Jyeshtha Purnima 2020: ज्येष्ठ पूर्णिमा शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

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Jyeshtha purnima puja vidhi muhurat – हिंदू धर्म में सभी पूर्णिमा का अपना अलग-अलग महत्व है। मगर पुराणों के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है| ऐसा माना जाता है कि इस दिन अपनी श्रद्धानुसार दान करना चाहिए| इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा 5 जून को है| तो चलिए आपको इस दिन का महत्व और शुभ मुहूर्त बताते हैं|

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Jyeshtha purnima puja vidhi muhurat – ज्येष्ठ पूर्णिमा महत्व, पूजा विधि

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कब है ज्येष्ठ पूर्णिमा?

  • यह 5 जून 2020 यानी शुक्रवार को पड़ेगी|

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इस दिन को ज्येष्ठ पूर्णिमा क्यों कहा जाता है?

  • ऐसी मान्यता है कि वट पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में जाता है इसलिए इस महीने को ज्येष्ठ माह कहा जाता है|
  • हिंदू वार्षिक कैलेंडर के अनुसार यह महीना साल का तीसरा महीना होता है|

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इस दिन का महत्व – Jyeshtha purnima puja vidhi muhurat 

  • मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान-ध्यान एवं दान-पुण्य के कार्यों को करने से शुभफल की प्राप्ति होती।
  • आमतौर पर इस दिन श्रद्धालु गंगा जल के साथ अमरनाथ यात्रा के लिए जाते हैं|
  • ज्येष्ठ माह में आने वाली पूर्णिमा को विशेष फलदायी माना जाता है।
  • संत कबीर का जन्म ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुआ था जिस कारण इसी दिन कबीरदास जयंती भी मनाई जाती है|

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शुभ मुहूर्त

  • पूर्णिमा तिथि आरंभ – 5 जून 2020, सुबह 03 बजकर 17 मिनट 47 सेकंड से
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त – 6 जून 2020, रात 12 बजकर 44 मिनट तक|

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पूजा विधि – Jyeshtha purnima puja vidhi muhurat 

  • सुबह जल्दी उठ कर स्नान कर लें|
  • महिलाएं इस दिन वट वृक्ष के नीचे बैठकर पूजा आराधना करती हैं।
  • इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है|
  • पूजा के लिए एक टोकरी में सात तरह के अनाज रख लें|
  • कच्चे दूध में बताशा मिला लें|
  • उसके बाद वट वृक्ष पर अक्षत, कुमकुम, धूप, दीप आदि दान करें|
  • पेड़ में मौली यानी लाल धागा बांधे और पेड़ के चारो तरफ सात फेरे लें|
  • उसके बाद आरती करें और व्रत कथा सुने|
  • इस दिन रात को शादीशुदा जोड़ों को कच्चे दूध में बताशा मिलाकर चंद्र देव को जल चढ़ाना चाहिए| ऐसा करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं|
  • कुछ लोग यह व्रत पति की लंबी आयु के लिए भी रखते हैं|

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