Sir Chhotu Ram Jayanti 2021: Essay on Sir Chhotu Ram in English and Hindi

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Essay on Sir Chhotu Ram in English and Hindi – Sir Chhotu Ram’s birth anniversary is celebrated on 24th November. He was born in 1881 in a humble family in Garha Sampli village situated in the Rohtak district of Haryana. Sir Chhotu Ram was one of the many prominent leaders during the British Era in India and played an important role in India’s Independence. Sir Chhotu Ram was born Ram Richpal but since he was the youngest in his family, soon his family started referring to him as Chhotu Ram, a name that went down in the history books of this country.essay on sir chhotu ram

Essay on Sir Chhotu Ram in English

You might wonder why we celebrate Sir Chhotu Ram’s birthday and not of all those leaders who have made probably a bigger contribution to India’s Independence struggle, but one cannot ignore the prominence and significance of Sir Chhotu Ram’s efforts, especially in today’s time. Sir Chhotu Ram belonged to the Jat community and while he championed the rights of the farmers, he made constant efforts to ensure to work for the benefit of farmers. For this reason, people started calling him Kisaano ka Masiha. Every time a leader in Haryana wishes to woo the voters of the Jat community for an upcoming election, Sir Chhotu Ram becomes an important entity, even today.

Essay on Sir Chhotu Ram in English – Sir Chhotu Ram Lines

Sir Chhotu Ram – biography

Sir Chhotu Ram was born in Rohtak in 1881 and after studying in his village for quite some time, he moved to Delhi where he completed his education and obtained a graduate degree from St. Stephen’s College. He then moved to Agra College to study law and before starting his legal practice in 1912, Sir Chhotu Ram also established the Jat sabha. Later, in 1915, he also launched the Jat Gazette.

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Sir Chhotu Ram- Political activities and works

Sir Chhotu Ram joined the Congress party in 1916 and he was made the President of the Rohtak district’s Congress Committee in 1916. He remained at this post for the next four years till 1920. In 1923, Sir Chhotu Ram formed a Unionist Party that won the elections and a coalition government was formed soon after, and Sir Chhotu Ram was appointed as the Revenue Minister in that government. He started working for the betterment of the farmers and spread awareness regarding farming being the primary human activity. During his tenure, he introduced laws like the Mandi Act and the Consolidation Holdings Act, but he also ensured that these laws were implemented by the government.

Essay on Sir Chhotu Ram in English – Sir Chhotu Ram speech

Even though Sir Chhotu Ram’s critics believed that he was a caste leader, his efforts in the recruitment drive by the British for the First and Second World War cannot go unnoticed.

Essay on Sir Chhotu Ram in Hindi – Sir Chhotu Ram Nibandh – सर छोटू राम निबंध

  • छोटूराम ना केवल एक महान व्यक्तित्व, बल्कि राजनीतिज्ञ और पत्रकार भी थे। ब्रिटिशकाल में इन्होंने भारतीय किसानों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ जीवनभर लड़ाईयां लड़ी और देश की आज़ादी में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान निभाया।
  • इनका असली नाम रिछपाल था, लेकिन परिवार में सबसे छोटे होने के कारण लोग इन्हें प्यार से छोटूराम बुलाया करते थे। इनके पिताजी का नाम सुखीराम था, जो इनके जन्म के समय से ही बुरी तरह कर्ज़ में डूबे हुए थे।
  • छोटूराम की आरंभिक शिक्षा झज्जर के एक प्राथमिक स्कूल से ही पूर्ण हुई थी। इससे आगे की शिक्षा के लिए इन्होंने दिल्ली के क्रिश्चिन मिशन स्कूल में दाखिला लिया था, लेकिन जब स्कूल की फीस भरने का समय आया तब इनके पिताजी एक साहूकार के पास पैसा उधार लेने गए, लेकिन साहूकार ने उनको कर्ज़ देने से साफ मना कर दिया।
  • इसके साथ ही इनके पिताजी का भी काफी अपमान किया जिसे देखकर छोटूराम ने क्रांति का रास्ता अपनाया, इसका परिणाम यह रहा कि छोटूराम जब 12वीं कक्षा में थे, तब इन्होंने किसी बात को लेकर छात्रावास प्रभारी के खिलाफ हड़ताल कर दी थी जिसमें इनके संचालन को देखते हुए स्कूल के बच्चे इनको “जनरल डायर” कहकर बुलाते थे।
  • वर्ष 1903 में इन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद दिल्ली के ही सेंट स्टीफन कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद बतौर निजी सचिव इन्होंने वर्ष 1905 में राजा रामपाल के यहां अपनी सेवाएं दी।

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  • साल 1907 तक इन्होंने पत्रकार के तौर पर हिंदुस्तान अखबार में कार्य किया। साल 1911 में इन्होंने आगरा से वकालत की डिग्री प्राप्त की। इसी वर्ष इन्होंने चौधरी लाल चंद के साथ मिलकर जाट सभा का गठन किया।
  • छोटूराम ने आगरा में रहकर ही कुछ समय के लिए जाट छात्रावास में अधीकक्ष के रूप में भी कार्य किया था। इसके साथ ही काफी समय तक कई शिक्षण संस्थानों में अध्यापन का कार्य भी  किया।

Essay on Sir Chhotu Ram in Hindi – Sir Chhotu Ram essay in hindi

  • वकालत के क्षेत्र में छोटूराम की निष्पक्षता और नि:शुल्क सलाह ने इनको बहुत सम्मान दिलाया। साल 1915 में इन्होंने “गजट” नाम से एक अखबार की भी शुरुआत की थी। इसके बाद छोटूराम ने स्वाधीनता संग्राम में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
  • गांधी जी के असहयोग आंदोलन से छोटू राम कभी सहमत नहीं हुए, इसलिए इन्होंने किसानों के हित की लड़ाई हमेशा संवैधानिक तरह से ही लड़ी हालांकि इन्होंने कांग्रेस पार्टी का विस्तार यूपी, राजस्थान और पंजाब तक किया।
  • बाद में इन्होंने अपनी स्वतंत्र पार्टी यूनियनिस्ट पार्टी से चुनाव लड़ा और 1937 में राजस्व मंत्री भी बने। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान करीब 22 हज़ार जाटों को सेना में भर्ती कराया, परिणामस्वरूप जाट और आर्य समाज के लोग ब्रिटिश सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट हुए।
  • ऐसे में छोटूराम की कार्य कुशलता और देश प्रेम को देखते हुए सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भी कहा था कि “अगर भारत देश की आज़ादी के दौरान छोटूराम जैसे महान क्रांतिकारी जीवित होते, तब पंजाब प्रांत की हमें तनिक चिंता नहीं करनी पड़ती”।

Essay on Sir Chhotu Ram in Hindi – Sir Chhotu Ram lines in hindi

  • आगे चलकर छोटूराम के ही प्रयासों का परिणाम रहा कि भारतीय किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए साहूकार पंजीकरण एक्ट (1934), गिरवी ज़मीनों की मुफ्त वापसी एक्ट (1938), कृषि उत्पाद मंडी अधिनियम (1938), व्यवसाय श्रमिक अधिनियम (1940), कर्ज़ा माफी अधिनियम (1934) इत्यादि नियम और कानून लागू किए गए।
  • किसानों को अंग्रेज सरकार की बंधुआ नीति और कर्ज़ से मुक्ति दिलाई। इनको पंजाब रिलीफ इंडेब्टनेस (1934), द पंजाब प्रोटेक्शन एक्ट (1936) आदि कानूनों के नियमन का श्रेय भी दिया जाता है।
  • इसके अलावा प्रसिद्ध भांगड़ा बांध का प्रस्ताव भी छोटूराम ने ही रखा था। इस प्रकार, छोटूराम ने उम्र भर किसानों के हित को लेकर कार्य किया। किसानों को साहूकारों, महाजनों और ब्रिटिश सरकार की दासता से आज़ाद कराया।
  • साल 2018 में हरियाणा के रोहतक में इनकी एक प्रतिमा बनवाई गई साथ ही छोटूराम के नाम पर एक डाक टिकट भी जारी किया गया है।
  • 9 जनवरी साल 1945 को मां भारती का यह वीर पुत्र हमेशा के लिए हमें अलविदा कह गया।

Here are some of the Sir Chhotu Ram essay in english and hindi that you can share with your friends and family and educate them about the efforts of Sir Chhotu Ram and his crucial role in India’s development during the British era.

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