Kargil Vijay Diwas Poem in Hindi – यहां पढ़िए कारगिल विजय दिवस पर देशभक्ति कविताएं

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Kargil Vijay Diwas Poem in Hindi – Kargil Vijay divas Kavita in hindi – कारगिल युद्ध, जिसे कारगिल संघर्ष के रूप में भी जाना जाता है। साल 1999 के मई-जुलाई के बीच जम्मू और कश्मीर के कारगिल जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के साथ लड़ा गया था जिसमें भारत को जीत मिली थी इसलिए यह दिन कारगिल युद्ध के शहीद जवानों को समर्पित है। 3 मई 1999 को पाकिस्तान ने यह युद्ध तब शुरू किया जब उसने लगभग 5000 सैनिकों के साथ कारगिल के चट्टानी पहाड़ी क्षेत्र में घुसपैठ की और उस पर कब्ज़ा कर लिया। जब भारत सरकार को इसकी जानकारी मिली तो भारतीय सेना द्वारा घुसपैठियों को वापस खदेड़ने के लिए ‘ऑपरेशन विजय’ शुरू किया गया, जिन्होंने विश्वासघाती रूप से भारतीय क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया था। इस युद्ध में दुश्मन देश के खिलाफ लड़ने के लिए खड़े होने वाले हमारे देश के वीरो को हम सलाम करते हैं। उनके बलिदान से ही यह युद्ध विजय में परिवर्तित हो पाया। अतः आज कारगिल विजय दिवस पर संबंधित कुछ कविताएं हम अपने आर्टिकल के ज़रिए लेकर आए हैं जिन्हें पढ़कर आपको कारगिल विजय दिवस पर गर्व होगा।Kargil Vijay Diwas Poem in Hindi

Kargil Vijay Diwas Poem in Hindi – Kargil Vijay divas Kavita in Hindi

कारगिल विजय दिवस पर कविताएं….

1 – कविता
कारगिल की पर्वत चोटी दुश्मन था वहाँ ऊँचाई पर,
चोरी से घुस आया बुज़दिल था उतरा वह नीचाई पर,
वीरों ने धावा बोला और मार फेंका गहराई पर,
देश गर्व करता है अपने युवकों की तरुणाई पर,
वीर बांकुरों ने ललकारा पर्वत चोटी थी ठण्ड भरी,
था सुभाष सा जोश बुलंदी भगत सिंह सी खरी खरी वीर शिवा जी राणा प्रताप की याद में ऑंखें क्रोध भरी।
मार भगाया दुश्मन को भागी वो फौजें डरी डरी,
सन उन्नीस सौ निन्यानवे छब्बीस जुलाई विजय का दिन,
जोश भरा था वीरों में अवसर आया वह मन भावन,
कुर्बानी को याद किया भावों में डूब गया हर मन,
कारगिल विजय दिवस पर गर्वित आज भी होता है हर मन।

2 – कविता
हुआ देश आज़ाद तभी से , कश्मीर हमारे संग आया,
विभाजन से उपजे पाक को, उसका कृत्य नहीं भाया,
रंग बिरंगी घाटी कब से,पाक की नज़र समाई थी,
कश्मीर को नापाक करने, कसम उसी ने खाई थी,
वादी पाने की चाहत में, सैंतालीस से जतन किया,
तीन युद्ध में मुंह की खाई, फिर से वही प्रयास किया,
बार – बार वह मुँह की खाये, उसको शर्म न आनी थी,
छल प्रपंच करने की फितरत, उसकी बड़ी पुरानी थी,
दारा करे सीधे लड़ने में, अपनी किस्मत कोसा थाष
आतंकी के भेष में उसने, भष्मासुर को पोषा था,
हूर और जन्नत पाने को, आतंकी बन आते थे,
भारत की सेना के हाथों, काल ग्रास बन जाते थे,
जन्नत को दोज़ख बनने में, कोई कसर न छोड़ी थी,
मासूमों को हथियार थमा, बिषम बेल इक बोई थी,
तभी शांति की अभिलाषा ले, अटल कि बारी आई थी,
जाकर जब लाहौर उन्होंने, सद इच्छा दिखलाई थी,
भाईचारे की मिसाल दे, छद्म युद्ध को रोका था,
पाकिस्तानी सेना ने फिर, पीठ में छुरा भोंका था,
सन निन्यानबे मई माह, फिर से धावा बोला था,
चढ़ कर करगिल की चोटी पर, नया मोरचा खोला था,
भारत की जाबांज़ों ने तब, उस पर कठिन प्रहार किया,
बैठे गीदड़ भेड़ खाल में, उनका तब संहार किया,
एक से एक दुर्गम चोटी को, वापस छीन के’ लाए थे।
देश कि खातिर माताओं ने, अपने लाल गंवाए थे,
तीन महीने चले युद्ध में,फिर से मुंह की खाई थी,
मिस एडवेंचर के चक्कर में, जग में हुई हंसाई थी,
आज मनाकर विजय दिवस हम, उसको याद करायेंगे,
ऐसी गलती फिर मत करना, नानी याद दिलायेंगे।

Kargil Vijay Diwas Poem in Hindi – Kargil Vijay divas Kavita in hindi

3 – कविता
पाकिस्तानी सेना को किया परास्त
करो याद भारत के वीर जवानों को।
कारगिल की चोटी पर लहराया तिरंगा
उन देश भक्तों की कुर्बानी को।

दुश्मन के सैनिकों को मार गिराया
नाकामयाब किया उनकी चालों को।
श्रद्धा सुमन अर्पित उन साहसी
निडर भारत भूमि के लाडलों को।
बर्फ पर चलते दुश्मन को मार गिराते
रात जागते देश की रक्षा करने को।
आंधी हो तूफान हो या हो रेगिस्तान
याद करो उन वीरों की शहादत को।
देश के लोग सुकून से सोते रात भर
शत् शत् नमन ऐसे पहरेदारों को।
तब वह खाते अपने सीने पर गोलियां
भूलों नहीं ऐसे देश के रखवालों को।

4 – कविता
वीर जवानों की शहादत पर गूंज रहा था, सारा देश,
वही भगत सिंह थे, वही राजगुरु और वही थे सुखदेव,
भारत माता की आजादी की खातिर, धरे थे न जाने उन्होंने कितने ही भेष
लहूलुहान हुई जा रही थी भूमि अपनी और बादलों में छाई हुई थी लालिमा,
आज़ादी-आज़ादी के स्वरों से गूंज रहा था सारा जहाँ,
इन वीर शहीदों की कुर्बानी से आँखे सबकी भर आई थी,
जब देश के खातिर उन्होंने अपनी कीमती जान गंवाई थी,
वो कल भी थे वो आज भी है अस्तित्व उनका अमर रहेगा।

5 – कविता
अपने लहू से सिंचा है उन परवानों ने,
यूं ही नहीं ये वादियां जन्नत कहलाती हैं
आज भी खड़ी है रुह-ए-आशिक़ इन सरहदों पे,
आज़माना है किसी को अपना ज़ोर तो आए
पूछा खुदा ने काफी कत्ल किए हैं उस जहां ने,
बोला, आशिक-ए-वतन हूं गुनाहों की हर सज़ा मंजूर है
करके नम अपने चशम, बोले निज़ाम ए आलम,
ऐसे दलेर आशिक से पहली दफा पाला पड़ा है
बोला, खुदा कतार बहुत लंबी है अभी आने वालों की,
कमी नहीं है मेरे मुल्क में उसपर मर मिटने वालों की।

Kargil Vijay Diwas Poem in Hindi – Kargil Vijay divas Kavita in hindi

6 – कविता
करो याद भारत के वीर जवानों को।
कारगिल की चोटी पर लहराया तिरंगा
उन देश भक्तों की कुर्बानी को।
दुश्मन के सैनिकों को मार गिराया
नाकामयाब किया उनकी चालों को।
श्रद्धा सुमन अर्पित उन साहसी
निडर भारत भूमि के लाडलों को।
बर्फ पर चलते दुश्मन को मार गिराते
रात जागते देश की रक्षा करने को।
आंधी हो तूफान हो या हो रेगिस्तान
याद करो उन वीरों की शहादत को।
देश के लोग सुकून से सोते रात भर
शत् शत् नमन ऐसे पहरेदारों को।
तब वह खाते अपने सीने पर गोलियां
भूलों नहीं ऐसे देश के रखवालों को।

7 – कविता
प्राण दिये पर कर दी दुश्मन
की कोशिश नाकाम
ओ सीमा के सजग प्रहरियों
शत् शत् तुम्हें प्रणाम
दिया कारगिल युद्ध क्षेत्र में
जो तुमने बलिदान
युगों-युगों तक याद रखेगा
उसको हिन्दुस्तान
छक्के छुडा दिये दुश्मन के
जीना किया हराम
धन्य धन्य पितु मातु तुम्हारे
धन्य तुम्हारा गाँव
जिनकी गोदी में पले बढ़े
तुमसे ललना के पाँव
जब तक सूरज चाँद रहेगा
अमर रहेगा नाम
पड़ा भागना पाक फौज को
लेकर अपनी जान
सौ के ऊपर पड़ा हिन्द का
भारी एक जवान
अपने कर्मों का नवाज जी
भोग गये परिणाम।

Kargil Vijay Diwas Poem in Hindi

8 – कविता
पाकिस्तानी सेना को किया परास्त
करो याद भारत के वीर जवानों को।
कारगिल की चोटी पर लहराया तिरंगा
उन देश भक्तों की कुर्बानी को।
दुश्मन के सैनिकों को मार गिराया
नाकामयाब किया उनकी चालों को।
श्रद्धा सुमन अर्पित उन साहसी
निडर भारत भूमि के लाडलों को।
बर्फ पर चलते दुश्मन को मार गिराते
रात जागते देश की रक्षा करने को।
आंधी हो तूफान हो या हो रेगिस्तान
याद करो उन वीरों की शहादत को।
देश के लोग सुकून से सोते रात भर
शत् शत् नमन ऐसे पहरेदारों को।
तब वह खाते अपने सीने पर गोलियां
भूलों नहीं ऐसे देश के रखवालों को।

9 – कविता
उरूजे कामयाबी पर कभी हिन्दोस्ताँ होगा
रिहा सैयाद के हाथों से अपना आशियाँ होगा
चखाएँगे मज़ा बर्बादिए गुलशन का गुलचीं को
बहार आ जाएगी उस दम जब अपना बाग़बाँ होगा
ये आए दिन की छेड़ अच्छी नहीं ऐ ख़ंजरे क़ातिल
पता कब फ़ैसला उनके हमारे दरमियाँ होगा
जुदा मत हो मेरे पहलू से ऐ दर्दे वतन हरगिज़
न जाने बाद मुर्दन मैं कहाँ औ तू कहाँ होगा
वतन की आबरू का पास देखें कौन करता है
सुना है आज मक़तल में हमारा इम्तिहाँ होगा
शहीदों की चिताओं पर लगेगें हर बरस मेले
वतन पर मरनेवालों का यही बाक़ी निशाँ होगा
कभी वह दिन भी आएगा जब अपना राज देखेंगे
जब अपनी ही ज़मीं होगी और अपना आसमाँ होगा।

Kargil Vijay Diwas Poem in Hindi

10 – कविता
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंधप्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं देवों के सिर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक!
मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने, जिस पथ पर जावें वीर अनेक।

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