जानिए भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के बारे में

Interesting facts about lord parshuramसृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु का छठा अवतार परशुराम को कहा जाता है। रामायण, महाभारत, भागवत पुराण और कल्कि पुराण इत्यादि ग्रन्थों में भगवान परशुराम के होने के बारे में बताया गया है। अक्षय तृतीया के दिन इनकी जयंती मना जाती है। इन्हें न्याय के देवता के रूप में भी जाना जाता है। आज हम आपको भगवान परशुराम के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में बताने जा रहे हैं

Interesting facts about lord parshuram

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  • परशुराम त्रेता युग के ब्राह्मण है। उन्हें विष्णु का छठा अवतार कहा जाता है। पौरोणिक कथाओ के अनुसार उनका जन्म देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप वैशाख शुक्ल तृतीया के दिनरात्रि के प्रथम प्रहर में हुआ था। जिस वजह से इनका जन्म सतयुग और त्रेतायुग के बीच में माना जाता है।
  • भगवान परशुराम जी का जन्म अक्षय तृतीया पर हुआ था, जिस वजह से अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जयंती के रूप में मनाया जाता है।

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  • भगवान परशुराम ऋषि जमदग्नि और रेणुका के  पांच पुत्रों में से एक हैं। उनके अन्य पुत्र रुक्मवान, सुखेण, वसु और विश्वा्नस थे।
  • भगवान परशुराम शस्त्र विद्या में पूरी तरह से निपुण थे। इसके अलावा पशुपक्षियों की भाषा को भी आसानी से समझ जाते और उनसे बाते किया करते थे
  • शस्त्र विद्या में प्रसिद्धि के कारण, भीष्म,द्रोण, कौरवपाण्डवों के गुरू अश्वत्थामा के पिता एवं कर्ण उनके प्रमुख शिष्य थे।
  • उन्होंने एकादश छन्दयुक्तशिव पंचत्वारिंशनाम स्तोत्रभी लिखा।
  • सीता स्वयंवर के दौरान जिस धनुष को रखा गया था, वह भगवान परशुराम का ही था। धनुष के टूटने पर जब परशुराम क्रोधित हुए तब इस पर भगवान श्री राम ने उन्हें अपना सुदर्शन चक्र सौंपा। यही सुदर्शन चक्र द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के पास था।

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  • महाभारत से जुड़ी प्रचलित कथाओं के अनुसार भीष्म पितामह परशुराम के ही शिष्य थे। बाद में उनसे भगवान परशुराम ने युद्ध भी किया।
  • भगवान परशुराम ने पिता की आज्ञा पर अपनी मां का वध भी किया। मातृ हत्या के पाप से मुक्ति के लिए उन्होंने भगवानशिव की कठोर तपस्या की। जिससे भगवान शिव ने परशुराम को  मृत्युलोक के कल्याणार्थ परशु अस्त्र दिया। इसी वजह से वो बाद में परशुराम कहलाए।
  • भगवान परशुराम अपने क्रोध के कारण जाने जाते हैं। एक बार वो भगवान शिव से मिलने पहुंचे पर शिव पुत्र गणेश ने उन्हें अंदर जाने से रोका, जिससे क्रोधित होकर उन्होंने भगवान गणेश का एक दांत तोड़ दिया।
  • भगवान परशुराम न्याय के देवता के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने अपने जीवन में 21 बार क्षत्रियों का नाश किया और पूरी पृथ्वी को क्षत्रियविहीन कर दिया।

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