Janmashtami : जानिए कब है कृष्ण जन्माष्टमी और इसका शुभ मुहूर्त

Janmashtami kab ki hai – : हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के त्योहार को भगवान कृष्ण के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि कृष्ण भगवान ने राक्षस कंस के अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाने और दुष्टों का संहार करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था। तो जानिए कब है कृष्ण जन्माष्टमी और इसका शुभ मुहूर्त

janmashtami kab ki hai

कब है कृष्ण जन्माष्टमी? – Janmashtami kab ki hai

  • हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास (भादो माह) की कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी के दिन हुआ था। इस बार जन्माष्टमी 24 अगस्त को पड़ रही है।

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जन्माष्टमी का महत्व

  • श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का पूरे भारत वर्ष में विशेष महत्‍व है। यह हिन्‍दुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक है।
  • हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के त्योहार को भगवान कृष्ण के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने राक्षस कंस के अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए और दुष्टों का संहार करने के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था।
  • इसी के चलते लोग भगवान कृष्ण के जन्मदिन की खुशी को अलग अलग तरीके से मनाते हैं।

Janmashtami kab ki hai

  • इस दिन बच्‍चो से लेकर बूढ़े तक सभी अपने- अपने तरीके से कृष्ण के जन्‍म की खुशी में निर्जला व्रत रखते हैं और कृष्‍ण की महिमा का गुणगान करते हैं।
  • जन्माष्टमी के दिन मंदिरों में भजन-कीर्तन होते हैं और झांकियां भी निकाली जाती हैं। श्री कृष्ण को 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया जाता है, रात 12 बजे भगवान कृष्ण भगवान कृष्ण जन्म ले लेते हैं।

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जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त – janmashtami puja time

  • जन्माष्टमी तारीख – 24 अगस्त 2019
  • निशिता पूजा का समय – सुबह 12:01 से 12:46 ए.एम, अगस्त 25
  • अवधि – 00 घण्टे 45 मिनट
  • दही हाण्डी रविवार, 25, 2019 अगस्त
  • पारण समय – सुबह 05:59, अगस्त 25 के बाद

 कैसे करें व्रत-पूजन – Janmashtami puja vidhi

  • उपवास वाले दिन जल्दी उठकर स्नान आदि करें।
  • घर में श्री कृष्णा के बाल चरित्र की मूर्ति और उनके साथ देवकी जी की मूर्ति रखें।
  • इसके बाद आरती करें और व्रत का संकल्प लें।
  • रात्रि में विधिपूर्वक मुहूर्त होने पर कृष्ण जी की पूजा अर्चना करें।
  • कृष्ण भगवान का जन्म रात 12 बजे हुआ था इसलिए रात 12 बजे ही उनकी पूजा करें।
  • जन्म के बाद उनका दूध, दही, शहद, शुद्ध जल और पंचामृत आदि से स्नान कराएं।
  • नए वस्त्र पहनाएं और सुगंध, पुष्प, फल, मिष्ठान आदि अर्पित करें।
  • माखन, मिश्री, खीरा, तुलसी पत्ता, पंचामृत, पंजीरी, ककड़ी से उन्हें भोग लगाएं।
  • चंदन, अक्षत लगाएं और धूप-दीप जलाकर कृष्ण जी की आरती करें।
  • आरती के बाद सबको प्रसाद बांटे और अपना व्रत खोल लें।

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