जानिए शनिदेव के उस मंदिर के बारे में, जहां श्री कृष्ण ने कोयल बनकर दिए थे दर्शन

Please follow and like us:

kokilavan shani dev mandir ka itihas –  history  of  Shani Dham Kokilavan – Story of Shani Dham Kokilavan – हमारे भारत में शनि देवता के कई सारे प्रसिद्ध मंदिर हैं, जो अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए जाने जाते हैं। एक ऐसा ही मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा शहर के कोसीकलां में स्थित है जिसे कोकिलावन के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर का संबंध भगवान श्री कृष्ण से है, इसलिए इसे सिद्धि प्राप्त मंदिर की श्रेणी में रखा गया है। यह शनि महाराज के अति प्राचीन मंदिरों में से एक है। इसके आसपास नंदगांव, बरसाना और बांके बिहारी मंदिर मौजूद हैं। शनि देव का यह मंदिर करीब 20 एकड़ में बना है जिसके जीर्णोधार का श्रेय आज से करीब साढ़े तीन सौ वर्ष पूर्व राजस्थान के एक महाराज भरतपुर को दिया जाता है। इसके अलावा कोकिलाधाम में श्री गोकुलेश्वर महादेव मंदिर, श्री गिरिराज मंदिर, श्री बाबा बनखंडी मंदिर, श्री देव बिहारी का मंदिर आदि भी स्थित हैं। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से कोकिलावन मंदिर के इतिहास से परिचित कराने वाले हैं।kokilavan shani dev mandir ka itihas

kokilavan shani dev mandir ka itihas 

कोकिलावन का प्राचीन इतिहास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,  द्वापरयुग में जब भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था, तब भगवान श्री कृष्ण की माता यशोदा ने सूर्य पुत्र शनि देव को अपने पुत्र श्री कृष्ण के दर्शन करने नहीं दिए थे। उनको भय था कि कहीं शनि महाराज की वक्र दृष्टि उनके पुत्र पर ना पड़ जाए जिसके बाद शनि महाराज ने भगवान श्री कृष्ण की घोर तपस्या की थी। तब भगवान श्री कृष्ण ने प्रसन्न होकर शनि महाराज को कोयल रूप में अपने दर्शन दिए थे और तभी से यह मंदिर कोकिलावन के नाम से जाना गया। इसके  साथ ही भगवान श्री कृष्ण ने शनि देव को यह आशीर्वाद दिया था कि जो व्यक्ति नंदगांव के समीप कोकिलावन में शनिदेव की पूजा और वन की परिक्रमा करेगा, उसे मेरी और शनि महाराज दोनों की विशेष कृपा प्राप्त होगी।

Must Read:शनि भक्तों की पहली पसंद हैं ये 5 शनिधाम, यहां आकर मिलती है शांति

 kokilavan shani dev mandir ka itihas

इसके अलावा भगवान श्री कृष्ण को ब्रज भूमि काफी प्रिय भी थी जिसको पवित्र और सुरक्षित रखने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने शनि महाराज को ही सबसे शक्तिशाली रक्षक चुना था। कहते हैं तभी से इस मंदिर को धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना गया है। यहां वन की परिक्रमा और शनि महाराज के दर्शन के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं। उसके बाद शनि महाराज की विधि विधान से पूजा अर्चना करके सवा कोसीय परिक्रमा करते हैं। फिर विशाल सूर्य कुंड में स्नान करके शनि देव की प्रतिमा पर तेल आदि चढ़ाते हैं। कोकिलावन में अक्सर शनिवार के दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, जहां भक्तगण अपनी मुराद लेकर शनि महाराज के मंदिर आते हैं और उनका आशीर्वाद पाते हैं।

Must Read: शनिवार को इन चीज़ों का दान करने से शनि देव होंगे प्रसन्न, लेकिन भूलकर भी न करें ये दान

kokilavan shani dev mandir ka itihas – kokilavan shani dev ka mandir

मान्यता है कि जो भी भक्त शनि महाराज के इस मंदिर में आकर तेल चढ़ाता है और वन की परिक्रमा करता है, वह शनि महाराज के प्रकोप से सदैव के लिए छुटकारा पा लेता है। शनि देव की कृपा से भक्तों के जीवन के सारे कष्ट भी दूर हो जाते हैं और शनि की वक्र दृष्टि भी उनपर नहीं पड़ती है। इस प्रकार, कोकिलावन के इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है जिसका उल्लेख हिंदुओं के प्रसिद्ध गरुड़ और नारद पुराण में भी मिलता है।

Must Read:भारत के इन प्रसिद्ध मंदिरों में पैर रखते ही दूर हो जाती हैं सारी बीमारियां 

kokilavan shani dev mandir ka itihasजैसी और भी रोचक जानकारी के लिए हमारे फेसबुकट्विटर और इंस्टाग्राम पर हमें फ़ॉलो करें और हमारे वीडियो के बेस्ट कलेक्शन को देखने के लिए, YouTube पर हमें फॉलो करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

The content and images used on this site are copyright protected and copyrights vests with their respective owners. We make every effort to link back to original content whenever possible. If you own rights to any of the images, and do not wish them to appear here, please contact us and they will be promptly removed. Usage of content and images on this website is intended to promote our works and no endorsement of the artist shall be implied. Read more detailed ​​disclaimer
Copyright © 2022 Tentaran.com. All rights reserved.
× How can I help you?