Kartik Purnima 2021 Shubh Muhurat and Puja Vidhi – जानें कब है कार्तिक पूर्णिमा और क्या है इसका महत्व

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Kartik purnima puja vidhi hindikartik purnima kab hai 2021 –  kartik purnima ka vrat kab hai – कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। पुराणों के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था, इस वजह से इसे कार्तिक त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से पूरे वर्ष स्नान करने का फल मिलता है। इसी दिन भगवान विष्णु ने प्रलय काल में वेदों की रक्षा के लिए तथा सृष्टि को बचाने के लिए मत्स्य अवतार धारण किया।

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kartik purnima puja vidhi hindi | कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि महत्व कथा – kartik purnima kab hai 2021

महत्व |  Kartik purnima mehtava – kartik purnima vrat vidhi in hindi

इस दिन गंगा स्नान, दीप दान और हवन करने से सभी पापों का नाश होता है। इसके साथ ही अन्न,धन एव वस्त्र का दान करने से लाभ मिलता है। ऐसी मान्यता है कि दान करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरूक्षेत्र और अयोध्या में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

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मुहूर्त | Shubh muhurat – Kartik purnima puja vidhi hindi – kartik purnima 2021 date – kartik purnima 2021 date and time

  • कार्तिक पूर्णिमा 19 नवम्बर, 2021
  • पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – 18 नवम्बर, 2021 को 12:00 पी एम बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त – 19 नवम्बर, 2021 को 02:26 पी एम बजे

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कथा | katha – kartik purnima katha in hindi – kartik purnima vrat katha – kartik purnima katha pdf in hindi 

पौराणिक कथा के अनुसार एक त्रिपुरासुर नामक राक्षस था। उसने अपने पापों से तीनों लोकों में हाहाकार मचा रखा था। वह इतना बलवान इसलिए था क्योंकि वो हर वक़्त ब्रह्मा जी की तपस्या में लगा रहता था। एक दिन सभी देवताओं ने उसके इस कठोर तप को तोड़ने का निर्णय लिया, जिसके लिए उन्होंने सुंदर अप्सराओं को उसकी तपस्या भंग करने भेजा। जब त्रिपुरासुर की तपस्या भंग नही हुई तो अंत में ब्रह्मा जी को विवश होकर उसे दर्शन देना पड़ा। इसके बाद ब्रह्मा जी ने उसे वरदान मांगने के लिए कहा। तब त्रिपुरासुर ने कहा प्रभु ऐसा वरदान दें कि कोई देवता या मनुष्य कभी मुझे मार न पाए। भगवान ने तथास्तु कह दिया जिसके बाद उसका आतंक और बढ़ गया| एक दिन उसने अहंकार के कारण कैलाश पर्वत पर ही आक्रमण कर दिया जिसके बाद भगवान शिव और त्रिपुरासुर के बीच में बहुत ही भयंकर युद्ध हुआ। यह युद्ध काफी लंबे समय तक चला। युद्ध के दौरान भगवान शिव ने ब्रह्मा जी और विष्णु की मदद से त्रिपुरासुर का अंत कर दिया।

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पूजा विधि | Kartik purnima puja vidhi hindi – kartik purnima puja kaise kare – kartik purnima vrat vidhi

  • कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा होती है |
  • इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने का विधान है |
  • इस दिन गंगा जी में स्नान करना चाहिए, जो लोग गंगा जी में स्नान नहीं कर सकते उन्हें नहाने के पानी में ही गंगा जल मिला कर स्नान करना चाहिए|
  • इसके बाद दक्षिण दिशा में भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा स्थापित करें।
  • उन्हें पुष्प चढ़ाएं, घी का दीपक जलाएं और दही का भोग लगाएं |
  • अब आरती करें और कार्तिकेय के मंत्र का जाप करें |
  • इस दिन सबको अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करना चाहिए |

मंत्र | mantra – Kartik purnima puja vidhi hindi  – kartik purnima puja mantra – kartik purnima vrat

‘देव सेनापते स्कंद कार्तिकेय भवोद्भव।
कुमार गुह गांगेय शक्तिहस्त नमोस्तु ते॥’

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