Dhanteras 2020 – जानिए धनतेरस क्यों मनाया जाता है

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Dhanteras 2020 in hindi धनतेरस का त्यौहार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस बार 13 नवंबर 2020 को यह त्यौहार मनाया जाएगा। इस दिन लोग नए बर्तन और आभूषण खरीदते हैं और घर के द्वार पर दीपक जलाते हैं। तो चलिए जानते हैं धनतेरस क्यों मनाया जाता है?

Dhanteras 2018 in hindi

Dhanteras 2020 in hindi

पहली  कथा- ( Dhanteras katha )  

  • कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है।  समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने ये अवतार लिया। भगवान विष्णु ने ये अवतार संसार में चिकित्सा, विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए लिया। धन्वन्तरि जब प्रकट हुए तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। इसी कारण इस दिन बर्तन खरीदने की परम्परा है। इस रुप में प्रकट होने की वजह से ही धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है।

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दूसरी पौराणिक कथा (Dhanteras katha )

  • पौराणिक कथाओं के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया। वामन अवतार लेकर भगवान विष्णु राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंचे तो शुक्राचार्य ने वामन रूप में भी भगवान विष्णु को पहचान लिया। शुक्राचार्य ने राजा बलि को कहा कि वामन आपसे जो भी मांगे उन्हें नहीं देना, क्योंकि ये भगवान विष्णु हैं और देवताओं की मद्द करने के लिए यहां आए हैं। असुर बलि शुक्राचार्य की बात को नज़रअंदाज़ करते हुए वामन द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि दान करने के लिए कमंडल से जल लेकर संकल्प लेने लगा। बलि को रोकने के लिए शुक्राचार्य राजा बलि के कमंडल में प्रवेश कर गए।

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  • वामन शुक्रचार्य की इस चाल को समझ गए और उन्होंने अपने हाथ में रखे हुए कुशा को कमण्डल में ऐसे रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई। शुक्राचार्य छटपटाकर कमण्डल से बाहर निकल आए और इसके बाद बलि ने तीन पग भूमि दान करने का संकल्प लिया। तब भगवान वामन ने अपने एक पैर से संपूर्ण पृथ्वी को नाप लिया और दूसरे पग से अंतरिक्ष को।
  • तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं था तो बलि ने अपना सिर वामन के चरणों में रख दिया और बलि दान में सब कुछ खो बैठा।इस तरह बलि के भय से देवताओं को मुक्ति मिली और बलि ने जो धन-संपत्ति देवताओं से छीनी थी उससे कई गुना संपत्ति देवताओं को मिल गई। इस उपलक्ष्य में भी धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है।

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