Kaal bhairav mahatva puja vidhi mantra – संकटों के नाश के लिए इस मुहूर्त में करें काल भैरव की पूजा

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Kaal bhairav mahatva puja vidhi mantra in Hindi – काल भैरव को भगवान शिव का पांचवा रूप माना जाता है। पौराणिक शास्त्रों और कथाओं के अनुसार मार्गशीष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन इनका जन्म हुआ था। इनका जन्म आधी रात में होने के कारण इनकी पूजा भी आधी रात को की जाती है |  तो चलिए आपको बतातें हैं काल भैरव जंयती शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि, कथा, मंत्र आदि | इस साल यह 19 नवंबर पड़ेगा |

kaal bhairav mahatva puja vidhi mantra

काल भैरव जयंती क्यों मनाई जाती है ? | kyon manate hai kaal bhairav jayanti

इस दिन भगवान काल भैरव का जन्म हुआ था | कुछ लोग इसे इस दिन को काल भैरव अष्टमी के नाम से भी जानते है | काल भैरव को भगवान शिव का रूप माना जाता है। कई जगह काल भैरव को दण्डपति के नाम से भी पुकारा जाता है |

kaal bhairav mahatva puja vidhi mantra | काल भैरव पूजा विधि महत्व

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महत्व | significance

  • यदि कोई व्यक्ति काल भैरव जंयती के दिन भगवान काल भैरव की पूजा कर ले तो उसे मनचाही सिद्धियां प्राप्त हो जाती है।
  • भगवान काल भैरव को तंत्र का देवता भी माना जाता है।
  • इतना ही नहीं भगवान काल भैरव की पूजा करने से सभी कष्ट और दुःख समाप्त हो जाते है।

Kaal bhairav mahatva puja vidhi mantra

मुहूर्त |muhurat

  • 19 नवम्बर 2019 मंगलवार
  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 19, 2019 को दोपहर 03:35 बजे से
  • अष्टमी तिथि समाप्त – नवम्बर 20, 2019 को रात 01:41 बजे तक |

कथा – Katha

  • पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी के पांचवे सिर ने भगवान शिव के बारें में कई अपशब्द कहें |
  • जिसके कारण सभी देवी-देवता उनसे बहुत नारज हुए |
  • अपने अपमान पर भगवान शिव ने ध्यान नहीं दिया मगर उनके शरीर से एक ज्वाला उत्पन्न हुई जो ब्रह्मा का संहार करने के लिये बढ़ी |
  • इस ज्वाला को काल भैरव का नाम मिला,जिसे बाद में शिव ने काशी का नगरपाल नियुक्त कर दिया।
  • इस दिन ब्रह्मा का अहंकार नष्ट हुआ था, इसलिए यह दिन भैरव अष्टमी और काल भैरव जयंती के रूप में मनाया जाने लगा।

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पूजा विधि – Kaal bhairav mahatva puja vidhi mantra

  • प्रातः काल उठ कर स्नान करें, और व्रत का संकल्प लें |
  • व्रत का संकल्प ले कर पितरों के नाम का तर्पण करें |
  • काल भैरव की पूजा रात को की जाती है, इसलिए मुहूर्त के समय भगवान शिव के काल भैरव की मूर्ती स्थापित करें |
  • अगर आपके पास काल भैरव की मूर्ती नहीं है तो आप भगवान शिव की प्रतिमा रख सकते हैं|
  • पूजा के समय पूरे विधि विधान से धूप, दीप जला कर सरसो के तेल का दिया जलाएं |
  • इस दिन काले तिल,उड़द चढ़ाना शुभ माना जाता हैं |
  • अब आप कथा सुनें और आरती करें |
  • आरती के बाद किसी कुत्ते को खाना खिलाना चाहियें,क्योंकि काल भैरव का वाहन कुत्ता होता है |

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