जानिए क्या कहती है भारत- चीन की कुंडली? किन ग्रह,नक्षत्रों में बने दोनों के बीच युद्ध जैसे हालात

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India china war astrology prediction 2020 in Hindi – जिस समय पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है, उस दौरान सीमा पर चीन की हरकतों ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या एक बार फिर दोनों देशों के बीच 1962 जैसे युद्ध की स्थिति बन सकती है। एलएसी, वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास गलवान घाटी में 15 जून 2020 को भारत और चीन की सेना के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद से स्थिति बेहद तनावपूर्ण है। भारत-चीन के संबंधों में आ रही तल्खी और युद्ध की आशंकाओं को ज्योतिष के माध्यम से जानने के लिए हमने देश के जाने-माने ज्योतिषविदों से विस्तार से बातचीत की। तो चलिए जानते हैं क्या कहते हैं भारत और चीन के सितारे।

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चीनी हमले का सूर्य ग्रहण से संबंध – India china war astrology prediction 2020 in hindi – india china war bhavishyavani

  • कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए ज्योतिष के ज़रिए इम्यूनिटी जांचने वाला सॉफ्टवेयर ईजाद करने वाले जाने-माने ज्योतिषी राजेश तिवारी सूर्य ग्रहण से चीनी हमले को जोड़कर देखे जाने का सिरे से खंडन करते हैं।
  • उनके अनुसार एलएसी पर यह संकट सूर्यग्रहण के पहले से बना हुआ है। अहम बात यह है कि चीनी सैनिकों के हमले में कई सैनिकों के शहीद और ज़ख्मी होने की घटना भी सूर्य ग्रहण से पहले हुई है। हालांकि वे हाल ही में पड़े सूर्य ग्रहण को भारतीय परिवेश में देखते हुए इस बात का दावा करते हैं कि पड़ोसी देशों (विशेष रूप से पूर्वोत्तर के राष्ट्र) के साथ संबंध खराब हो सकते हैं।

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क्या कहती है भारत की कुंडली ?

  • सूर्य ग्रहण के चलते भारत की कुंडली में दो तरह की स्थितियां बनती हुई नज़र आती हैं। भारत की कुंडली वृष लग्न की है और इसमें चतुर्थ भाव जनता का, पंचम भाव जनता के आनंद का है। ऐसे में जब तक बृहस्पति ग्रह बली नहीं होगा या फिर राहु का गोचर समाप्त नहीं होगा, तब तक भारत की जनता अपने पड़ोसी राष्ट्र के साथ ही सरकार के द्वारा लिए गए निर्णयों से दुखी रहेगी।
  • यह स्थिति कम से कम 30 सितंबर तक बनी रहेगी जिसके फलस्वरूप महंगाई, बेरोज़गारी, भुखमरी, बीमारी आदि का संकट बना रहेगा। पंडित राजेश तिवारी के अनुसार इस बार का सूर्यग्रहण मिथुन राशि में था और मिथुन राशि भारत की कुंडली में धन एवं परिवार से संबंधित है। ऐसे में धन और नागरिक दोनों के क्षय होने की आशंका है। फिर चाहे इसके पीछे महामारी, युद्ध, भुखमरी, धार्मिक हिंसा आदि जो भी कारण बने।
  • इन परिस्थितियों के बीच किसी विशिष्ट व्यक्ति की मृत्यु होने की भी आशंका है। पंडित राजेश तिवारी के अनुसार सिंह राशि भारत के चतुर्थ भाव में है और कन्या राशि पंचम की मालिक है। यह ईशान की दिशा कहलाती है। ऐसे में इस दिशा से जुड़े राष्ट्रों के साथ भारत के संबंध खराब होने की आशंका है।

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कैसे हैं चीन के सितारे?

  • चीन की कुंडली मकर लग्न की है, जिसके सप्तम भाव में नीच का मंगल, अष्टम भाव में शनि और नवम् भाव में सूर्य है। किसी भी जन्मांग में ऐसी स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि उसे जीवनकाल में अपने पार्टनर का सुख नहीं मिलेगा।
  • यही कारण है कि चीन का उसके किसी भी पड़ोसी देश के साथ संबंध बेहतर नहीं कहा जा सकता है। सातवें घर में नीच का मंगल है और चीन की कुंडली में जनता का मालिक भी मंगल है। ऐसे में मंगल ग्रह का जनता का कारक होकर नीच में बैठना इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि चीन की जनता वहां की सरकार से खुश नहीं रहेगी।

अलग -थलग पड़ जाएगा चीन!

  • पंडित राजेश तिवारी के अनुसार वर्तमान में शनि चीन की कुंडली के लग्न ही बैठा हुआ है यानी इस समय चीन की साढ़ेसाती चल रही है। ऐसे में वह मतिभ्रम की अवस्था में है और मतिभ्रम व्यक्ति हमेशा अपनी ताकत का अनुमान लगाने में अक्षम रहता है।
  • ग्रहों की ऐसी स्थिति से घिरा देश हो या जातक हमेशा अवसाद की अवस्था में चला जाता है। नतीजतन, आने वाले समय में चीन संपूर्ण विश्व से अलग-थलग पड़ जाएगा।

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चीन से युद्ध होगा या नहीं?

  • जब दोनों ही देशों ने सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर रखी हों और आसमान में लड़ाकू विमान-हेलीकॉप्टर मंडराते हुए देखे जा रहे हों तो युद्ध की चिंता करना स्वाभाविक है।
  • पंडित राजेश तिवारी की मानें तो ज्योतिष की दृष्टि से युद्ध की कोई गुंजाइश नहीं दिखाई देती है। उनके अनुसार वक्री होकर चल रहा बृहस्पति 30 जून को अपनी कक्षा में वापस लौट आएगा और इसके बाद 7 जुलाई 2020 तक भारत -चीन के साथ चल रही तनातनी खत्म होने का अनुमान है।
  • हालांकि वो इस बीच दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रूप से होने वाले छोटे -मोटे टकराव की आशंका से इंकार नहीं करते हैं, लेकिन उनके अनुसार ये टकराव युद्ध में तब्दील होने के आसार नज़र नहीं आ रहे हैं।

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फिर क्यों फुंफकार रहा है ड्रैगन?

  • आचार्य राजीव नारायण शर्मा के अनुसार शनि इस समय चीन की कुंडली के लग्न में बैठा हुआ है। मकर लग्न की कुंडली में मंगल मीन यानी तीसरे भाव में है, जो अत्यंत खतरनाक स्थिति है। वह चौथी दृष्टि से पराक्रम के घर यानी छठवें घर को देख रहा है। इस समय चीन की कुंडली में बुध की महादशा चल रही है।
  • ऐसे में जब चीन का बुध पीड़ित है, तो वह क्रूरतम कदम उठाने की ताकत रखता है। भारत की कुंडली में चंद्र की दशा 2018 से शुरु होकर 2028 तक चलेगी। ऐसे में भारत की भूमि पर शत्रुदेश की नज़र बनी रहेगी और चीन छल-कपट के ज़रिए इस पर कब्ज़ा करने की फिराक में रहेगा।
  • आचार्य राजीव नारायण शर्मा के अनुसार ग्रहों की ऐसी स्थिति 1961 में बनी थी। लगभग 60 साल बाद शनि और बृहस्पति एक साथ हैं, जिसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

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