Jaya ekadashi vrat katha: बैकुंठ की चाह रखने वाले जानें जया एकादशी का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

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Jaya ekadashi puja vidhi in hindi – माघ मास के शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें दिन को जया एकादशी कहा जाता है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उन पर अपनी कृपा बरसाते हैं। जया एकादशी को भैमी या भौमि के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों के अनुसार इस व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु और शंकर की पूजा एक साथ होती है। जया एकादशी के माघ महीने में आने के कारण इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। तो चलिए जानते हैं जया एकादशी पूजा विधि,मुहूर्त और कथा के बारे में।

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महत्व । mahatva – jaya ekadashi 2020 kab hai

  • जया एकादशी के दिन विधिवत रूप से पूजा करने वाले और कथा सुनने वाले व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य को धन और सम्पत्ति की कभी कमी नहीं होती।
  • इसे करने से मनुष्य भगवान विष्णु के धाम बैकुंठ को प्राप्त करता है।

जया एकादशी पूजा शुभ मुहूर्त । puja shubh muhurat in hindi

  • जया एकादशी 5 फरवरी 2020 (बुधवार)
  • पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 6 फरवरी – सुबह 7 बजे से 9 बजकर 13 मिनट
  • पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – शाम 6:53 मिनट पर।

Jaya ekadashi puja vidhi in hindi

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जया एकादशी कथा । jaya ekadashi ki katha in hindi –  jaya ekadashi vrat katha

  • एक बार देवताओं के राजा इंद्र नंदन वन में भ्रमण कर रहे थे। चारों तरफ खुशहाली का माहौल था। गांधर्व गा रहे थे और गंधर्व कन्याएं नृत्य कर रही थीं।
  • तब पुष्पवती नामक गंधर्व कन्या ने माल्यवान नामक गंधर्व को देखा और उसे रिझाने का प्रयास करने लगी। एक दूसरे को देखकर वह दोनों गायन का सुर-ताल भूल गए।
  • इससे संगीत की लय टूट गई और संगीत का सारा आनंद बिगड़ गया जिसके कारण सभा में उपस्थित देवगणों को यह बहुत बुरा लगा। यह देखकर देवेंद्र भी गुस्सा हो गए।
  • तब इंद्र ने पुष्पवती तथा माल्यवान को श्राप दे दिया कि तुमने देवी सरस्वती का अपमान किया है इसलिए तुम्हें मृत्युलोक में जाना होगा। जिसके कारण अब तुम अधम पिशाच असंयमी जीवन बिताओगे।
  • देवेंद्र का शाप सुनकर वे अत्यंत दुखी हुए और हिमालय पर्वत पर पिशाच योनि में दुःखपूर्वक जीवनयापन करने लगे। वहीं उन्हें असहनीय दुःख सहने पड़ रहे थे।
  • एक दिन उस पिशाच ने अपनी स्त्री से कहा ‘न मालूम हमने पिछले जन्म में कौन-से पाप किए हैं, जिसके कारण हमें इतनी दुःखदायी यह पिशाच योनि प्राप्त हुई है? पिशाच योनि से नरक के दुःख सहना कहीं ज्यादा उत्तम है।’ इसी प्रकार के अनेक विचारों को कहते हुए अपने दिन व्यतीत करने लगे।
  • मगर अपने दुःख से मुक्त होने के लिए माघ के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी के दिन दोनों ने कुछ भी भोजन नहीं किया और न ही कोई पाप कर्म किया। उस दिन मात्र फल-फूल खाकर ही दिन व्यतीत किया और दुःख के साथ पीपल के वृक्ष के नीचे विश्राम करने लगे।
  • दूसरे दिन प्रातः काल होते ही प्रभु की कृपा से दोनों को पिशाच योनि से मुक्ति मिल गयी और पुनः अपनी अत्यंत सुंदर अप्सरा और गंधर्व की देह धारण करके तथा सुंदर वस्त्रों तथा आभूषणों से अलंकृत होकर दोनों स्वर्ग लोक को चले गए।
  • उस समय आकाश में देवगण तथा गंधर्व इनकी स्तुति करने लगे।
  • नागलोक में जाकर इन दोनों ने सभी देवताओं को प्रणाम किया।

जया एकादशी पूजा विधि । jaya ekadashi puja vidhi in hindi

  • प्रातः काल उठकर स्नान करें।
  • भगवान विष्णु और शंकर की प्रतिमा स्थापित करें।
  • उसके बाद भगवान का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • फूल, धूप और पंचामृत आदि चीज़े भगवान विष्णु पर चढ़ाएं और व्रत की कथा का पाठ करें।
  • व्रत के दौरान सात्विक भोजन या निराहार रहकर पूरा दिन व्रत करें।
  • पूजा के बाद भगवान की आरती करें और ॐ नमो नारायणाय का जाप करें।

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