Firoz Shah Palace History In Hindi – जानिए फिरोज़ शाह पैलेस किस लिए है इतना प्रसिद्ध? क्या है इसके पीछे का इतिहास

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Firoz Shah Palace History In Hindi – Firoz Shah Palace Ka Itihaas – प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल तक भारत में ऐसे कई भवन, महल व पैलेस आदि का निर्माण हुआ है जिनकी प्रसिद्धि भारत में ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर मानी जाती है। भारत में कई ऐसे ऐतिहासिक राज्य हैं, अधिक संख्या में ऐसे पौराणिक व ऐतिहासिक महलों की मौजूदगी पाई जाती। इन राज्यों में मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु आदि प्रचलित हैं। जहां अभी भी मध्यकालीन समय के कई महल खड़े हुए हैं। इसी प्रकार भारत के एक ऐतिहासिक राज्य हरियाणा में फिरोज़ शाह पैलेस स्थित है जिसे  राज्य के आसपास स्थित कई अन्य राज्य के निवासी भी देखने के लिए आया करते हैं। हरियाणा के हिसार में स्थित यह फिरोज़ शाह पैलेस काफी विख्यात है। आज हम अपने लेख के माध्यम से हरियाणा में स्थित फिरोज शाह पैलेस के इतिहास के विषय में पूरी जानकारी देने वाले हैं।Firoz Shah Palace History In Hindi

Firoz Shah Palace History In Hindi

फिरोज़ शाह पैलेस कहां हैं?

फिरोज़ शाह पैलेस हरियाणा राज्य के हिसार शहर में स्थित एक ऐतिहासिक संरचना और प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। यह फिरोज़ शाह तुगलक द्वारा बनवाया गया था। फिरोज़ शाह पैलेस को हिसार-ए-फिरोजा के नाम से भी जाना है। ये पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यही कारण है कि हर साल यहां हज़ारों की संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते हैं।

Firoz Shah Palace History In Hindi

फिरोज शाह पैलेस का इतिहास

फिरोज़ शाह महल, जिसे हिसार-ए-फ़िरोज़ा के नाम से जाना जाता है, एक रणनीतिक बिंदु पर स्थित है जहां पुरानी दिल्ली मुल्तान रोड ईरान के उत्तर-पूर्व में एक ऐतिहासिक क्षेत्र खुरासान की ओर जाती है। इसका निर्माण 1354 में शुरू हुआ, जिसकी देख रेख फिरोज़ शाह ने की। इस महल को बनाने के लिए महेंद्रगढ़ की पहाड़ियों से पत्थर लाए गए थे, जो एक सुरक्षात्मक खाई से घिरा हुआ था।  यह परिसर ढाई साल बाद 1356 में बनकर तैयार हुआ और फिरोज़ शाह ने अपने दरबारियों को किले की दीवारों के भीतर अपने महल का निर्माण करने का आदेश दिया। फिरोज़ शाह महल परिसर में लाट की मस्जिद और एक अशोक स्तंभ है।  पास में ही एक और गुर्जरी महल भी है, जिसे फिरोज़ शाह ने अपनी पत्नी गुर्जरी के लिए 1356 में बनवाया था। 1924 में महल पर बहाली का काम शुरू हुआ और तब से धीरे-धीरे जारी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा परिसर को केंद्रीय रूप से संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। महल परिसर में एक मस्जिद, एक दीवान-ए-आम, शाह की पत्नी के लिए एक महल, भूमिगत अपार्टमेंट और एक अन्न भंडार हैं। किले में कलाकृति इस्लामी और भारतीय वास्तुकला का अद्भुत नमूना देखनो को मिलता है, हालांकि मस्जिद सेल्जुक वास्तुकला का एक उदाहरण है। महल लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है।

फिरोज़ शाह महल के मुख्य द्वार के विषय में…..

किले के भीतर महल परिसर में एक शाही प्रवेश द्वार मौजूद है जो कि चारों ओर सुरक्षात्मक प्राचीर में मूल रूप से चार मुख्य द्वार थे।

शाही दरवाज़ा

फिरोज़ शाह महल में शाही दरवाज़ा, या रॉयल गेट, प्रवेश द्वार पूर्व की ओर है और अभी भी खड़ा है। यह मोटे तौर पर सात मीटर लंबा, एक मंजिला धनुषाकार प्रवेश द्वार में प्रत्येक तरफ छोटे अंतर्निर्मित गार्ड रूम हैं।

तलाकी गेट

तलागी गेट पश्चिम की ओर है और महल से प्राचीन अग्रोहा टीले और सिरसा की ओर जाता है। गेट हिसार के मुख्य बस स्टेशन के सामने है जो कि दुश्मन सेनाओं पर हमला करने के लिए व तीर चलाने के लिए जाना जाता था।

नागौरी गेट

नागौरी गेट, दक्षिण की ओर नागौर और राजस्थान के जोधपुर में सिवानी, झुम्पा खुर्द, राजगढ़ और चुरू होते हुए जाता है। बंसीलाल सरकार ने बाज़ार के प्रवेश द्वार को चौड़ा करने के लिए इस गेट को गिरा दिया था। ब्रिटिश राज ने उस स्थल पर दो मंजिला घंटाघर का निर्माण किया जिसे भी ध्वस्त कर दिया गया था।

मोरी गेट

मोरी गेट, पूर्व की ओर उन्मुख था। पानी की आपूर्ति के लिए किले के गढ़ में एक छेद के माध्यम से एक जल चैनल खुला गया था जो अब नहीं है। वहीं इस गेट पाकिस्तान में मुल्तान, अफगानिस्तान में कंधार, ईरान में मशहद और तुर्कमेनिस्तान में अश्गाबात तक पहुंच प्रदान की। फिलहाल यह गेट लंबे समय से चला गया है और अचिह्नित है। वर्तमान में इसकी रैंप और सड़क किले के परिसर और ऑटो बाज़ार को जोड़ती है।

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दिल्ली गेट

शहीद भगत सिंह चौक के पास वर्तमान मेहता नगर में स्थित दिल्ली गेट, पूर्व की ओर है, लेकिन अब यह स्थित नहीं है। यह दिल्ली मुल्तान रोड पर दिल्ली की ओर जाता था। यह बाजार के अंदर वर्तमान गांधी प्रतिमा के पास खड़ा था।

फिरोज शाह महल परिसर के अन्दर एक मस्जिद भी मौजूद है जिसे लात की मस्जिद के नाम से जाना जाता है। मस्जिद के साथ साथ हिसार-ए-फिरोजा के अन्दर 20 फीट ऊंचा एक स्तंभ भी है जो पहले अशोक का स्तंभ था।

फिरोज़ शाह पैलेस खुलने का समय – firoz shah palace open time in hindi

दरअसल अक्सर जो लोग पहली बार फिरोज़ शाह पैलेस घूमने आने वाले हैं उन्हें इस बात की काफी कंफ्यूजन रहती है कि आखिर यह महल कितने समय से लेकर कितने समय तक खुला रहता है।यदि आप फिरोज़ शाह पैलेस घूमने जाने की टाइमिंग के बारे में जानना चाहते हैं तो हम आपको बता दें फिरोज़ शाह पैलेस पर्यटकों के घूमने के लिए सप्ताह के सातों दिन सुबह 9.00 बजे से लेकर शाम 6.00 बजे तक खुला रहता है।आप इस दौरान कभी भी इस महल में घूमने आ सकते हैं।

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फिरोज शाह पैलेस के आसपास घूमने की जगह के नाम….firoz shah palace ke aas paas ghumne ki jagah – firoz shah palace me ghumne ki jagah

यदि आप अपनी फैमिली और अपने दोस्तों के साथ फिरोज़ शाह पैलेस घूमने आए हैं और इसके साथ ही आप यह भी जानना चाहते हैं कि आखिर फिरोज़ शाह पैलेस के आस पास ऐसी कौन सी जगह है जहां आप घूम ससकता हैं। तो हम आपको बता दें कि फिरोज़ शाह पैलेस के आसपास आप इन जगहों पर घूमने जा सकते हैं..

असीरगढ़ किला

लोहारी राघो

बरसी गेट

दरगाह चार कुतुब

राखीगढ़ी

सेंट थॉमस चर्च।

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Firoz Shah Palace History In Hindi

कैसे पहुंच सकते हैं आप फिरोज़ शाह पैलेस

आप ट्रेन हाईवे या रोड वे किसी भी तरीके से पहुंच सकते हैं।

यदि आप हिसार घूमने जाने के लिए फ्लाइट का विकल्प चुनते हैं तो जान लें हिसार के लिए कोई सीधी फ्लाइट नहीं मिलती है। हिसार का सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा दिल्ली में है जो हिसार से लगभग 150 किलोमीटर कि दूरी पर स्थित है।

इसके अतिरिक्त यदि आप रेल के माध्यम से हिसार पहुंचना चाहते हैं तो ट्रेन से ट्रेवल करके फिरोज़ शाह पैलेस की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों को बता दे हिसार का अपना रेलवे जंक्शन मौजूद है,जो फिरोज़ शाह महल से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हिसार रेलवे स्टेशन नियमित ट्रेनों के माध्यम से हरियाणा और भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा है, इसलिए ट्रेन से ट्रेवल करके हिसार आना काफी आसान है। ट्रेन से ट्रेवल करके रेलवे स्टेशन पहुचने के बाद आप स्थानीय साधनों की मद्द से इस शाही फिरोज़ शाह पैलेस आ सकते हैं।

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