जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी इन बातों को जानना है बेहद ज़रूरी

interesting facts about jagannath rath yatraभगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथपुरी में आरंभ होती है। इस बार 4 जुलाई को 135वीं रथ यात्रा शुरू होगी। ओडिशा के पुरी में होने वाली रथयात्रा में दुनिया भर से श्रद्धालु आते हैं। इस उत्सव पर सुभद्रा, बलराम और भगवान श्रीकृष्ण की नौ दिनों तक पूजा की जाती है। तो चलिए आपको बताते हैं रथयात्रा से जुड़ी कुछ खास बातें।

interesting facts about jagannath rath yatra

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  • भारत के चार पवित्र धामों में से एक पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर भी है। यह मंदिर 800 साल से भी अधिक पुराना है, यहां भगवान श्रीकृष्ण, जगन्नाथ रूप में विराजित होते हैं। साथ ही उनके बड़े भाई बलराम और उनकी बहन देवी सुभद्रा की पूजा भी की जाती है।
  • सभी के रथ का अलग-अलग नाम और रंग दिया गया है। बलरामजी के रथ को तालध्वजजिसका रंग लाल और हरा, देवी सुभद्रा के रथ को दर्पदलनजिसका रंग नीला और लाल और भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोषया गरुड़ध्वजकहा जाता है जिसका रंग लाल और पीला होता है।

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  • रथ यात्रा में सभी भगवानों के रथों की ऊंचाई एक समान नहीं रहती। इसमें भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ 45.6 फीट ऊंचा, बलरामजी का तालध्वज रथ 45 फीट ऊंचा और देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ 44.6 फीट ऊंचा होता है।
  • भगवान जगन्नाथ के रथ पर लगाए जाने वाले घोड़ों के नाम शंख, बलाहक, श्वेत एवं हरिदाशव है। रथ का सारथी दारुक और रक्षक पक्षीराज गरुड़ होता है।  
  • हनुमानजी और नृसिंह को भगवान जगन्नाथ के रथ पर प्रतीक चिन्ह के रूप में लगाया जाता है।
  • भगवान बलराम के रथ पर महादेवजी का प्रतीक​ चिन्ह होता है। इसके अलावा रथ के रक्षक वासुदेव और सारथी मताली होते हैं।

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  • बहन सुभद्रा के रथ पर देवी दुर्गा को प्रतीक चिन्ह के रूप में लगाया गया है। इसके अलावा रथ के रक्षक जयदुर्गा व सारथी अर्जुन होते है।
  • इन रथ की खास बात यह है कि इन्हें बनाने में कील या कांटे या अन्य किसी धातु का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसे सिर्फ लकड़ी द्धारा ही बनाया जाता है।

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  • यह रथयात्रा मुख्य मंदिर से प्रारंभ होकर 2 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर तक समाप्त होती है। जहां भगवान जगन्नाथ 7 दिन तक आराम करते हैं।
  • गुंडीचा मंदिर को गुंडीचा बाड़ीभी कहा जाता है। यह भगवान की मौसी का घर है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहीं पर देवशिल्पी विश्वकर्मा ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी की प्रतिमा का निर्माण किया था।
  • कहते हैं जो व्यक्ति गुंडिचा मंडप में रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम और सुभद्रा देवी के दर्शन दक्षिण दिशा को आते हुए करते हैं वे मोक्ष को प्राप्त होते हैं।
  • स्कन्द पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि रथ-यात्रा में जो व्यक्ति श्री जगन्नाथ जी के नाम का कीर्तन करता हुआ गुंडीचा नगर तक जाता है वह पुनर्जन्म से मुक्त हो जाता है।

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