidhi 2020

दत्तात्रेय जयंती की कथा (Dattatreya Jayanti Ki Katha) 

  • पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक एक बार पार्वती माता, लक्ष्मी मां और सरस्वती माता को अपने पतिव्रत धर्म पर बहुत घमंड हो गया था। नारद जी को जब इनके घमंड के बारे में पता चला तो इनका घमंड तोड़ने के लिए वो एक – एक करके तीनों देवियों के पास जाकर देवी अनुसूया के पतिव्रत धर्म का गुणगान करने लगे। इससे तीनों देवियां ईर्ष्या से भर उठी। तीनों देवियों ने नारद जी के चले जाने के बाद देवी अनुसूया के पतिव्रत धर्म को भंग करने का फैसला लिया।
  • ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों भगवानों को अपनी पत्नियों के आगे हार माननी पड़ी और तीनों भगवान अनुसूया माता की कुटिया के सामने एक भिखारी की वेशभूषा में जाकर खडे़ हो गए। जब देवी अनुसूया इन्हें भिक्षा देने लगी तब इन्होंने भिक्षा लेने से इंकार कर दिया और भोजन करने की इच्छा ज़ाहिर की। तब देवी अनुसूया उनके लिए भोजन की थाली लेकर आई लेकिन तीनों भगवान ने भोजन करने से इंकार दिया और कहा कि जब तक आप हमें गोद में बिठाकर भोजन नहीं कराएंगी, हम भोजन ग्रहण नहीं करेंगे।
  • अपने पतिव्रत धर्म के बल पर उन्होंने तीनो देवों की मंशा जान ऋषि अत्रि के चरणों का जल तीनों देवों पर छिड़क दिया, जिससे तीनों देव बालरुप में आ गए। बाल रुप में तीनों देवों को भोजन कराने के बाद, अनुसूया देवी ने उन्हें पालने में लिटा दिया और उनका पालन पोषण करने लगी। जब काफी दिनों तक ब्रह्मा, विष्णु और महेश अपने घर नहीं लौटे तो तीनों देवियों को अपने पतियों की चिंता होने लगी और अपनी गलती पर पछतावा भी होने लगा। एक दिन तीनों देवियां माता अनुसूया के पास पहुंची और उनसे क्षमा मांगी और उनके पतिव्रत धर्म के समक्ष अपना सिर झुकाया। तब माता अनुसूया ने कहा कि इन तीनों देवों ने मेरा दूध ग्रहण किया है इसलिए इन्हें बाल रुप में ही रहना होगा। यह सुनकर तीनों देवियों ने अपने – अपने अंश को मिलाकर एक नया अंश पैदा किया, जिनका नाम दत्तात्रेय रखा गया। इनके 3 सिर और 6 हाथ बने। तीनों देवों को एकसाथ बाल रुप में दत्तात्रेय के अंश में पाने के बाद अनुसूया माता ने अपने पति अत्रि ऋषि के चरणों का पवित्र जल इन तीनों भगवान पर छिड़का और उन्हें पूर्ववत रुप प्रदान कर दिया।

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दत्तात्रेय बीज मंत्र – (Dattatreya Beej mantra in hindi) 

दक्षिणामूर्ति बीजम च रामा बीकेन सम्युक्तम।

द्रम इत्यक्षक्षाराम गनम बिंदूनाथाकलातमकम

दत्तास्यादि मंत्रस्य दत्रेया स्यादिमाश्रवह

तत्रैस्तृप्य सम्यक्त्वं बिन्दुनाद कलात्मिका

येतत बीजम् मयापा रोक्तम् ब्रह्म-विष्णु- शिव नमकाम

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