Guru grah ko majboot karne ke upay – गुरु ग्रह को ऐसे करें मजबूत, मिलेगी धन, संतान, वैवाहिक जीवन में सफलता

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Guru grah ko majboot karne ke upay – क्या आपको पता है कि गुरु ग्रह क्या है और किसी जातक का गुरु अगर कमज़ोर है तो उसको किन-किन तरीको से ठीक किया जा सकता है, अगर नहीं पता तो चलिए हम आपको बताते हैं। औषधियों द्वारा,यंत्रो द्वारा,रत्नों दान, मन्त्रों व अन्य तरीकों से आप कमज़ोर गुरु ग्रह को ठीक कर सकते हैं। लेकिन कोई भी उपाय करने से पहले आप हमारी एक्सपर्ट टीम से सम्पर्क कर जानकारी ले सकते हैं। इन उपायों को करने से पहले आपका ये जानना बहुत ज़रुरी है कि आपका गुरू कितना कमज़ोर है, क्योंकि मेष, सिंह, वृश्चिक,धनु,मीन के जातकों के लिए गुरु कारक ग्रह होता है और कारक ग्रह के दान नहीं होते हैं।

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क्या है गुरु ग्रह – Guru grah ko majboot karne ke upay – गुरु ग्रह को मजबूत करने के उपाय

  • गुरु धनु व मीन राशि का स्वामी है। इसका मूल त्रिकोण धनु का होता है। कर्क राशि में ये उच्च व मकर में नीच का होता है। इसका रंग पीला और इसकी जाति ब्राह्मण है। नव ग्रहों में यह देवताओं का गुरु माना जाता है। गुरु की दिशा उत्तर पूर्व, ईशान कोण व धातु स्वर्ण है। यह पुरुष ग्रह है।
  • यह आकाश तत्व का ग्रह है। इसका प्रतिनिधि पशु अश्व है। यह पंचम,सप्तम व नवम दृष्टि से पूर्ण रूप से देखता है। गुरु के मित्र ग्रह सूर्य, चन्द्र, मंगल और शत्रु ग्रह बुध व शुक्र हैं शनि सम है। काल पुरुष के शरीर में इसकी स्थिति नासिका पर है। गुरु ग्रह एक राशि में 13 माह रहता है। गुरु ग्रह का स्वभाव शुभ व सोम्य है। गुरु का गुण सत्व है।

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गुरु ग्रह मन्त्र का जाप करने से जातक की पीड़ा दूर होती है। Guru grah ko majboot karne ke upay

बृहस्पति का मूल मंत्र

।। ॐ बृं बृहस्पतये नम:।।

  • गुरु ज्ञान, प्रतिभा, वैभव, लक्ष्मी और सम्मान के प्रदाता है। ग्रह रूप में इनकी प्रतिकूल दृष्टि होने पर मनुष्य धन-संपत्ति आदि से हीन होकर बहुत दुख भोगता है। इनकी आराधना एवं पूजा से सभी प्रकार का सुख एवं ऐश्वर्य प्राप्त होता है।

विनियोग मंत्र

ॐ अस्य बृहस्पति नम: (शिरसि)

ॐ अनुष्टुप छन्दसे नम: (मुखे)

ॐ सुराचार्यो देवतायै नम: (हृदि)

ॐ बृं बीजाय नम: (गुहये)

ॐ शक्तये नम: (पादयो:)

ॐ विनियोगाय नम: (सर्वांगे)

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करन्यास मंत्र

ॐ ब्रां- अंगुष्ठाभ्यां नम:।

ॐ ब्रीं- तर्जनीभ्यां नम:।

ॐ ब्रूं- मध्यमाभ्यां नम:।

ॐ ब्रैं- अनामिकाभ्यां नम:।

ॐ ब्रौं- कनिष्ठिकाभ्यां नम:।

ॐ ब्र:- करतल कर पृष्ठाभ्यां नम:।

करन्यास मंत्र के बाद नीचे लिखे मंत्रों का उच्चारण करते हुए हृदयादिन्यास करें:-

ॐ ब्रां- हृदयाय नम:।

ॐ ब्रीं- शिरसे स्वाहा।

ॐ ब्रूं- शिखायैवषट्।

ॐ ब्रैं कवचाय् हुम।

ॐ ब्रौं- नेत्रत्रयाय वौषट्।

ॐ ब्र:- अस्त्राय फट्।

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गुरु का ध्‍यान मंत्र

रत्नाष्टापद वस्त्र राशिममलं दक्षात्किरनतं करादासीनं,

विपणौकरं निदधतं रत्नदिराशौ परम्।

पीतालेपन पुष्प वस्त्र मखिलालंकारं सम्भूषितम्,

विद्यासागर पारगं सुरगुरुं वन्दे सुवर्णप्रभम्।।

इसके पश्चात निम्न मंत्र का कम से कम एक माला से जाप करे-

ॐ बृं बृहस्पतये नम:।।

  • गुरु के मन्त्रों की संख्या 19000 है। कलयुग में चार गुना जाप करने से फल की प्राप्ति होती है। इस प्रकार कुल 76000 हज़ार जाप तथा इसके दसवें भाग से यानी 7600 मन्त्रों से आहुति दी जाती है। हवन तब करें जब अग्नि का वास पृथ्वी पर हो। अगर खुद न कर सके तो किसी योग्य पंडित द्वारा करवा लें।

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यन्त्र द्वारा निवारण:-

  • गुरु पुष्य नक्षत्र में किसी भी शुक्ल पक्ष के गुरुवार को सोने या चांदी के चकोर पत्र पर यन्त्र गुदवाएं और मध्य में पुखराज जड़वाकर गुरु गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित करें। ऐसे भोज पत्र पर हल्दी से बनाकर कंठ या दाहिनी भुजा पर भी धारण कर सकते हैं।

व्रत द्वारा गुरू ग्रह दोष निवारण:-

  • गुरु पीड़ा को समाप्त करने लिए गुरु उपवास भी उपयुक्त है। जातक उस दिन विष्णु भगवान के दर्शन करें और एक समय पीला भोजन करें। इस दिन किसी साधु संत या आध्यात्मिक व्यक्ति का पीले पुष्पों से सम्मान करें व आशीर्वाद लें।

औषधियों द्वारा निवारण:-

  • गुरु पीड़ा को शांत करने के लिए जातक को जल में शक्कर, सफेद सरसो,पीले पुष्प,हल्दी तथा शहद डालकर स्नान करना चाहिए।

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रत्न द्वारा ग्रह दोष निवारण:-

  • गुरु का रत्न पुखराज है। इसके लिए पुखराज को रविवार,सोमवार या गुरुवार के शुक्ल पक्ष में खरीदना चाहिए। पुखराज को खरीदने व अंगूठी में जुड़वाने के लिए पुष्य नक्षत्र होना चाहिए। यदि पुष्य नक्षत्र नहीं है तो पुर पुनर्वसु,विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में भी ये कार्य किया जा सकता है।
  • पुखराज को अंगूठी में इस प्रकार जड़वाइये कि उसका निचला हिस्सा उंगली को स्पर्श करें। इस अंगूठी को प्रातः काल सूर्य उदय के समय पहनना चाहिए। पहनने से पहले इसे कच्चे दूध में रखें फिर गंगा जल से साफ करके एक पीले कपड़े पर रखें जिस पर चंदन व असगंध से गुरु यन्त्र बनाया गया हो। फिर गुरु मंत्र को 108 बार पढ़ना चाहिए फिर उसमें गुरु का वास समझकर अनामिका उंगली में धारण करें। यन्त्र को अपने पूजा स्थल पर रखें या किसी ब्राह्मण को दान दे दें।

पुखराज का विकल्प:-

  • पुखराज एक मूल्यवान रत्न है। अगर इसको खरीदना सम्भव नहीं है तो इसके उपरत्न का प्रयोग करें। पीला जर्कन, पीला ट्रीमोलीन का प्रयोग किया जा सकता है। अगर ये भी सम्भव नहीं है तो केले की जड़ पीले कपड़े व पीले धागे में पहने। इसको लाने व पहनने का तरीका पुखराज की तरह ही है।

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दान द्वारा निवारण:-

  • गुरुवार के दिन शुभ समय में किसी सुपात्र को निम्न वस्तुएं का दान करें। पीले वस्त्र,चने की दाल, घी, फल, कांसा, हल्दी, पुखराज, गुरु यन्त्र, पुस्तक व दक्षिणा सामर्थ्य अनुसार।

इससे संबंधित अगर आपको कुछ और जानकारी चाहिए तो हमारी एक्सपर्ट टीम से सम्पर्क करें या पूछताछ पर क्लिक कर अपना प्रश्न पूछे।

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