Girijabandh hanuman mandir ka itihas – इस मंदिर में नारी रूप में होती है हनुमान जी की पूजा, दूर – दूर से आते हैं भक्त

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Girijabandh hanuman mandir ka itihas – Girijabandh hanuman mandir – girijabandh hanuman mandir Chhattisgarh – हिंदू धर्म में रामभक्त हनुमान जी को प्रमुख देवता के तौर पर जाना जाता है। कहते हैं जो भी भक्त हनुमान जी की भक्ति श्रद्धापूर्वक और सच्चे मन से करता है, वह उसके सारे दुखों को हर लेते हैं। इन्हें पवन पुत्र, बजरंगबली, संकटमोचन इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। आज हम आपको हनुमान जी के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने वाले हैं, जहां विशेषकर हनुमान जी के नारी अवतार की पूजा की जाती है। तो चलिए जानते हैं कौन सा है ये हनुमान मंदिर।Girijabandh hanuman mandir ka itihas

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गिरिजाबंध हनुमान मंदिर का इतिहास

  • हनुमान जी का यह नारी स्वरूपा मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले के रतनपुर में गिरिजाबंध नामक स्थान पर बना हुआ है, जो दक्षिणमुखी दिशा में स्थित है।
  • इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जो भक्त यहां आकर हनुमान जी के नारी अवतार के दर्शन करता है, बजरंगबली उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
  • ऐसा मानाजाता है कि यह मंदिर लगभग 10 हज़ार साल पुराना है।

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Girijabandh hanuman mandir ka itihas

मंदिर की स्थापना को लेकर एक कथा प्रचलित है – girijabandh hanuman mandir ki kahani in hindi

मंदिर की स्थापना को लेकर एक कथा प्रचलित है कि रतनपुर के राजा पृथ्वी देवजू हनुमानजी के भक्त थे, लेकिन उन्हें कुष्ठ रोग हो गया था। इससे छुटकारा पाने के लिए उन्हें किसी ने हनुमान जी की आराधना करने को कहा। राजा पृथ्वी की भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं हनुमान जी ने उन्हें दर्शन दिए और उनसे एक मंदिर की स्थापना करने को कहा और मंदिर के आसपास एक सरोवर बनवाने को कहा जिसमें स्नान करके राजा का कुष्ठ रोग दूर हो गया। फिर कुछ दिनों बाद हनुमान जी दोबारा राजा पृथ्वी के स्वप्न में आए और उन्होंने कहा कि मंदिर के सरोवर में एक प्रतिमा है, जिसे निकालकर तुम उसे मंदिर में स्थापित करवा दो। कहते हैं जब राजा पृथ्वी ने उस सरोवर में से प्रतिमा निकाली, तब उसमें हनुमान जी नारी अवतार में मौजूद थे। तभी से यह मंदिर हनुमान जी के नारी अवतार प्रतिमा के लिए विश्वभर में जाना जाता है।

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Girijabandh hanuman mandir ka itihas

दूसरी पौराणिक कहानी – girijabandh hanuman mandir ki story in hindi

दूसरी ओर, हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ रामायण के लंका काण्ड में प्रसंगित है कि जब रावण भगवान श्री राम और लक्ष्मण का हरण करके उन्हें पाताल लोक ले गया था तो उसने उनकी अपनी कुलदेवी के आगे बलि चढ़ाने की सोची। तब हनुमान जी कुलदेवी से प्रार्थना करके उनके स्थान पर देवी स्वरूपा खड़े हो जाते हैं। कहते हैं तभी से हनुमान जी की नारी रूपा मूर्ति वहां विराजित है जिसका महिलाओं की तरह श्रृंगार किया जाता है। उन्हें अनेक तरह के आभूषण और नाक में नथ भी पहनाई जाती है। यहां मंदिर में भगवान श्री राम की भी मूर्ति है, जहां भगवान श्री राम को राजा के तौर पर पूजा जाता है।

इस प्रकार, हनुमान जी के इस मंदिर को सिद्धि प्राप्त मंदिर की श्रेणी में रखा गया है। हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे इसलिए महिलाओं को उनकी मूर्ति को छूने की भी अनुमति नहीं है। उनके नारी अवतार के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर का इतिहास काफी रोचक और अनोखा है।

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