Kashi Vishwanath Mandir History in Hindi – जानिए, कैसे और कब हुआ काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण?

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Kashi Vishwanath Mandir History in Hindi – Kashi Vishwanath Temple History in Hindi – भारत की संस्कृति व आध्यात्मिक की चर्चा विश्व भर में फैली हुई है। भारत में एक से बढ़कर भव्य व प्राचीन मंदिर स्थापित हैं जिनकी भव्य कलात्मक सुंदरता देखने लायक है। इसमें से एक है काशी विश्वनाथ मंदिर। काशी विश्वनाथ मंदिर भारत की भूमि पर स्थित प्राचीन तथा आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में विख्यात है। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर कई हज़ारों साल पुराना मंदिर है। यह वाराणसी की धरोहर पर स्थित प्राचीन तथा विशिष्ट स्थान है। काशी विश्वनाथ मंदिर एक ऐसा मंदिर है जो कई बार तोड़ा गया और बनवाया गया। आज के समय में भी कई लोग ऐसे हैं जो भारत के प्राचीन व सांस्कृतिक विरासत पर प्रश्न चिह्न लगाए रहते हैं। इसी के साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास और इसके अस्तित्व के विषय से भी कई लोग अनभिज्ञ हैं, लेकिन आज हम आपको अपने लेख के माध्यम से काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास के विषय में संपूर्ण जानकारी प्रदान करने वाले हैं।Kashi Vishwanath Mandir History in Hindi

Kashi Vishwanath Mandir History in Hindi

वाराणसी है शिव की नगरी….

काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक, नौवां स्थान प्राप्त करता है। स्कंद पुराण में वर्णित एक कथा के मुताबिक यह पवित्र मंदिर स्थल भगवान शिव और माता पार्वती का आदिस्थान रहा है जिसके चलते आदिलिंग के रूप में अविमुक्तेश्वर को ही प्रथम लिंग माना गया है, इसका उल्लेख महाभारत और उपनिषद में भी किया गया है। यह भी कहा जाता है कि काशी, वाराणसी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिका हुआ है। गंगा माता, वरुणा और अस्सी घाट के संगम से भगवान शिव के इस पावन नगरी का निर्माण हुआ। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यहां लगभग 30 करोड़ देवी देवताओं का वास है। यूं तो भारत में तथा वाराणसी शहर में अनेको मंदिर, घाट और पर्यटन स्थल हैं लेकिन काशी विश्वनाथ मंदिर  का एक अलग ही महत्व है। हिंदू धार्मिक पुराणों के मुताबिक, काशी को मोक्षदायिनी और शिव द्वारा रचित नगरी बताया गया है। इस दिव्य नगरी का उल्लेख स्कंद पुराण, शिव पुराण, महाभारत और ऋग्वेद जैसे वेदो में भी प्राप्त होता है। पुराणों के अनुसार शिव ने इस नदी की स्थापना 5000 साल पहले की थी और यहां भगवान शिव अनंत काल से विराजमान हैं।

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काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण….

भारत के प्राचीन व हिंदू धार्मिक का प्रमुख स्थल काशी विश्वनाथ गंगा नदी के पश्चिमी तट पर वाराणसी शहर में स्थित है। मान्यताओं के अनुसार गए शिव और माता पार्वती का आदिस्थल है। वाराणसी के इस अद्भुत काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण इतिहासकारों के मुताबिक 11वीं सदी में राजा विक्रमादित्य द्वारा करवाया गया था। इसके अतिरिक्त काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण 1780 ईसवी में माना गया है। पुराणों व वेदों के मुताबिक तो काशी विश्वनाथ मंदिर की मौजूदगी आदिकाल से मानी गई है लेकिन कुछ प्रसिद्ध इतिहासकारों की मानें तो वह काशी विश्वनाथ मंदिर के निर्माण के विषय में यह कहते हैं कि इस मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्याबाई होलकर द्वारा करवाया गया। इसके पश्चात महाराजा रणजीत सिंह द्वारा सन् 1853 में काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार माना गया है। प्रसिद्ध इतिहासकारों द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि महाराजा रणजीत सिंह के कार्यकाल के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर के निर्माण में लगभग 1000 किलो शुद्ध सोने का इस्तेमाल किया गया था।

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काशी विश्वनाथ मंदिर पर आक्रमण…

काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार 11 वीं सदी के आसपास माना जाता है लेकिन इस मंदिर के जीर्णोद्धार के मात्र 94 वर्ष बाद ही सन 1194 में मोहम्मद गोरी ने भारत पर आक्रमण किया था और हिंदुओं के तमाम धार्मिक स्थलों को क्षति पहुंचाई थी जिनमें से एक काशी विश्वनाथ मंदिर पर था। इसके बाद सन् 1194 में भारत में आने वाले मोहम्मद गोरी ने काशी विश्वनाथ मंदिर पर आक्रमण करके इसे फिर गिरवा दिया था। यह भी बताया जाता है कि मोहम्मद गौरी के आक्रमण के पश्चात जब काशी विश्वनाथ मंदिर ध्वस्त हुआ तब उसके बाद एक बार फिर से वाराणसी के इस प्राचीन मंदिर का निर्माण कराया गया था लेकिन लगभग सन् 1447 में इसे एक बार फिर से महमूद शाह ने तुड़वा दिया जो उस समय जौनपुर का सुल्तान था। दोबारा क्षति पहुंचाए जाने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर को टोडरमल की सहायता से पंडित नारायण भट्ट ने दोबारा निर्माण कराया।

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शाहजहां का उद्देश्य भी था काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ना…

प्रसिद्ध इतिहासकारों के अनुसार लगभग 1632 ईसवी में जब भारत पर मुगल साम्राज्य का स्थापत्य हुआ था। तब उस समय शाहजहां के नेतृत्व में सैनिकों की एक टुकड़ी सिर्फ काशी विश्वनाथ को तोड़ने के लिए भेजी गई। शाहजहां का पूरा उद्देश्य काशी विश्वनाथ को तोड़ना था जिसके लिए उसने भारी सेना को भेजा लेकिन उस वक्त हिंदुओं के प्रतिरोध को देखते हुए वह अपने उद्देश्य में कामयाब नहीं हो सके। शाहजहां के सैनिकों ने मौका पाकर भारत में हिंदुओं के अन्य 63 मंदिरों पर आक्रमण करके तोड़ दिया। शाहजहां के पुत्र औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ को तोड़ने का फैसला ले लिया जिसके फलस्वरूप औरंगजेब के कार्यकाल में एक बार फिर से काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ने के लिए सैनिकों की टुकड़ी भेजी गई।  18 अप्रैल 1669 ईसवी में औरंगजेब द्वारा यह फरमान जारी किया गया कि काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ दिया जाए और वहां मौजूद ब्राह्मणों को मुसलमान बना दिया जाए। उस वक्त औरंगजेब द्वारा जारी किया गया यह फरमान आज भी कोलकाता के एशियाटिक लाइब्रेरी में सुरक्षित रखा गया है। फिलहाल औरंगजेब के आदेश पर उसकी सेना ने काशी विश्वनाथ को तोड़ा और उस जगह पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया। इस प्रकार 11 वीं सदी से लेकर 15 वीं सदी तक काशी विश्वनाथ मंदिर को कई बार तोड़ा और बनाया गया। इसके बाद भी 1752 से लेकर 1780 के बीच विभिन्न मराठा हिंदुओं ने काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए विभिन्न प्रयास किए लेकिन उस समय भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी का पूर्ण अधिकार हो गया था जिसके चलते मंदिर का  जीर्णोद्धार कर पाना बेहद मुश्किल हो गया।

Kashi Vishwanath Mandir History in Hindi

250 साल बाद पहली बार मंदिर का हुआ जीर्णोद्धार……

वर्तमान काशी विश्वनाथ धाम लगभग 5000000 स्क्वायर फीट में फैला हुआ है। वर्तमान प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी की द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर में कॉरिडोर प्रोजेक्ट का शिलान्यास 8 मार्च 2019 को किया गया था। प्रधानमंत्री की यह है उसने 2019 में शुरू की गई और अब इसका कार्य पूरा भी हो गया है। मंदिर का यह नवनिर्मित कॉरिडोर दो भागों में बांटा गया है,इन दोनों कॉरिडोर भागों में चार गेट लगे हुए हैं जो कि मंदिर की परिक्रमा करने के लिए स्थान भी छोड़ते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर भी आदि शंकराचार्य, अन्नपूर्णा और काशी विश्वनाथ की स्थिति और अन्य जानकारियों के लिए 22 शिलालेख जो कि संगमरमर के हैं बनाए गए हैं। मंदिर के नवनिर्मित कॉरिडोर की लागत 900 करोड़ रूपए आई थी । 31 दिसंबर 2021 में भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा मंदिर के पहले चरण का लोकार्पण किया गया था।

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