हिमा दास ने विदेशों में सुनहरी दौड़ लगाकर इतिहास के पन्नो में दर्ज किया नाम

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Hima das biographyहिमा दास ने शनिवार को अपना पांचवा गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन किया। यह उनका 19 दिन में 5वां गोल्ड है। हिमा ने चेक रिपब्लिक में हुए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की दौड़ में 52.09 सेकंड के समय के साथ इस महीने का अपना पांचवां गोल्ड अपने नाम किया। इससे पहले ये अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक मीट में शामिल होकर 200 मीटर की दौड़ में चार गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। तो चलिए आपको बताते हैं इनके जीवन से जुड़ी बातें। 

Hima das biography 

हिमा दास ने एक महीने में जीते 5 गोल्ड मेडल Hima das biography

  • ढिंग एक्सप्रेसके नाम से मशहूर धाविका हिमा दास ने पिछले 19 दिनों में पांच गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। 
  • हिमा ने खुद इस खबर को अपने ट्विटर अकाउंट पर एक फोटो साझा कर के दी। फोटो के साथ हिमा ने लिखा, आज चेक गणराज्य में 400 मीटर स्पर्धा में शीर्ष स्थान पर रहते हुए रेस का अंत किया। रेस 52.09 सेकंड में पूरी की।
  • इससे पहले इन्होंने 2 जुलाई को यूरोप में, 7 जुलाई को कुंटो एथलेटिक्स मीट में, 13 जुलाई को चेक गणराज्य में और 17 जुलाई को टाबोर ग्रां प्री में अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण जीता है। 

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हिमा का जन्म और करियरHima das biography

  • 19 वर्षीय हिमा का जन्म 09 जनवरी 2000 को असम राज्य के नगाँव जिले के कांधूलिमारी गाँव में हुआ था। 
  • इनके पिता का नाम रणजीत दास तथा माता का नाम जोनाली दास है। ये चार भाई-बहनों से छोटी हैं।
  • हिमा को बचपन से ही स्पोर्ट्स में रुचि थी। इसी के चलते वो बचपन में लड़को के साथ फुटबॉल खेला करती थी और इसी में ही अपना करियर बनाना चाहती थी। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंज़ूर था। 
  • इनकी इस प्रतिभा को सबसे पहले जवाहर नवोदय विद्यालय के टीचर शमशुल हक ने पहचाना और उन्होंने इन्हें फटबॉल छोड़ रेसर बनने की सलाह दी। 
  • इसके बाद शमशुल हक़ ने उनकी पहचान नगाँव स्पोर्ट्स एसोसिएशन के गौरी शंकर रॉय से कराई। तभी से इन्होंने अपना ध्यान दौड़ की तरफ लगाना शुरु किया।
  • इस दौरान उन्होंने कई तरह की रेस प्रतियोगिता में भाग लिया। कुछ समय बाद ये जिला स्तरीय प्रतियोगिता में चयनित हुईं और उसमे इन्होंने दो स्वर्ण पदक जीते।
  • इस दौरान स्पोर्ट्स एंड यूथ वेलफेयरके निपोन दास की नज़र उन पर पड़ी। उन्होंने हिमा के परिवार वालों से हिमा को गुवाहाटी ट्रेनिंग के लिए भेजने के लिए कहा। 
  • गुवाहाटी उनके गांव से 140 किलोमीटर दूर था, इसी के चलते उनके परिवार पहले नहीं माने, लेकिन बाद में मान गए और हिमा को वहां ट्रेनिंग के लिए भेज दिया और यहीं से शुरू हुआ हिमा के एथलीट बनने का सफर। 
  • शुरू में निपुण ने इन्हें 200 मीटर रेस के लिए तैयार किया था, लेकिन जैसे जैसे इनका स्टैमिना बढ़ता गया, इन्होंने 200 मीटर की जगह 400 मीटर के ट्रेक पर दौड़ना शुरू कर दिया था।

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अवार्ड्स और अचीवमेंट Hima das biography

  • विश्व U-20 चैंपियनशिप में इन्होंने स्वर्ण पदक जीता। इस जीत के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ट्विटर पर बधाई दी थी।
  • ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में, वह 400 मीटर के फाइनल में छठे स्थान पर रहीं।
  • हिमा ने फिनलैंड के टैम्पेयर शहर में आयोजित IAAF विश्व U-20 एथलेटिक्स की 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता। जिसमें उन्होंने दौड़ को पूरा करने में 51.46 सेकंड का समय लिया। 
  • 2 जुलाई 2019 को पोजनान एथलेटिक्स ग्रांड प्रिक्स में 200 मीटर रेस को उन्होंने 23.65 सेकंड में पूरा करके गोल्ड जीता।
  • 7 जुलाई 2019 को पोलैंड में कुटनो एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर रेस को 23.97 सेकंड में पूरा कर गोल्ड मेडल जीता।
  • 13 जुलाई 2019 को चेक रिपब्लिक में हुई क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स में महिलाओं की 200 मीटर रेस को 23.43 सेकेंड में पूरा कर मेडल अपने नाम किया।
  • 17 जुलाई 2019 को चेक रिपब्लिक में ताबोर एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर रेस 23.25 सेकंड में पूरी कर मेडल पर कब्जा जमाया। 
  • चेक रिपब्लिक में हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर की दौड़ में 52.09 सेकंड के समय के साथ इस महीने का अपना पांचवां गोल्ड अपने नाम किया।
  • 25 सितंबर 2018 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • 14 नवंबर 2018 को यूनिसेफ-इंडिया की ब्रांड एंबेसडर बनी। इन्हें यूनिसेफ की ओर से भारत के पहले युवा ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया।
  • असम सरकार द्वारा असम की स्पोर्ट्स ब्रांड एंबेसडर के रूप में नियुक्त किया गया।
  • ये भोगेश्वर बरुआ के बाद असम की दूसरे एथलीट हैं जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। 
  • अपनी इस कामयाबी से हिमा ने दुनिया भर में अपने नाम का डंका बजाया है।

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