देवशयनी एकादशी 2019 के शुभ मुहूर्त पर ऐसे करें पूजा

Devshayani Ekadashi 2019 – देवशयनी एकादशी 2019 – देवशयनी एकादशी आज है। पुराणों में बताया गया है कि देवशयनी एकादशी से लेकर अगले चार महीने के लिए भगवान विष्‍णु क्षीर सागर में चिर निद्रा में चले जाते हैं। हिंदू धर्म में देव सो जाने की वजह से कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी, मुंडन, गृह-प्रवेश,यज्ञ आदि कार्य नही किए जाते हैं, इसलिए अब हिंदू धर्म के सारे शुभ कार्य चार महीने के बाद ही किए जाएंगे|आज से सोने के बाद, भगवान विष्णु कार्तिक मास में देवउठनी एकादशी के बाद नींद से जागते हैं और तभी से फिर से सभी शुभ कार्यों का आरंभ होता है।

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आखिर क्‍यों 4 महीने तक सोए रहते हैं भगवान विष्णु

एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने एक लंबे समय तक असुरों के साथ युद्ध किया, जिसके कारण वह बहुत थक गए| तब सभी  देवताओं के अनुरोध करने पर भगवान विष्णु चार महीने के लिए अनंत शयन में चले गए। जिस दिन भगवान सोने गए उस दिन आषाढ़ मास की एकादशी थी। उसी दिन से देवशयनी एकादशी व्रत पूजन की परंपरा शुरू हो गई।

क्या है शुभ मुहूर्त

Devshayani Ekadashi 2019 – एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 जुलाई 2019 को रात 1 बजकर 02 मिनट से, एकादशी तिथि समाप्त: 13 जुलाई 2019 को रात 12 बजकर 31 मिनट तक। पारण का समय: 13 जुलाई 2019 को सुबह 06 बजकर 30 मिनट से सुबह 8 बजकर 33 मिनट तक।

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योगिनी एकादशी व्रत और इसका महत्व

कैसे करें पूजा

इस दिन पूरे भक्ति भाव के साथ भगवानविष्णु की अराधना करनी चाहिए और व्रत भी रखना चाहिए। व्रत रखने से भक्तों को उत्तम फल मिलता है औरभगवान विष्णु की कृपा हमेशा बनी रहती है।इसदिन सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करें, फिर पवित्र जल से पूरे घर में छिड़काव करें। इसके बाद भगवान विष्णु को पीले वस्त्र पहनाकर श्रद्धा भाव से उनकीपूजा करें। भगवान विष्णु का कमल के फूल से पूजन करना काफी शुभ मानागया है। अंत में व्रत का संकल्प लेकर व्रत कथा सुनें।

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इन कामों को करने से बचें

बताया जाता है कि इस दिन घर में चावल नहीं पकाने चाहिए।इसलिए एकादशी के दिनचावल का सेवन करने से बचें।साथ ही हो सके तो बाल ना कटवायें और न हीनाखुन काटें| | इसके पीछे का कारण तो हम भी नहीं जानते, पर अधिकतर हिंदू रीति-रिवाज़ों की तरह इसके पीछे कोई साइंटिफिक कारण तो ज़रूर होगा| देवशयनी एकादशी के दिन  मंदिर में सूखे फूलों की माला बिल्कुल नहीं रखनी चाहिए और घर को साफ सुथरा रखना चाहिए।

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याद रखें इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैंजिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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