Dev Diwali 2020 Shubh Muhurat and Puja Vidhi – जानें देव दीपावली शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Dev diwali puja vidhi hindi – देवदीवाली का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार वाराणसी में भव्य तरीके से मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के दानव का वध किया था| इससे प्रसन्न होकर देवताओं ने स्वर्ग लोक में दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया था| इसी के चलते देवदीवाली उत्सव को त्रिपुरोत्सव या त्रिपुरारी पूर्णिमा के रूप में भी जानते हैं | इस साल देवदीवाली 29 नवम्बर 2020 को पड़ेगी |

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Dev diwali muhurat puja vidhi katha  | देव दीवाली पूजा विधि,मुहूर्त,कथा

कथा | katha – Dev diwali puja vidhi hindi

  • पौराणिक कथा के अनुसार त्रिपुरासुर नामक बलवान राक्षस ने तीनों लोकों में सबको परेशान कर रखा था। वह इतना बलवान इसलिए था क्योंकि वह हर वक़्त ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या करता था। सभी देवताओ ने उसके इस कठोर तप को तोड़ने का निर्णय किया और सुंदर अप्सराओं को उसकी तपस्या भंग करने भेजा। जब त्रिपुरासुर की तपस्या भंग नही हुई तो अंत में ब्रह्मा जी को विवश होकर उसे दर्शन देना पड़ा। इसके बाद ब्रह्मा जी ने उसे वरदान मांगने के लिए कहा। तब त्रिपुरासुर ने कहा प्रभु ऐसा वरदान दें कि कोई भी देवता या मनुष्य मुझे मार न पाएं।
  • भगवान ने तथास्तु कह दिया जिसके बाद उसका आतंक और बढ़ गया |एक दिन उसने अहंकार के कारण कैलाश पर्वत पर ही आक्रमण कर दिया। भगवान शिव और त्रिपुरासुर के बीच में बहुत ही भयंकर युद्ध हुआ। यह युद्ध काफी लंबे समय तक चला। युद्ध के दौरान भगवान शिव ने ब्रह्मा जी और विष्णु की मदद से त्रिपुरासुर का अंत कर दिया।

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देवदीवाली मुहूर्त | dev diwali muhurat 2020

  • देव दीपावली, 29 नवम्बर 2020
  • प्रदोषकाल देव दीपावली मुहूर्त – शाम 05:08 से रात 07:47 तक
    अवधि – 02 घण्टे 40 मिनट्स
  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – 29 नवम्बर 2020 को 12:47 पी.एम बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त – 30 नवम्बर 2020 को 02:59 पी.एम बजे

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पूजा विधि | Dev diwali puja vidhi hindi

  • देवदीवाली के दिन गंगा स्नान करना चाहिए|
  • इस दिन भगवान गणेश,शिव और भगवान विष्णु की पूजा होती है।
  • शाम को पूजा से पहले गणेश, शिव और भगवान विष्णु की मूर्ती स्थापित कर लें |
  • उनकी विधि विधान से पूजा करें और भगवान भोले पर बेलपत्र, विष्णु जी पर तुलसी जी और गणेश जी पर दूब (हरी-भरी घास) चढ़ाएं|
  • इस दिन खास तौर पर भगवान विष्णु को पीले फूल और पीले वस्त्र चढ़ाए जाते हैं|
  • उसके बाद सभी को भोग लगाएं और धूप दीप जलाकर आरती करें |

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