Jivitputrika Vrat Katha in Hindi pdf: संतान की रक्षा तथा लंबी आयु के लिए रखें जिवितपुत्रिका का व्रत

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Jivitputrika vrat katha in hindi pdf – jivitputrika vrat 2021 date in hindi – भारत एक विभिन्न धर्मों का देश है। जहां हर वर्ष विभिन्न तरीके के त्योहार मनाए जाते हैं। हिन्दू धर्म में, बड़ी धूमधाम से मनाया जाने वाले त्योहारों में से एक है जिवितपुत्रिका व्रत, जिसे जितिया व्रत भी कहा जाता है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में इस व्रत को अधिक महत्व दिया जाता है। जिवितपुत्रिका व्रत हिन्दू मास के अन्तर्गत आने वाले अश्विनी मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत घर की महिलाओं द्वारा अपनी संतान के लिए तथा सुख शांति के लिए रखा जाता है। तो जानिए जिवितपुत्रिका व्रत की कथा, महत्व, मुहूर्त, तिथि।jivitputrika vrat katha in hindi pdf

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जिवितपुत्रिका व्रत – Jivitputrika vrat kab hai Jivitputrika vrat kyu rakha jata hai

कठिन व्रत अथवा उपवास में से एक जिवितपुत्रिका व्रत महिलाओं अथवा माताओं द्वारा संतान प्राप्ति तथा अपनी संतान के शुभ मंगल हेतु एवं उनकी आयु वृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। जिवितपुत्रिका व्रत पूजा का आरंभ सप्तमी से शुरू हो जाता है। इसके बाद यह व्रत पूजा सप्तमी, अष्टमी, नवमी इन तीन दिनों तक चलता है। कुछ माताएं अपनी संतान के लिए यह व्रत निर्जला रखती हैं तो कुछ निराहार रख पाती हैं। पुराणों के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में पलने वाले शिशु को जीवनदान का अवसर दिया था इसलिए यह व्रत अपनी संतान की रक्षा के लिए रखा जाता है। इस व्रत के धारण करने पर संतान की रक्षा का दायित्व भगवान श्री कृष्ण के हाथों में आ जाता है।

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जिवितपुत्रिका व्रत 2021 तिथि – Jivitputrika vrat kab hai

2021 में जिवितपुत्रिका व्रत का आरंभ 28 सितंबर से होगा। 28, 29, 30 इन तीन दिन जिवितपुत्रिका व्रत मनाया जाएगा। 29 सितंबर के दिन बिना कुछ खाए, पिए, निर्जला जिवितपुत्रिका व्रत का पालन किया जाएगा। इसके ठीक अगले ही दिन 30 सितंबर को व्रत का समापन किया जाएगा। जिवितपुत्रिका व्रत इस साल अश्विन मास की अष्टमी तिथि 28 सितंबर को रखा जाएगा।

शुभ मुहूर्त – Jivitputrika vrat shubh muhurat in hindi  –
jitiya vrat ka paran kitne baje hai  

  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ – सितम्बर 28, 2021 को 06:16 पी एम बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त – सितम्बर 29, 2021 को 08:29 पी एम बजे

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पूजा विधि – Jivitputrika vrat puja vidhi in hindi

  • जिवितपुत्रिका व्रत के दिन प्रातः काल उठकर, स्नान आदि करें।
  • भगवान नारायण की मूर्ति को साफ करके, उनका जलाभिषेक करके।
  • धूपबत्ती प्रज्ज्वलित करें, आरती करें
  •  अब भोग लगाकर, हरी नारायण को नमस्कार करें।
  • सप्तमी के दिन पूजा करने के बाद जल, भोजन ग्रहण कर लेंगे।
  • इसके पश्चात्, अष्टमी के दिन सुबह से निर्जला व्रत धारण किया जाएगा।
  • इस व्रत का समापन नवमी तिथि को पूजा के साथ कर दिया जाता है।

पारण –  30 सितम्बर के दिन स्नान करने के बाद भगवान नारायण की पूजा करके व्रत का पारण करना होगा।

जिवितपुत्रिका व्रत कथा – Jivitputrika vrat katha in hindi pdf – Jivitputrika vrat ki katha Pdf Download

पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि एक बार एक चील और एक मादा लोमड़ी नर्मदा नदी के पास एक हिमालय के जंगल में रहते थे। एक दिन इन दोनों ने कुछ महिलाओं को पूजा – पाठ करते और व्रत रखते हुए देखा। इन्हें देखने के बाद उनके मन में भी इस व्रत को रखने की इच्छा जागी और दोनों ने इस व्रत को रख लिया। उपवास के दौरान लोमड़ी को बहुत भूख लगी और वो भूख के कारण बेहोश हो गई और उसने चुपके से खाना खा लिया। वहीं दूसरी  तरफ चील ने पूरे विधि – विधान से व्रत का पालन किया और उसे पूरा किया। इसके परिणामस्वरूप, लोमड़ी से जो बच्चा पैदा हुआ वो जन्म के कुछ दिन बाद ही मर गया और चील की संतान लंबी आयु के लिए धन्य हो गई।

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