Gopashtami Puja Vidhi 2020 in Hindi – गोपाष्टमी में करें गाय की पूजा, जानें पूजा विधि और कथा

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Gopashtami Puja Vidhi in Hindi – गोपाष्टमी का दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है। यह मथुरा, वृंदावन और अन्य ब्रज क्षेत्रों का प्रसिद्ध त्योहार है। हिंदू धर्म में गौ (गाय) को भगवान का दर्जा मिला हुआ है| ऐसा माना जाता है कि उसके मूत्र में गंगा व गोबर में लक्ष्मी का वास है| गाय के दूध से निकला घी ‘अमृत’ कहलाता है। आइए आपको बताते हैं गोपाष्टमी मनाने का महत्व और पूजा विधि |

gopashtami puja vidhi

Gopashtami 2020 – क्यों मनाई जाती है गोपाष्टमी ? – Gopashtami kyu manai jati hai ?

  • इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गौ चारण लीला शुरू की थी। गायों की रक्षा करने के कारण भगवान श्री कृष्ण जी का अतिप्रिय नाम ‘गोविन्द’ पड़ा।
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के समय से ही गोपाष्टमी मनाई जाती है। इंद्र के प्रकोप से गोप-गोपियों और गायों को बचाने के लिए कृष्ण जी ने कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से अष्टमी तक गोवर्धन पर्वत को धारण किया था।
  • अंत मे इंद्र देव ने अपने अहंकार को त्यागकर कृष्ण भगवान से छमा मांगी और कामधेनु नाम की गाय ने श्रीकृष्ण भगवान का अपने दूध से अभिषेक किया। कृष्ण भगवान ने भी उस दिन कामधेनु गाय की स्तुति की और गायों की रक्षा और पालन करने की प्रतिज्ञा की।
  • इसके बाद सभी ग्राम निवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण की और सभी गायों की पूजा की। इस उपलक्ष्य में ब्रज में धूमधाम से उत्सव मनाया गया जो बाद में गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा। इस दिन गाय, गोवत्स(बछड़ों) और गोपालों के पूजने का विधान है।

गोपाष्ठमी कैसे मनाई जाती है ? | Gopashtami kaise manai jati hai ?

  • गोपाष्टमी पर गाय और उनके बछड़े को सजाया जाता है|
  • इस दिन गौमाता का पूजन पूरे परिवार के साथ किया जाता है |
  • गोपाष्टमी की पूजा विधि पूर्वक पंडितो द्वारा संपन्न की जाती है और प्रसाद चढ़ाया जाता है |
  • इस साल गोपाष्टमी 22 नवंबर 2020,रविवार को पड़ेगी।
  • गोपाष्टमी महाराष्ट्र के गोवत्स द्वादशी की तरह मनाया जाता है |

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कथा | Gopashtami katha

  • हिंदू कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने ब्रज के लोगों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन पहाड़ी को अपनी कंठस्थ (छोटी उंगली) पर उठा लिया था। तब ब्रज में सात दिनों के बाद भगवान इंद्र ने गोपाष्टमी पर अपनी हार स्वीकार की थी, जिसके बाद भगवान कृष्ण ने पर्वत को नीचे रखा। तभी से इस पर्व को मनाया जाने लगा।

Gopashtami Puja Vidhi in Hindi

कथा 2 Gopashtami katha

  • एक कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने यशोदा से गाय की सेवा करनी की इच्छा व्यक्त की। तब शांडिल्य ऋषि द्वारा अच्छा समय देखकर उन्हें भी गाय चराने के लिए शुभ समय निकाल कर दिया गया|
  • उस शुभ मुहूर्त को गोपाष्टमी कहा गया। उस दिन भगवान कृष्ण ने गायों की पूजा की और सबको प्रसाद दिया।

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मुहूर्त | Shubh Muhurat – Gopashtami Puja Vidhi in Hindi

  • गोपाष्टमी 22 नवंबर 2020,रविवार
  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ – 22 नवम्बर 2020 को 04:18 बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त – 23 नवम्बर 2020 को 05:21 बजे

पूजा विधि | Gopashtami Puja Vidhi in Hindi

  • प्रातःकाल खुद स्नान कर के गायों को स्नान कराएं|
  • उसके बाद उनके आगे धूप दीप जलाकर पूजन करें।
  • उसके बाद गाय को चारा देकर उनकी परिक्रमा करके थोड़ी दूर तक उनके साथ जाना चाहिए।
  • शाम को गाय जब चर के वापस आए तो उनका पूजन कर के चरणरज (चरणों की धूल) माथे पर लगानी चाहिए।

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Gopashtami Puja Vidhi in Hindi

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