Kala pani ki saza kya hoti hai – क्या होती थी कालापानी की सज़ा और ये कहां दी जाती थी?

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Kala pani ki saza kya hoti hai – कालापानी की सज़ा का नाम सुनकर आज भी लोगों के रौंगटे खड़े हो जाते हैं| अंग्रेज़ों के शासनकाल से इसे सबसे खतरनाक सज़ा माना जाता है| अंडमान निकोबार द्वीप समूह पर बनी सेल्यूलर जेल में आज भी इस क्रूरता भरी सज़ा की गूंज कहीं न कहीं सुनाई पड़ती है| तो चलिए आपको बताते हैं किसे कहते हैं कालापानी की सज़ा।

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Kala pani ki saza kya hoti hai – कालापानी सज़ा की कहानी

किसे कहते हैं कालापानी की सज़ा

  • कालापानी की सज़ा सेल्यूलर जेल में दी जाती थी। यह जेल अंडमान निकोबार में बनी हुई थी।
  • यह जेल भारत भूमि से हज़ारों किलोमीटर दूर स्थित थी और इसके चारों ओर पानी ही पानी था। यहां से कैदियों का भागना नामुमकिन था।
  • जेल में हर कैदी के लिए एक अलग सेल होती थी। यहां का अकेलापन कैदी के लिए सबसे भयावह होता था।
  • कालापानी की सज़ा अंग्रेजी हुकूमत देती थी| सेल्यूलर जेल वही जगह थी जहाँ अंग्रेजी हुकूमत का वहशीपन देखने को मिलता था|
  • यह सज़ा अंग्रेजी सरकार द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों और आम जनता को दी जाती थी। यहां कैदियों के साथ बहुत दुर्व्यवहार किया जाता था, क्रूरता की सारी हदे पार की जाती थी इसलिए इसे कालापानी की सज़ा कहा गया।

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कैसे दी जाती थी सज़ा? | kala pani jail stories – Kala pani ki saza kya hoti hai

  • इस जेल में हज़ारों कैदियों को फांसी दी गयी थी और कई कैदियों को तोपों से उड़ा दिया गया था|
  • इस जेल को सेल्यूलर जेल इसलिए कहा जाता था क्योंकि यहाँ क़ैदियों को एक दूसरे से बहुत दूर रखा जाता था, जिससे वह आपस में कोई बातचीत या किसी तरह की गतिविधि न कर पाएं|
  • इस जेल की दीवारे इतनी छोटी थी कि कोई भी यहाँ से आसानी से भाग सकता था, मगर यह चारों ओर से समुंद्र से घिरा हुआ था, जिससे कैदियों का भाग पाना मुश्किल था। पानी के अलावा वहां दूर – दूर तक कुछ नहीं था।
  • जेल के सुप्रिटेंडेंट का कहना था कि यहाँ की दीवारें इसलिए छोटी बनाई गयी हैं, क्योंकि आस-पास पानी के अलावा कुछ दिखाई नहीं पड़ता है|
  • यहां सज़ा काटने के लिए 200 विद्रोहियों को जेलर डेविड बेरी और मेजर जेम्स पैटीसन वॉकर लेकर आए थे|
  • वही 733 विद्रोहियों को कराची से लाया गया था| इसके अलावा भारत और बर्मा के कुछ सैनिक भी यहाँ थे|
  • 19वीं शताब्दी में जब स्वतंत्रता संग्राम ने जोर पकड़ा, तब यहां कैदियों की संख्या बहुत ज़्यादा बढ़ने लगी थी|
  • सज़ा के तौर पर हर कैदी को तीस पाउंड नारियल और सरसों को पेरना होता था| यदि वह ऐसा नहीं कर पाते थे तो उन्हें मारा-पीटा जाता था और बेडियों से बाँध दिया जाता था|
  • यहाँ कई दिनों तक कैदियों को भूखा-प्यासा रखकर काम करवाया जाता था|

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सेल्यूलर जेल का इतिहास – History of kala Pani Punishment – Kala pani ki saza kya hoti hai

  • इस जेल का निर्माण साल 1896 में हुआ था और यह 1906 में बनकर तैयार हो गयी थी|
  • वर्तमान समय में इसे म्यांमार के नाम से जाना जाता है|
  • इस जगह 7 शाखा और बीचों बीच एक टावर है जिससे कैदियों पर नज़र रखी जाती थी|
  • इस टावर पर एक घंटा लगा हुआ था, जो किसी खतरे का एहसास होने पर बजाया जाता था|
  • यहाँ कुल 698 कालकोठरी बनी हुई थी| हर कालकोठरी 15×8 फीट की है|
  • कालापानी की सज़ा ज़्यादातर उन लोगों को दी जाती थी जो स्वतंत्रता सैनानी थे| इनमें डॉ. दीवन सिंह,मौलाना फजल-ए-हक खैराबादी, योगेंद्र शुक्ला, बटुकेश्वर दत्त, मौलाना अहमदउल्ला, मौवली अब्दुल रहीम सादिकपुरी, बाबूराव सावरकर, विनायक दामोदर सावरकर, भाई परमानंद, शदन चंद्र चटर्जी, सोहन सिंह, वमन राव जोशी, नंद गोपाल जैसे बड़े नाम शामिल हैं|
  • इसी जेल में 1930 में भगत सिंह के सहयोगी महावीर सिंह ने अत्याचार के खिलाफ भूख हड़ताल की थी, जिसके बाद जेल के अधिकारियों ने उन्हें जबरदस्ती दूध पिला दिया था और दूध पीते ही उनकी मौत हो गयी थी| उनकी मौत के बाद उन्हें पत्थर से बांधकर समुंद्र में फेंक दिया था|
  • साल 1942 में जापानी शासकों ने अंडमान पर अपना कब्ज़ा जमा लिया था और 7 में से 2 शाखाओं को जापानियों ने पूरी तरह खत्म कर दिया था|
  • दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होते ही साल 1945 में फिर अंग्रेजों ने यहां कब्ज़ा जमाना शुरू किया|

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आज़ादी के बाद क्या हुआ? – kala pani story after independence – Kala pani ki saza kya hoti hai

  • भारत के आज़ाद होते ही बची हुई तीन शाखाओं को ध्वस्त (Destroyed) कर दिया गया था|
  • साल 1969 में इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर दिया गया|
  • वर्तमान में यह 500 बिस्तरों वाला अस्पताल है और जहां 40 डॉक्टर हमेशा रहते हैं|
  • 10 मार्च 2006 को सेल्युलर जेल का शताब्दी वर्ष समारोह मनाया गया था जिसमे यहाँ पर सज़ा काटने वाले क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी गयी थी।
  • अब यह जगह पर्यटकों के घूमने के लिए है|
  • यहाँ लाइट एंड साउंड शो के ज़रिये भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास दिखाया जाता है|

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