कबीर के ये दोहे जो देते हैं जीवन में अच्छा करने की सीख

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Kabir Ke Dohe Meaning Hindi – कबीर दास जी हिंदी साहित्य के महिमामण्डित व्यक्तित्व होने के साथ-साथ एक महान संत, एक महान विचारक और समाज सुधारक भी थे। कबीर दास जी ने अपने सकारात्मक विचारों से करीब 800 दोहों में जीवन के कई पक्षों पर अपने अनुभवों का जीवंत वर्णन किया है। उनके द्धारा कही गई बातें समाज को एक आईना दिखाती हैं। तो इसी क्रम में हम आपको रूबरू करा रहे हैं कबीर के ये सदाबहार दोहों से, जिन्हें सुन कर जीने की सही राह समझ में आती है और हर मुश्किल आसान लगती है।

kabir ke dohe meaning hindi

Kabir ke dohe with meaning in hindi

1

दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।

जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय॥

हिन्दी में अर्थ: कबीर दास जी कहते हैं हम सभी परेशानियों में फंसने के बाद ही ईश्वर को याद करते हैं। सुख में कोई याद नहीं करता, जो यदि सुख में याद किया जाएगा तो फिर परेशानी क्यों आएगी।

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Kabir Ke Dohe Meaning Hindi

2

 बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,

जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

हिन्दी में अर्थ: जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा न मिला। जब मैंने अपने मन में झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं है।

3

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर,

ना काहू से दोस्ती,न काहू से बैर॥

हिन्दी में अर्थ: इस संसार में आकर कबीर अपने जीवन में बस यही चाहते हैं कि सबका भला हो और संसार में यदि किसी से दोस्ती नहीं तो दुश्मनी भी न हो।

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4

जब गुण को गाहक मिले, तब गुण लाख बिकाई।

जब गुण को गाहक नहीं, तब कौड़ी बदले जाई॥

हिन्दी में अर्थ: कबीर कहते हैं कि जब गुण को परखने वाला ग्राहक मिल जाता है, तो गुण की कीमत होती है। पर जब ऐसा ग्राहक नहीं मिलता, तब गुण कौड़ी के भाव चला जाता है।

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5

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर

पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥

हिन्दी में अर्थ: कबीर कहना चाहते हैं कि सिर्फ बड़ा होने से कुछ नहीं होता है। बड़ा होने के लिए विनम्रता ज़रूरी गुण है। जिस प्रकार खजूर का पेड़ ऊंचा होने के बावजूद भी ना ही पथिक को छाया देता है और न ही उसके फल आसानी से तोड़े जा सकते हैं।

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Kabir Ke Dohe Meaning Hindi

6

झूठे सुख को सुख कहे, मानत है मन मोद

खलक चबैना काल का, कुछ मुंह में कुछ गोद।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि अरे जीव! तू झूठे सुख को सुख कहता है और मन में प्रसन्न होता है? देख यह सारा संसार मृत्यु के लिए उस भोजन के समान है, जो कुछ तो उसके मुंह में है और कुछ गोद में खाने के लिए रखा है।

7

संत ना छाडै संतई, जो कोटिक मिले असंत

चन्दन भुवंगा बैठिया, तऊ सीतलता न तजंत।

अर्थ: सज्जन को चाहे करोड़ों दुष्ट पुरुष मिलें फिर भी वह अपने भले स्वभाव को नहीं छोड़ता। चन्दन के पेड़ से सांप लिपटे रहते हैं, पर वह अपनी शीतलता नहीं छोड़ता।

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8

कबीर तन पंछी भया, जहां मन तहां उडी जाइ।

जो जैसी संगती कर, सो तैसा ही फल पाइ।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि संसारी व्यक्ति का शरीर पक्षी बन गया है और जहां उसका मन होता है, शरीर उड़कर वहीं पहुँच जाता है। सच है कि जो जैसा करता है, वह वैसा ही फल पाता है।

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Kabir Ke Dohe Meaning Hindi

9

तन को जोगी सब करें, मन को बिरला कोई

सब सिद्धि सहजे पाइए, जे मन जोगी होइ।

अर्थ: शरीर में भगवे वस्त्र धारण करना सरल है, पर मन को योगी बनाना अच्छे व्यक्तियों का काम है। य़दि मन योगी हो जाए तो सारी सिद्धियाँ सहज ही प्राप्त हो जाती हैं।

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10

ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय

अपना तन शीतल करे, औरन को सुख होय।

अर्थ: अहंकार का त्याग करके ऐसी वाणी में बात करें कि औरों के साथ-साथ स्वयं को भी खुशी मिले। अर्थात मीठी वाणी से ही दिल जीते जाते हैं।

11

धीरे-धीरे रे मन, धीरे सब-कुछ होय

माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय ।

अर्थ: दुनिया में सारी चीजें अपनी रफ्तार से घटती हैं, हड़बड़ाहट से कुछ नहीं होता है। माली पूरे साल पौधे को सींचता है और समय आने पर ही फल फलते हैं।

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12

साईं इतनी दीजिए, जा में कुटुंब समाए

मैं भी भूखा न रहूं, साधू न भूखा जाए।

अर्थ: यहां कबीर ईश्वर से सिर्फ उतना ही मांगते हैं, जिसमें पूरा परिवार का खर्च चल जाए। न कम और न ज्यादा कि वे भी भूखे न रहें और दरवाजे पर आया कोई साधू-संत भी भूखा न लौटे।

Kabir Ke Dohe Meaning Hindi

13

जैसे तिल में तेल है, ज्यों चकमक में आग

तेरा साईं तुझ में है, तू जाग सके तो जाग।

अर्थ: जिस तरह तिल में तेल होने और चकमक में आग होने के बाद दिखलाई नहीं पड़ता। ठीक उसी तरह ईश्वर को खुद के भीतर खोजने की ज़रूरत है। बाहर खोजने पर सिर्फ निराशा हाथ लगेगी।

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14

पोथि पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोए

ढाई आखर प्रेम के, पढ़ा सो पंडित होए।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि किताबें पढ़ कर दुनिया में कोई भी ज्ञानी नहीं बना है। बल्कि जो प्रेम को जान गया है वही दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञानी है।

Kabir Ke Dohe Meaning Hindi

15

चिंता ऐसी डाकिनी, काट कलेजा खाए

वैद बिचारा क्या करे, कहां तक दवा लगाए।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि चिंता रूपी चोर सबसे खतरनाक होता है, जो कलेजे में दर्द उठाता है। इस दर्द की दवा किसी भी चिकित्सक के पास नहीं होती।

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16

तिनका कबहुं ना निन्दिये, जो पांवन तर होय,

कबहुं उड़ी आंखि न पड़े, तो पीर घनेरी होय।

अर्थ: कबीर कहते हैं कि एक छोटे से तिनके को कभी बेकार ना कहो जो तुम्हारे पांवों के नीचे दबा होता है। यदि कभी वह उड़कर आंख में आ गिरे तो गहरी पीड़ा देता है। कबीर बताते हैं कि  छोटे-बड़े के फेर में नहीं पड़ना चाहिए। मनुष्य को सभी इंसानों को उनके जाति और कर्म से ऊपर उठकर सम्मान की दृष्टि से देखना चाहिए।

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