Kalyan Vrishti Stotra In Hindi – जीवन में चाहते हैं सुख व समृद्धि तो करें कल्याण वृष्टि स्तोत्र का पाठ

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Kalyan Vrishti Stotra In Hindi – Kalyan vrishti stotra with hindi meaning – Kalyan Vrishti Stotra lyrics In Hindi – हिंदू धर्म में पूजा पाठ के साथ मंत्र, जाप और स्त्रोतों का विशेष महत्व माना जाता है। इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि अगर आप अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं तो रोज़ाना नियम से आप कल्याण वृष्टि स्त्रोत का पाठ करें । कल्याण वृष्टि स्तोत्र या षोडशी कल्याण स्तोत्र की रचना भगवान शंकराचार्य द्वारा की गयी है। षोडशी श्रीविद्या के मूलमंत्र के प्रत्येक अक्षर पर आधारित इस स्तोत्र में सोलह श्लोक लिखे गए हैं जो भी व्यक्ति इसका प्रतिदिन पाठ करेगा, उसके जीवन में कल्याण की कामना पूरी होगी।Kalyan Vrishti Stotra In Hindi

Kalyan Vrishti Stotra In HindiKalyan vrishti stotra with hindi meaning

कल्याण वृष्टि स्तोत्र या षोडशी कल्याण स्तोत्र का पाठ करने से माता रानी की कृपा बरसती है। इस स्त्रोत के पाठ से जीवन की तमाम परेशानियां दूर हो जाती हैं। सुख व समृद्धि का आगमन होता है इसलिए यदि आप भी दुर्गा मां के असीम भक्त हैं और आप भी अपने जीवन को समस्त कष्टों से मुक्ति व स्वयं को सुख व समृद्ध करना चाहते हैं तो कल्याण वृष्टि स्तोत्र का पाठ आपके लिए लाभदायक है।

Kalyan Vrishti Stotra In HindiKalyan vrishti stotra with hindi meaning

कल्याण वृष्टि स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित  

॥ कल्याण वृष्टि स्तोत्र ॥

कल्याणवृष्टिभिरिवामृतपूरिताभि –

र्लक्ष्मीस्वयंवरणमङ्गलदीपिकाभिः ।

सेवाभिरम्ब तव पादसरोजमूले

नाकारि किं मनसि भक्तिमतां जनानाम् ॥1॥

अर्थ – अम्ब ! अमृत से परिपूर्ण कल्याण की वर्षा करने वाली एवं लक्ष्मी को स्वयं वरण करने वाली मंगलमयी दीपमाला की भाँति आपकी सेवाओं ने आपके चरण कमलों में भक्ति भाव रखने वाले मनुष्यों के मन में क्या कर दिया, अर्थात उनके समस्त मनोरथों को पूर्ण कर दिया।

Kalyan Vrishti Stotra In Hindi

एतावदेव जननि स्पृहणीयमास्ते

त्वद्वन्दनेषु सलिलस्थगिते च नेत्रे ।

सांनिध्यमुद्यदरूणायतसोदरस्य

त्वद्विग्रहस्य सुधया परयाप्लुतस्य ॥2॥

अर्थ – जननी ! मेरी तो बस यही स्पृहा है कि परमोत्कृष्ट सुधा से परिप्लुत तथा उदीयमान अरुणवर्ण सूर्य की समता करने वाले आपके अरुण श्रीविग्रह के संनिकट पहुँचकर आपकी वन्दनाओं के समय मेरे नेत्र अश्रुजल से परिपूर्ण हो जायें।

ईशित्वभावकलुषाः कति नाम सन्ति

ब्रह्मादयः प्रतियुगं प्रलयाभिभूताः ।

एकः स एव जननि स्थिरसिद्धिरास्ते

यः पादयोस्तव सकृत् प्रणतिं करोति ॥3॥

अर्थ – माँ ! प्रभुत्वभाव से कलुषित ब्रह्मा आदि कितने देवता हो चुके हैं जो प्रत्येक युग में प्रलय से विनष्ट हो गये हैं, किंतु एक वही व्यक्ति स्थिर सिद्धियुक्त विद्यमान रहता है, जो एक बार आपके चरणों में प्रणाम कर लेता है।

Kalyan Vrishti Stotra In Hindi

लब्ध्वा सकृत् त्रिपुरसुन्दरि तावकीनं

कारुण्यकन्दलितकान्तिभरं कटाक्षम् ।

कन्दर्पभावसुभगास्त्वयि भक्तिभाजः

सम्मोहयन्ति तरुणीर्भुवनत्रयेषु ॥4॥

अर्थ – त्रिपुरसुन्दरी ! आप में भक्तिभाव रखने वाले भक्तजन एक बार भी आपके करुणा से अंकुरित सुशोभन कटाक्ष को पाकर कामदेव सदृश सौन्दर्यशाली हो जाते हैं और त्रिभुवन में युवतियों को सम्मोहित कर लेते हैं।

Kalyan Vrishti Stotra In Hindi

ह्रींकारमेव तव नाम गृणन्ति वेदा

मातस्त्रिकोणनिलये त्रिपुरे त्रिनेत्रे ।

यत्संस्मृतौ यमभटादिभयं विहाय

दीव्यन्ति नन्दनवने सह लोकपालैः ॥5॥

अर्थ – त्रिकोण में निवास करने वाली एवं तीन नेत्रों से सुशोभित माता त्रिपुरसुन्दरि ! वेद ‘ ह्रीं ‘ कार को ही आपका नाम बताते हैं। वह नाम जिनके संस्मरण में आ गया, वे भक्तजन यमदूतों के भय को त्यागकर लोकपालों के साथ नन्दनवन में क्रीडा करते हैं।

Kalyan Vrishti Stotra In Hindi

हन्तुः पुरामधिगलं परिपूर्यमाणः

क्रूरः कथं नु भविता गरलस्य वेगः ।

आश्वासनाय किल मातरिदं तवार्धं

देहस्य शश्वदमृताप्लुतशीतलस्य ॥6॥

अर्थ – माता ! निरन्तर अमृत से परिप्लुत होने के कारण शीतल बने हुए आपके शरीर का यह अर्धभाग जिनके साथ संलग्न था, उन त्रिपुरहन्ता शंकरजी के गले में भरा हुआ हलाहल विष का वेग उनके लिये अनिष्टकारक कैसे होता ?

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Kalyan Vrishti Stotra In Hindi

सर्वज्ञतां सदसि वाक्पटुतां प्रसूते

देवि त्वदङ्घ्रिसरसीरुहयोः प्रणामः ।

किं च स्फुरन्मुकुटमुज्ज्वलमातपत्रं

द्वे चामरे च वसुधां महतीं ददाति ॥7॥

अर्थ – देवि ! आपके चरण कमलों में किया हुआ प्रणाम सर्वज्ञता और सभा में वाक् चातुर्य तो उत्पन्न करता ही है, साथ ही उद्भासित मुकुट, श्वेत छत्र, दो चामर और विशाल पृथ्वी का साम्राज्य भी प्रदान करता है।

कल्पद्रुमैरभिमतप्रतिपादनेषु

कारुण्यवारिधिभिरम्ब भवत्कटाक्षैः ।

आलोकय त्रिपुरसुन्दरि मामनाथं

त्वय्येव भक्तिभरितं त्वयि दत्तदृष्टिम् ॥8॥

अर्थ – माँ त्रिपुरसुन्दरि ! मैं आपकी ही भक्ति से परिपूर्ण हूँ और आपकी ओर ही दृष्टि लगाये हुए हूँ, अतः आप मुझ अनाथ की ओर मनोरथों को पूर्ण करने में कल्पवृक्ष सदृश एवं करुणासागर स्वरुप अपने कटाक्षों से देख तो लें।

Kalyan Vrishti Stotra In Hindi

हन्तेतरेष्वपि मनांसि निधाय चान्ये

भक्तिं वहन्ति किल पामरदैवतेषु ।

त्वामेव देवि मनसा वचसा स्मरामि

त्वामेव नौमि शरणं जगति त्वमेव ॥9॥

अर्थ – देवि ! खेद है कि अन्यान्य जन आपके अतिरिक्त अन्य साधारण देवताओं में भी मन लगाकर उनकी भक्ति करते हैं, किंतु मैं मन और वचन से आपका ही स्मरण करता हूँ, आपको ही प्रणाम करता हूँ, क्योंकि जगत में आप ही शरणदात्री हैं।

लक्ष्येषु सत्स्वपि तवाक्षिविलोकनाना –

मालोकय त्रिपुरसुन्दरि मां कथंचित् ।

नूनं मयापि सदृशं करूणैकपात्रं

जातो जनिष्यति जनो न च जायते च ॥10॥

अर्थ – त्रिपुरसुन्दरि ! यद्यपि आपके नेत्रों के लिये देखने के बहुत से लक्ष्य वर्तमान हैं, तथापि किसी प्रकार आप मेरी ओर दृष्टि डाल दें, क्योंकि निश्चय ही मेरे समान करुणा का पात्र न कोई पैदा हुआ है, न हो रहा है और न पैदा होगा।

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Kalyan Vrishti Stotra In Hindi

ह्रीं ह्रीमिति प्रतिदिनं जपतां जनानां

किं नाम दुर्लभमिह त्रिपुराधिवासे ।

मालाकिरीटमदवारणमाननीयां –

स्तान् सेवते मधुमती स्वयमेव लक्ष्मीः ॥11॥

अर्थ – त्रिपुर में निवास करनेवाली माँ ! ‘ ह्रीं, ह्रीं ‘ – इस प्रकार आपके बीजमन्त्र का प्रतिदिन जप करनेवाले मनुष्यों के लिये इस जगत में क्या दुर्लभ है ? माला, किरीट और उन्मत्त गजराज से युक्त उन माननीयों की तो स्वयं मधुमती लक्ष्मी ही सेवा करती हैं।

सम्पत्कराणि सकलेन्द्रियनन्दनानि

साम्राज्यदानकुशलानि सरोरुहाक्षि ।

त्वद्वन्दनानि दुरितौघहरोद्यतानि

मामेव मातरनिशं कलयन्तु नान्यम् ॥12॥

अर्थ – कमलनयनि ! आपकी वन्दनाएँ सम्पत्ति प्रदान करनेवाली, समस्त इन्द्रियों को आनन्दित करनेवाली, साम्राज्य प्रदान करने में कुशल और पाप समूह को नष्ट करने में उद्यत रहनेवाली हैं, माता ! वे निरन्तर मुझे ही प्राप्त हों, दूसरे को नहीं।

Kalyan Vrishti Stotra In Hindi

कल्पोपसंहरणकल्पितताण्डवस्य

देवस्य खण्डपरशोः परमेश्वरस्य ।

पाशाङ्कुशैक्षवशरासनपुष्पबाणा

सा साक्षिणी विजयते तव मूर्तिरेका ॥13॥

अर्थ – कल्प के उपसंहार के समय ताण्डव नृत्य करने वाले खण्डपरशु देवाधिदेव परमेश्वर शंकर के लिये पाश, अंकुश, ईख का धनुष और पुष्पबाण को धारण करनेवाली आपकी वह एकमात्र मूर्ति साक्षीरूप से सुशोभित होती है।

लग्नं सदा भवतु मातरिदं तवार्धं

तेजः परं बहुलकुङ्कुमपङ्कशोणम् ।

भास्वत्किरीटममृतांशुकलावतंसं

मध्ये त्रिकोणमुदितं परमामृतार्द्रम् ॥14॥

अर्थ – माता ! आपका यह अर्धांग जो परम तेजोमय, अत्यधिक कुंकुम पंक से युक्त होने के कारण अरुण, चमकदार किरीट से सुशोभित, चन्द्रकला से विभूषित, अमृत से परमार्द्र और त्रिकोण के मध्य में प्रकट है, सदा शिवजी से संलग्न रहे।

Kalyan Vrishti Stotra In Hindi

ह्रींकारमेव तव धाम तदेव रूपं

त्वन्नाम सुन्दरि सरोजनिवासमूले ।

त्वत्तेजसा परिणतं वियदादिभूतं

सौख्यं तनोति सरसीरुहसम्भवादेः ॥15॥

अर्थ – कमल पर निवास करनेवाली सुन्दरि ! ‘ ह्रीं ‘ कार ही आपका धाम है, वही आपका रूप है, वही आपका नाम है और वही आपके तेज से उत्पन्न हुए आकाश आदि से क्रमशः परिणत – जगत का आदिकारण है, जो ब्रह्मा, विष्णु आदि की रचित – पालित वस्तु बनकर परम सुख देता है।

Kalyan Vrishti Stotra In Hindi

ह्रींकारत्रयसम्पुटेन महता मन्त्रेण संदीपितं

स्तोत्रं यः प्रतिवासरं तव पुरो मातर्जपेन्मन्त्रवित् ।

तस्य क्षोणिभुजो भवन्ति वशगा लक्ष्मीश्चिरस्थायिनी

वाणी निर्मलसूक्तिभारभरिता जागर्ति दीर्घं वयः ॥16॥

अर्थ – माता ! जो मन्त्रज्ञ तीन ‘ ह्रीं ‘ कार से सम्पुटित महान मन्त्र से संदीपित इस स्तोत्र का प्रतिदिन आपके समक्ष जप करता है, राजालोग उसके वशीभूत हो जाते हैं, उसकी लक्ष्मी चिरस्थायिनी हो जाती है, उसकी वाणी निर्मल सूक्तियों से परिपूर्ण हो जाती है और वह दीर्घायु हो जाता है।

॥ इस प्रकार श्रीमत् शंकराचार्य रचित कल्याण वृष्टि स्तोत्र सम्पूर्ण हुआ ॥

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