हनुमनथप्पा एक ऐसा जांबाज़ सिपाही, जिसकी कहानी दुनिया के लिए मिसाल बन गई

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Hanumanthappa Story in Hindi – भारतीय सैनिक देश के लिए अपनी जान तक न्यौछावर कर देते हैं। ये आखिरी सांस तक अपनी मातृभूमि के लिए लड़ते हैं और हंसते- हंसते शहीद हो जाते हैं। अंतिम सांस तक देश के लिए लड़ते हुए बहुत से भारतीय सैनिकों की कहानी तो आपने सुनी होगी, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे सैनिक की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो सियाचिन ग्लेशियर में हिमस्खलन के बाद करीब 25 फुट मोटी बर्फ के नीचे दबा रहा और 6 दिनों बाद उन्हें वहां से जीवित निकाला गया। तो चलिए आपको लांस नायक हनुमनथप्पा की शहादत की पूरी कहानी बताते हैं।

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Hanumanthappa Story in Hindi

हनुमनथप्पा का प्रारंभिक जीवनSiachen hero lance naik hanumanthappa biography 

  • हनुमनथप्पा का जन्म और पालन पोषण कर्नाटक में हुआ। बताया जाता है कि उनका स्कूल घर से काफी दूर था इसलिए वो हर रोज़ करीब 6 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाया करते थे।
  • इनका परिवार काफी गरीब था इसलिए उनका बचपन भी काफी गरीबी में बीता।
  • ये अपनी सैलरी से ही पूरे परिवार का पालन पोषण करते थे।
  • बचपन से ही निडर और साहसी थे इसलिए इनका नाम भगवान हनुमान के नाम पर रखा गया था।

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करियर की शुरुआत – Hanumanthappa Story in Hindi

  • ये बचपन से ही भारतीय सेना में जाना चाहते थे। इसी के चलते उन्होंने कई बार सेना में सिलेक्शन के लिए इंटरव्यू दिया, लेकिन भर्ती के दौरान उन्हें तीन बार रिजेक्ट किया गया।
  • रिजेक्ट होने के बाद भी इनका हौसला टूटा नहीं और न ही इन्होंने हार मानी, ये लगातार भर्ती के लिए अप्लाई करते रहे और कुछ समय बाद इनका सिलेक्शन भारतीय सेना में हो गया।

Hanumanthappa Koppad Story

  • 25 अक्टूबर 2002 को इन्हें मद्रास रेजिमेंट की 19वीं बटालियन में शामिल किया गया।
  • 2003 से 2006 तक वो जम्मू-कश्मीर के माहोर में तैनात रहे। इस दौरान उन्होंने आतंकियों के खिलाफ लोहा लिया और उन्हें धूल चटाई।
  • 2008 से 2010 तक इनकी पोस्टिंग फिर से जम्मू-कश्मीर में हो गई। इस बार वो 54 राष्ट्रीय राइफल्स मद्रास के साथ थे।
  • 2010 से 2012 के बीच उनकी तैनाती पूर्वोत्तर में हुई, जहां उन्होंने एनडीएफबी और उल्फा से लोहा लिया।
  • बताया जाता है कि हनुमनथप्पा काफी निडर थे इसलिए वो जानबूझकर चुनौती वाली जगहों पर पोस्टिंग मांगते थे।

Hanumanthappa Life Story

  • अगस्त 2015 में उनकी पोस्टिंग सियाचिन में हुई। दिसंबर 2015 उन्होंने खुद 19600 फीट की ऊंचाई पर मौजूद चौकी पर तैनाती ली।
  • 3 फरवरी को जब सियाचिन में हिमस्खलन हुआ, तब वह सियाचिन की सोनम पोस्‍ट पर तैनात थे।
  • इस बर्फीले तूफान की वजह से हनुमनथप्पा और उनके कुछ साथी, जो उस समय ड्यूटी पर तैनात थे वो सभी लगभग 33 फीट नीचे बर्फ में दब गए।

Hanumanthappa Real Story

  • हनुमनथप्पा 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में करीब पांच दिनों तक बर्फ के नीचे दबे रहे, लेकिन कहते हैं ना, जाको राखे साइयां, मार सके न कोई, ये बात उनपर बिलकुल सटीक बैठी। इतने दिनों तक बर्फ में दबे रहने के बाद भी उनकी सांसे नहीं छूटी, उन्हें भारतीय सैनिकों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान जीवित बाहर निकाल लिया। अपने 9 साथियों में बस हनुमनथप्पा ही जीवित बचे थे बाकी सभी शहीद हो चुके थे।
  • इसके बाद उन्हें दिल्ली के एक आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने तीन दिन तक वेंटीलेटर पर मौत को हराने की कोशिश की, लेकिन  11 फरवरी 2016 को वो ज़िंदगी की जंग हार गए।

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माधवी से हुआ था विवाह – Hanumanthappa Story in Hindi

  • शहीद हनुमनथप्पा अपने पीछे पत्नी माधवी, दो साल की बेटी और अपने माता-पिता को छोड़ गए हैं।
  • इस वीर जवान की शहादत को आज भी पूरा देश याद करता और उनको नमन करता है। इनकी यादें कभी भुलाई नहीं जा सकती।

Hanumanthappa Soldier Story in Hindi

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