सरकार की कर्ज़ माफी योजना के बाद भी किसान कर रहे थे आत्महत्या

Farmer Loan and Farmer Suicide – आज कल किसानों का मुद्दा हर जगह छाया हुआ है। हाल ही में कॉग्रेंस ने किसानों के कर्ज़ माफी का ऐलान किया, जिससे सारे किसान बेहद खुश हैं। हर बार राजनीतिक पार्टियां ऐसे ही कुछ मुद्दे उठाती हैं, और लोगों की सहानुभूति हासिल करके अपना वोट बैंक बढ़ाती हैं।

2018 चुनावों के दौरान भी ऐसा ही हुआ। किसान कई कारणों को लेकर आंदोलन कर रहे थे, जिसके चलते कांग्रेस के मंत्री कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में किसानों के कर्ज़ को माफ करने का दावा किया। लेकिन क्या ये कर्ज़ माफी बार-बार करना सही है? क्या ये किसानों की परेशानियों को सुलझाने का सही तरीका है? तो चलिए हम आपको बताते हैं इससे जुड़े पिछले कुछ सालों के आंकड़े। जिसे पढ़कर आपको समझ आएगा कि क्या ये तरीका सच में किसानों को सशक्त बना रहा है। या, सिर्फ ऊपरी तौर पर उनकी परेशानियों को सुलझाता दिखाकर उनकी जड़ें असल में कमज़ोर कर रहा है?

Farmers Loan and suicide Problem

भारत में तकरीबन 3 लाख करोड़ का कृषि लोन माफ करने की बात हो रही है। अब तक उत्तर प्रदेश में 36,359 करोड़ और महाराष्ट्र में 30,000 करोड़ रुपए का कर्ज़ माफ कर देने के बाद पंजाब, तमिलनाडु, हरियाणा, गुजरात और कर्नाटक में किसान कर्ज़ को माफ करने पर ज़ोर दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में देश के सामने 3.1 लाख करोड़ लगभग 49.1 बिलियन डॉलर का कर्ज़ माफ करने का सवाल खड़ा हो गया है। यह राशि 2017 के ग्रामीण सड़कों के बजट से 16 गुना अधिक है। इससे 443,000 गोदामों का भुगतान किया जा सकता है। या इस राशि से पिछले 60 वर्षों की उपलब्धियों की तुलना में 55 फीसदी अधिक भारत की सिंचाई क्षमता में वृद्धि की जा सकती है।

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नीचे लिंक में कुछ आंकड़े दिए गए हैं जिससे आपको ये समझने मे आसानी होगी।  

https://www.business-standard.com/article/current-affairs/india-faces-rs-3-lakh-cr-farm-loan-waivers-16-times-2017-rural-roads-budget-117061500152_1.html

बिज़नेस स्टेंडर्स की इस रिपोर्ट से ये पता चलता है कि इस कर्ज़ माफी से किसानों को तत्काल सहायता ज़रूर मिल सकती है। लेकिन भारत की कृषि अर्थव्यवस्था की अंदरुनी परेशानी को दूर नहीं किया जा सकता। न ही उन्हें सशक्त बनाया जा सकता है

यहां पर हम आपको इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट दे रहे हैं, जिसमें लिखा है कि किसानों का बकाया कर्ज़ 2016 तक कितना था। अब से लागू होने वाले 0.5% सेस के बारे में भी जानकारी दी गई।

https://economictimes.indiatimes.com/news/economy/agriculture/agricultural-loan-outstanding-at-rs-12-6-lakh-crore-as-of-september-2016/articleshow/55496658.cms

Farmers Loan and suicide Problem

नीचे एक और रिपोर्ट दी गई है rediff.com  द्वारा, जो कि 6 सबसे ज़्यादा कर्ज़ वाले राज्यों के बारे में जानकारी देती है।

https://www.rediff.com/business/report/indias-6-most-debt-ridden-states/20180717.htm

चलिए अब सझते है कि बार- बार लोन माफ करने से क्या प्रभाव पड़ता है।

  • जब बार- बार लोन माफ किए जाते हैं, तो कुछ सक्षम किसान भी छूट की मांग करते हैं। भौतिक सुख के सामान खरीदने के लिए एक और लोन लेने की उम्मीद करते हैं, लेकिन ये बात सब किसानों पर लागू नहीं है।
  • अभी तक लगभग 4.8 करोड़ किसानों ने ऋण लिया, जिसमे कि प्रति कृषि परिवार पर तकरीबन 47,000 रुपये का ऋण है।
  • किसानों के हालात पिछले कई लोन माफियों से नहीं सुधरे।
  • बार-बार लोन माफी बदहाली के कारणों को संभालने की प्रक्रिया से भटका देती है।

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भूतपूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए कुछ सुझाव दिए थे, जो किसानों की हालत को सुधार सकते थे। इसी के साथ- साथ राधाकृष्णा कमेटी ने भी इसकी तरफदारी करते हुए किसानों के पक्ष में कुछ बातें रखी थी, जिसमे ये कहा गया था-  

  • कृषी उपज ज़्यादा से ज़्यादा किसानों से खरीदने के लिए राज्य सरकार के पास पर्याप्त साधन व धनराशि होनी चाहिए।
  • एक्सपोर्ट के नियमो में सुधार होना चाहिए, ताकि ज़्यादा कृषि उत्पाद एक्सपोर्ट कर सकें।
  • व्यापारियों को अधिक स्टॉक रखने की अनुमति दी जानी चाहिए।
  • एमएसपी की दरों को सही तरीके से निर्धारित करें।

किसानों को सरकार द्वारा फसल बीमा जैसी सुविधाएं दी गई, जिससे किसानों के मुद्दे हल होने चाहिए थे। लेकिन ऐसा लगता है कि यह सुविधा अभी तक कारगर नहीं हुई।

सड़कें, परिवहन नेटवर्क, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग, क्रॉप कलेक्शन आदि के लिए सरकार को फंड सुनिश्चित करके इसका विकास करना चाहिए। अधिकतम कृषि उपज किसानों को सुविधा प्रदान करनी चाहिए।

वर्तमान में, लगभग 50% फल और सब्जी आदि चीज़े खराब हो जाती हैं, जिसके लिए सरकार को इन वस्तुओं को संभालने और निर्यात करने के लिए उचित सुविधा देने पर विचार करना चाहिए।  

कर्ज माफी का मुख्य कारण किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं को रोकना बताया जा रहा है। किसानों द्वारा आत्महत्या का मुख्य कारण ज़ाहिर तौर पर व्यापक ऋण है। हालांकि, हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि आत्महत्या दरों पर कर्ज़ माफ करने का कोई असर नहीं पड़ा

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