Famous Dargah in India Hindi: आइए आपको भारत के इन फेमस दरगाहों से रूबरू कराते हैं

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Famous Dargah in India Hindi – भारत में कई प्रसिद्ध दरगाह हैं, जहां जाने से सारी मुरादें पूरी होती हैं। ये दरगाह  भारत के इतिहास की कहानी बयां करते हैं। ये वास्तुकला का बेजोड़ नमूना भी हैं। दरगाह इतिहास के पन्नों की याद दिलाते हैं। यहां न सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लोग, बल्कि हर धर्म के लोग आकर माथा टेकते हैं। तो चलिए आज आपको भारत के फेमस दरगाहों के बारे में बताते हैं और कराते हैं उनसे आपको रुबरु।

Famous Dargah in India Hindi 

Famous Dargah in India Hindi – भारत के फेमस दरगाह

ख्वाजा गरीब नवाज़ दरगाह, अजमेर शरीफ

Ajmer Sharif Dargah

  • अजमेर शरीफ मुस्लिमों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है। हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पर आते हैं।
  • पवित्र सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती जो अपने उपदेशों के लिए जाने जाते थे वह यहीं की दरगाह में बसे हैं।
  • हुमायूँ के द्वारा बनाई गई ये दरगाह दर्शाती है इतिहास की एक सबसे पेचीदा वास्तु-कला को।
  • दरगाह के अंदर मौजूद कब्र को संगमरमर और सोने से बनाया गया है। कब्र के बाहर की रेलिंग चांदी से बनाई गई है।
  • दरगाह अजमेर शरीफ़ का मुख्य द्वार निज़ाम गेट कहलाता है। इसका निर्माण मीर उस्मान अली ख़ाँ ने करवाया था, जो हैदराबाद स्टेट के उस समय के निज़ाम थे।
  • दूसरा दरवाज़ा शाहजहानी नाम से जाना जाता है इसका निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने करवाया था और तीसरी बुलन्द दरवाज़ा कहलाता है जिसको सुल्तान महमूद ख़िल्जी द्वारा बनवाया गया था, इसपर हर साल ख़्वाजा चिश्ती के उर्स के अवसर पर झंडा चढ़ाकर समारोह आरम्भ किया जाता है।
  • इस दरगाह की मान्यता का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यहां आम लोगों के साथ- साथ बॉलीवुड सेलिब्रिटीज और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी माथा टेकने आते हैं।

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Famous Dargah in India Hindi

हाजी अली की दरगाह, मुंबई

Haji Ali

  • बाबा हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह पूरे विश्व में आस्था का केंद्र है। ये दरगाह इतनी फेमस है कि यहां सभी धर्मो के लोग अपनी मन्नत मांगने बाबा की शरण में आते हैं।
  • ये मुंबई के वर्ली समुद्र तट के छोटे द्वीप पर स्थित है। यहाँ जाने के लिए मुख्य सड़क से एक सेतु बना हुआ है। इस सेतु के दोनों ओर समुद्र है। दरगाह पर निम्न ज्वार के समय ही जाया जा सकता है।
  • इतिहास के जानकारों की मानें तो संत हाजी अली की दरगाह की स्थापना साल 1431 में हुई थी। इस दरगाह में भारतीय इस्लामिक सभ्यता का अद्भुत नज़ारा देखने को मिलता है।
  • दरगाह के पास एक 85 फीट ऊंची मीनार है जो इस परिसर की सबसे सुंदर पहचान है। दरगाह की बाहरी दीवारें सफेद रंग से रंगी हैं।
  • मस्जिद के अंदर पीर हाजी अली की मजार है जिसे लाल और हरी चादर से सजाया गया है। मजार के चारों तरफ चाँदी के डंडो से बना एक दायरा है।
  • दरगाह के मुख्य कक्ष में कई स्तम्भ हैं, जो संगमरमर से बने हैं, इनके ऊपर रंगीन कांच से कलाकारी उकेरी गयी है। इन स्तंभों पर 99 जगहों पर अल्लाह नाम लिखा गया है।

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हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह, निज़ामुद्दीन

Hazrat Nizamuddin Auliya

  • दक्षिणी दिल्ली में स्थित हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह सूफी काल की एक पवित्र दरगाह है। हज़रत निज़ामुद्दीन चिश्ती घराने के चौथे संत थे। कहते हैं हज़रत साहब ने उस समय सहनशीलता और वैराग्य की मिसाल पेश की थी।
  • ऐसा भी कहा जाता है कि साल 1303 में हज़रत जी के कहने पर मुगल सेना ने अपना हमला ( युद्ध) रोक दिया था और इसके बाद वो सभी धर्मों के लोगों के चहेते बन गए थे।
  • 92 साल की उम्र में इनकी मृत्यु हो गई थी और उसी वर्ष उनके मकबरे का निर्माण कार्य शुरु हो गया था, लेकिन इसका नवीनीकरण साल 1562 तक चलता रहा। दरगाह के भीतर संगमरमर के पत्थर से बना एक कमरा है, जिसमें संगमरमरी गुंबद पर काले रंग की लकीरें हैं।
  • चारों ओर से मदर ऑफ पर्ल केनॉपी और मेहराबों से घिरा है मकबरा। यह इस्लामिक वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है।
  • दरगाह के अंदर ही शायर अमीर खुसरो और मुगल राजकुमारी जहां आरा बेगम के मकबरे भी हैं। यहां आने वाले लोग मन्नत का धागा दरगाह में बनी जालियों में बांधते हैं, कहते हैं यहां धागा बांधने से सभी मन्नतें पूरी होती हैं।
  • दरगाह में शाम 5 से 7 बजे के बीच जा सकते हैं। कई अवसरों पर यहां कव्वाली और संगीत का आयोजन भी किया जाता है।
  • यहां रोज़ाना भक्तों के लिए लंगर लगाया जाता है, जो दिन में दो बार लगता है। ये परंपरा हज़रत साहब के समय से ही चली आ रही है।

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सलीम चिश्ती की दरगाह,  फतेहपुर सीकरी

Sheikh Salim Chishti

  • फतेहपुर सीकरी में शेख सलीम चिश्ती की दरगाह स्थित है। शेख सलीम चिश्ती एक सूफी संत थे। इस दरगाह का निर्माण मुगल बादशाह अकबर ने करवाया था।
  • कहते हैं जब अकबर संतान प्राप्ति की मन्नत मांगने अजमेर की ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर गए थे तो वहां उनकी मुलाकात शेख सलीम चिश्ती से हुई थी और उन्होंने अकबर को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था, जिसके कुछ समय बाद अकबर को संतान की प्राप्ति हुई थी।
  • संतान की खुशी में अकबर ने फतेहपुरी सीकरी का निर्माण कराया था और जब शेख सलीम चिश्ती की मृत्यु हुई तो उनकी याद में अकबर ने ये समाधि बनवाई।
  • साल 1580 से 1581 के बीच में इसका निर्माण करवाया गया था। आज यह समाधि वास्तुकला और धर्म निरपेक्षता का एक अद्भुत उदाहरण है।
  • यह पूरी कब्र संगमरमर के पत्थरों से बनी है। बुलंद दरवाज़े के सामने इस कब्र को बनवाया गया है। कब्र को लगभग 1 मीटर ऊंचे मंच पर बनाया गया है,जिसका प्रवेश द्वार पांच सीढ़ी ऊपर है।
  • मुख्य द्वार पर चार खम्भे हैं। खंभों को नीचे की तरफ से लंबाकार में बनाया गया है और ऊपरी सिरे को अर्धचक्र में बनाया गया है।
  • उनकी समाधि के चारो तरफ संगमरमर की जाली लगाई गई है, जिसमें बहुत ही बारीकी का काम किया गया है और ये देखने में हाथीदांत के समान लगती है।
  • इसके मुख्य कक्ष के दरवाज़े पर कुरान की आयत लिखी गई है। यहां हज़ारों की तादात में लोग अपनी मन्न्त मांगने आते हैं और माथा टेकते हैं।

Famous Dargah in India Hindi

पिरान कलियर शरीफ की दरगाह, हरिद्वार 

  • पिरान कलियर शरीफ की दरगाह अलाउद्दीन अली अहमद साबिर सूफी संत को समर्पित हैं। यह दरगाह हरिद्वार के पास एक कलियारी नामक गाँव में स्थित हैं। ये भारत की प्रमुख दरगाहों में से एक है।
  • कलियर शरीफ की दरगाह का निर्माण 13वीं शताब्दी के दौरान करवाया गया था। ऐसा माना जाता है कि अफगान शासक इब्राहिम लोधी द्वारा इसका निर्माण करवाया गया है।
  • सभी धर्मों के लोग यहां जियारत करने आते हैं। यहां रोज़ाना लोगों के लिए लंगर लगाया जाता है। इस दरगाह के दो मुख्य द्वार के बीच में हजरत साबीर की मजार है।
  • मजार की बहारी दीवारें जालीदार बनी हुई हैं। यहाँ लोग गूलर के पेड़ पर अपनी मन्नत का पर्चा बांधते हैं।
  • दरगाह के अन्दर ही साबरी मस्जिद भी है। इस दरगाह पर हर बृहस्पतिवार को कव्वाली के प्रोग्राम का आयोजन किया जाता है। यहाँ हर साल 12 रबी-उल-अव्वल को उर्स मैला लगता है।

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