Kabaddi History in Hindi: जानिये कब और कैसे शुरू हुआ कबड्डी का खेल

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Kabaddi History in Hindi – History of Kabaddi – कबड्डी का गेम सबसे पहले प्राचीन भारत के तमिलनाडू में खेला गया था। सन 1938 कलकत्ता में कबड्डी को नेशनल गेम्स में शामिल किया गया और 1950 में अखिल भारतीये कबड्डी फेडरेशन स्थापित किया गया। बाद में 1972 में इस फेडरेशन का नाम बदलकर ‘अमैच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ़ इंडिया’ रख दिया गया। चलिए आपको बताते हैं कब और कैसे शुरू हुआ कबड्डी का खेल।kabaddi history in hindi

Kabaddi History in Hindi – History of Kabaddi

कबड्डी को पहचान 1936 में बर्लिन ओलंपिक्स से मिली। कबड्डी के इस खेल में आपको रग्बी, कुश्ती आदि जैसे खेलों की भी झलक देखने को मिल जाती हैं। इस खेल को भारत में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है जैसे तमिलनाडु में कबड्डी को चादूकट्टू, बांग्लादेश में हद्दू, मालद्वीप में भवतिक कहते हैं तो पंजाब में कुड्डी, पूर्वी भारत में हू तू तू, आंध्र प्रदेश में चेडूगुडू के नाम से फेमस हैं। वैसे कबड्डी शब्द एक तमिल शब्द ‘काई- पीडी’ शब्द से मिलकर बना है जिसका अर्थ ये होता है कि हाथ पकड़े रहना। सबसे पहले कबड्डी का कॉम्पिटिशन साल 1938 में कलकत्ता में खेला गया था।  एशियाई गेम्स में साल 1982 में कबड्डी को शामिल कर लिया गया। कबड्डी मिट्टी में खेला जाता है लेकिन आज के समय में इसके लिए अलग से कोर्ट बनाये जाते हैं। लयकीन ग्रामीण इलाकों में आज भी कबड्डी मिट्टी में खेला जाता है।

Kabaddi History in Hindi – History of KabaddiKabaddi ke niyam – kabaddi rules and skills in hindi

कबड्डी के नियमों कोर्ट आदि के बारें में बताते है – 

कबड्डी में दो टीमें होती हैं और हर टीम में 12 खिलाड़ी रहते हैं, लेकिन केवल सात खिलाड़ी ही मैदान में खेलते हैं। इसके मैचों को 20-20 मिनट के दो राउंड  में खेला जाता है और बीच मर 5 मिनट का ब्रेक भी दिया जाता है। पहला राउंड ख़त्म होने के बाद दोनों टीमें अपना खेलने का एरिया बदल लेती हैं। वहीं वूमेंस के लिए 15-15 मिनट के दो राउंड होते हैं । डिफेंस करने वाली टीम के खिलाड़ी का पैर पीछे वाली रेखा से बाहर निकल जानें पर उस खिलाड़ी को आउट मान लिया जाता है।

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रेड करने वाला खिलाड़ी जो दूसरी टीम के एरिया में जाता है उसे लगातार बिना सांस रोके कबड्डी-कबड्डी बोलते रहना होता है अगर बोलते – बोलते वो कहीं रुकता तो खिलाड़ी को आउट मान लिया जाएगा। एम्पायर द्वारा रेडर किसी नियम को तोड़ता है तो एम्पायर उसे पहले वार्निंग देता है फिर भी यदि रेडर अपनी गलती दोहराता है तो विपक्षी टीम को एक अंक दे दिया जाता है, लेकिन रेडर को आउट करार नहीं देते। यदि एक से अधिक रेडर विरोधी टीम के एरिया में पहुंच जाते हैं तो एम्पायर उन्हें आउट दे देता है।  मैच के बीच में यदि किसी टीम के एक या दो खिलाड़ी बच जाते हैं, तो कप्तान के पास पावर होती है कि वो भी अपनी टीम के सभी सदस्यों को बुला सकता है। इसके बदले विपक्ष को उतने अंक एवं ‘लोना‘ के दो अंक मिल जाते हैं। रेडर यदि बोनस लाइन को पार कर जाता है या छूकर आ जाता है तो उसकी टीम के खाते में एक अंक चला जाता है। यदि खिलाड़ी के शरीर का कोई पार्ट कबड्डी कोर्ट से बाहर ज़मीन पर लगता है, तो उस खिलाड़ी को आउट दे दिया जाता है।

Kabaddi History in Hindi

खिलाड़ियों के गलत बर्ताव के लिए रेफरी के पास ये पावर होती है कि वो खिलाड़ियों को चेतावनी दे सकता है, विरोधी टीम को अंक दे सकता है। कबड्डी के मैच में  एक रेफरी, दो एम्पायर, एक अंक लिखने वाला और उनके साथ दो असिस्टेंट लेखक रहते हैं। किसी स्पेशल कंडीशन में कप्तान के पास ये अधिकार होता है कि वो दो बार टाइम आउट ले ले, जिनका समय 30-30 सेकंड का होता है, लेकिन इस बीच खिलाड़ी मैदान छोड़कर नहीं जा सकते। कोई भी रेडर अथवा विपक्षी खिलाड़ी किसी को धक्का देकर लाइन के बाहर नहीं गिरा सकता है। जब एक टीम विपक्षी टीम के सभी खिलाड़ियो को आउट कर देती है, तो उसे एक ‘लोना’ मिलता है। इसमे दो अंक फालतू मिलते हैं। एक बार बदले गए खिलाड़ी को दोबारा गेम में शामिल करने की अनुमति नहीं होती। यदि मैच ख़त्म होने के बाद दोनों टीमों के अंक बराबर रहते हैं तो फिर टीमों को  5-5 रेड दे दी जाती हैं। जो भी टीम ज़्यादा रेड करती है तो उसे मैच विनर करार दे दिया जाता है।

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बौकल लाइन को पार करने के बाद यदि रेडर बिना किसी डिफेंडर को छुए या बिना बोनस लाइन को छुए वापस अपने पाले में आ जाता है तो इसे एम्प्टी रेड कहा जाता है और किसी भी टीम को कोई भी अंक नहीं मिलता। यदि दोनों में से कोई टीम दो एम्प्टी रेड कर दे तो तीसरे रेड को ‘डू ओर डाई’ रेड कहते है।  इस रेड पर टीम को या तो बोनस या टच अंक  हासिल करना पड़ता है। ऐसा अगर वो टीम कर लेती है तो उसको एक एक्स्ट्रा पॉइंट मिल जाट हैं। ऐसा नहीं करने पर डिफेंडर टीम को एक अतिरिक्त पॉइंट मिलता है। यदि डिफेंडर टीम में खिलाड़ियों की संख्या तीन या तीन से कम रह जाती है, और वो टीम किसी रेडर को संभालने और आउट कर देती है तो इसे सुपर टैकल कहा जाता है। इसके लिए डिफेंडर टीम को एक एक्स्ट्रा पॉइंट दे दिया जाता हैं।

Kabaddi History in Hindi – kabaddi rules and skills

कबड्डी में वूमेंस टीम के लिए अलग कोर्ट और मेंस टीम के लिए अलग कोर्ट बनाया जाता है। मेंस के लिए कोर्ट की लंबाई 13 मीटर और चौड़ाई 10 मीटर की होती है। वहीं वूमेंस के लिए कोर्ट की लंबाई 12 मीटर और चौड़ाई 8 मीटर होती है। इसमें सीनियर पुरुषों के लिए वज़न 85 किलोग्राम होना चाहिए और सीनियर वूमेंस के लिए वज़न 75kg होना चाहिए। वहीं जूनियर मेंस के लिए वज़न 70 किलोग्राम और जूनियर वूमेंस के लिए वज़न 65 किलोग्राम होने चाहिए। 50 किलोग्राम वज़न से कम वाले मेंस और वूमेंस के लिए कोर्ट की लंबाई 11 मीटर और चौड़ाई 8 मीटर कर दी जाती है।

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