Dev uthani ekadashi mahatva puja vidhi – जानिए देवउठनी एकादशी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा और महत्व

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dev uthani ekadashi mahatva puja vidhi – कार्तिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु विश्राम से जागते हैं और सृष्टि का काम-काज संभालते हैं। इस एकादशी में सभी मंगल कार्यों की शुरुआत होती है, जिसके बाद सभी मांगलिक कार्य जैसे शादी -विवाह शुरू हो जाते हैं| इस साल देवउठनी एकादशी 25 नवंबर, 2020 को पड़ेगी। इस व्रत को करने वाला दिव्य फल प्राप्त करता है।

dev uthani ekadashi mahatva puja vidhi

Dev uthani ekadashi mahatva puja vidhi | देवउठनी एकादशी मुहूर्त पूजा विधि
Dev uthani ekadashi – महत्व – mahtava

  • सभी शुभ कामों की शुरुआत देवउठनी एकादशी के बाद ही होती है| इस एकादशी में रातभर जागकर हरि (विष्णु जी) का कीर्तन करने से भगवान विष्णु अत्यन्त प्रसन्न होते हैं।
  • इस दिन दान, पुण्य करने से विशेष फल मिलता है। भगवान विष्णु को योग-निद्रा से जगाने के लिए घण्टा, शंख, मृदंग और श्लोक पढ़ते हैं।

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देवउठनी एकादशी मुहूर्त –  dev uthani ekadashi muhurat

  • 25 नवंबर 2020, बुधवार
  • पारण (व्रत तोड़ने का) समय – दोपहर 1.12 से शाम 3.18 तक (26 नवंबर 2020)
  • पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय = सुबह 11.49 तक

देवउठनी एकादशी कथा – dev uthan ekadashi katha

  • पौराणिक कथा के अनुसार एक बार लक्ष्मी जी ने भगवान विष्णु से कहा कि हे प्रभु आप रात और दिन जागते हैं और सो जाते हैं तो करोड़ो वर्षों तक सोते ही रहते हैं। जब आप सोते हैं तो कोई मांगलिक काम नहीं होते और तीनों लोक में हाहाकार मच जाता है।अगर हो सके तो आप निद्रा का कोई समय तय कर लें,अगर आप ऐसा करेंगे तो मुझे भी कुछ समय आराम करने के लिए मिल जाएगा। भगवान श्री हरि बोले तुम ठीक कह रही हो। मेरे जागने से सभी देवताओं के साथ- साथ तुम्हें भी कष्ट होता है, जिसकी वजह से तुम ज़रा भी आराम नहीं कर पाती।
  • इसी को देखते हुए मैने निश्चय किया है कि मैं आज से प्रत्येक वर्ष चार महीनों के लिए वर्षा ऋतु में निद्रा अवस्था में चला जाऊंगा।उस समय तुम्हारे साथ- साथ सभी देवताओं को भी कुछ आराम मिलेगा। मेरी इस निद्रा से मेरे भक्तों का भी कल्याण होगा। इस समय जो भी मेरी सोने से जागने तक पूरी श्रद्धा भाव से सेवा करेगा, उस घर में हमारा वास होगा|

देव उठनी पूजा विधि – dev uthani puja vidh

  • प्रातःकाल उठकर स्नान करें।
  • पूजा के लिए भगवान विष्णु की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित कर पूजन करें।
  • उसके बाद जो संस्कृत जानते हैं वह संस्कृत में अथवा जो नहीं बोल सकते वह लोग उठो देवा, बैठो देवा कहकर श्रीनारायण को जगा सकते हैं।
  • भगवान को तिलक लगाएं, धूप, दीप जलाएं और अनेक प्रकार के फलों के साथ नैवेद्य (भोग) चढ़ाएं।
  • पूजा के बाद आरती करें और उपवास का संकल्प लें।
  • दिन में एक बार ही फलाहार खाएं।

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भगवान विष्णु को उठाने के लिए इस मंत्र का जाप करें  – dev uthani mantra jaap

उत्तिष्ठोत्तिष्ठगोविन्द त्यजनिद्रांजगत्पते।
त्वयिसुप्तेजगन्नाथ जगत् सुप्तमिदंभवेत्॥
उत्तिष्ठोत्तिष्ठवाराह दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।
हिरण्याक्षप्राणघातिन्त्रैलोक्येमंगलम्कुरु॥

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