Interesting Facts about Republic Day Parade – 26 जनवरी पर क्यों होती है परेड, जानिए परेड से जुड़ी खास बातें

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Interesting Facts about Republic Day Parade –  गणतंत्र दिवस एक राष्ट्रीय पर्व है जो हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है। भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस 1950 में मनाया था। यह दिन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश आज़ाद होने के बाद इसी दिन देश में संविधान लागू हुआ था। राष्ट्रीय पर्व के उपलक्ष्य में इस दिन इंडिया गेट पर हर राज्य की झांकियां निकाली जाती हैं और राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी जाती है। तो चलिए आपको गणतंत्र दिवस की परेड़ से जुड़ी कुछ खास बाते बताते हैं।

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Interesting Facts about Republic Day Parade | गणतंत्र दिवस परेड़ फैक्ट्स

  • आपको जान कर हैरानी होगी कि साल 1950 से 1954 तक गणतंत्र दिवस की परेड राजपथ पर न होकर, चार अलग-अलग जगहों पर हुई थीं। सबसे पहले इरविन स्टेडियम (वर्तमान नाम नेशनल स्टेडियम), किंग्सवे कैंप, लाल किला और उसके बाद रामलीला मैदान में हुई थी।
  • साल 1955 से गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन राजपथ पर शुरू किया गया। तभी से राजपथ ही इस आयोजन की स्थाई जगह बन चुका है।
  • गणतंत्र दिवस समारोह में हर साल किसी न किसी देश के प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति या शासक को विशेष अतिथि के तौर पर सरकार आमंत्रित करती है। खास बात ये है कि भीषण ठंड के बावजूद लोग सुबह चार-पांच बजे से ही परेड देखने के लिए पहुंचने लगते हैं।
  • 26 जनवरी 1950 यानी पहले गणतंत्र दिवस समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति डॉ. सुकर्णो विशेष अतिथि बन कर आये थे।
  • 26 जनवरी 1955 में गणतंत्र दिवस समारोह में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद विशेष अतिथि बन कर आये थे।

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  • साल 2015 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी भारत के गणतंत्र दिवस परेड में मेहमान बन कर आ चुके हैं।
  • 21 तोपों की सलामी वास्तव में भारतीय सेना की 7 तोपों द्वारा दी जाती है, जिन्हें पौन्डर्स कहा जाता है। प्रत्येक तोप से तीन राउंड फायरिंग होती है। ये तोपें 1941 में बनी थीं और सेना के सभी औपचारिक कार्यक्रमों (Formal programs) में इन्हें शामिल करने की परंपरा है।
  • परेड में शामिल सभी दल करीब सात महीने पहले अपनी प्रैक्टिस शुरू कर देते हैं। यहाँ आपको एकता, अखंडता, सांस्कृतिक विविधता और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन एक साथ देखने को मिलेगा।
  • इन परेड में शामिल सभी दल नवंबर महीने तक अपनी रेजिमेंट में अलग-अलग अभ्यास करते हैं। मगर दिसंबर से यह सभी दल एक साथ अभ्यास करने के लिए दिल्ली पहुंच जाते हैं।
  • हम में से बहुत सारे लोग इस बात को नहीं जानते कि गणतंत्र दिवस की परेड में सर्वश्रेष्ठ परेड की ट्रॉफी देने के लिए पूरे रास्ते में कई जगहों पर जजों को बिठाया जाता है। ये जज प्रत्येक दल को 200 मापदंडों पर नंबर देते हैं। इसके आधार पर सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दल को चुना जाता है। किसी भी दल के लिए इस ट्रॉफी को जीतना बड़े गौरव की बात होती है।
  • परेड में भाग लेने वाले सेना के जवान भारत में बनी इंसास (INSAS) राइफल लेकर चलते हैं जबकि विशेष सुरक्षा बल के जवान इजरायल में बनी तवोर (TAVOR) राइफल लेकर चलते हैं। जो भी सेना दल हथियार लेकर चलता है उसे कम से कम चार सुरक्षा पड़ाव पार करने होते हैं ताकि परेड में सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएं।
  • राजपथ पर मार्च पास्ट खत्म होने का बाद परेड का सबसे रोचक हिस्सा शुरू होता है, जिसे ‘फ्लाई पास्ट’ कहते हैं। इसकी जिम्मेदारी वायु सेना की पश्चिमी कमान के पास होती है।
  • भारत सरकार ने साल 2001 में गणतंत्र दिवस समारोह पर करीब 145 करोड़ रुपये खर्च किए थे। मगर 2014 में ये खर्च बढ़कर 320 करोड़ रुपये पहुंच गया था मतलब 2001 से 2014 के बीच 26 जनवरी समारोह के आयोजन में लगभग 51 फीसद की दर से खर्च में इजाफा हुआ है।

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  • 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय राष्ट्र ध्वज को फहराया जाता है और इसके बाद सामूहिक रूप में खड़े होकर राष्ट्रगान गाया जाता है।
  • साल 2014 में, भारत के 64वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर, महाराष्ट्र सरकार के प्रोटोकॉल विभाग ने पहली बार मुंबई के मरीन ड्राईव पर परेड आयोजित की, जैसी हर साल नई दिल्ली में राजपथ में होती है।
  • साल 2019 में मुख्य अतिथि के रूप में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शिरकत की थी।
  • हर साल 26 जनवरी की परेड में गीत “Abide with Me” निश्चित रूप से बजाया जाता था क्योंकि यह महात्मा गांधी का पसंदीदा गीत था। मगर अब इस गीत की जगह भारत का राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् बजाया जाएगा।

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