Kumbh Mela 2019: जानिए कुंभ मेले की खासियत और उससे जुड़ी रोचक बातें

Kumbh Mela 2019 – कुंभ मेला दुनियाभर के भक्तों के लिए सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। कुंभ में अभी तक 13 अखाड़े थे, लेकिन इस बार एक और अखाड़ा शामिल हो गया है। प्रयागराज में ये मेला 15 जनवरी से 4 मार्च तक चलेगा। तो चलिए जानते हैं कुंभ मेले से जुड़ी कुछ रोचक बातें

Kumbh Mela 2019

  • कुंभ मेले का आयोजन प्राचीन काल से हो रहा है। इसका आयोजन हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन में होता है।
  • ऐसा माना जाता है कि देवता-असुर जब अमृत कलश को एक दूसरे से छीन रहे थे, तभी उसकी कुछ बूंदें धरती की तीन नदियों गंगा, गोदावरी और क्षिप्रा नदी में जा गिरीं। ये बूंदें जहां-जहां गिरीं, वहीं पर कुंभ का आयोजन होता है।
  • इन चार स्थानों पर प्रत्येक 3 वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ का आयोजन होता है। किसी एक स्थान पर प्रत्येक 12 वर्ष बाद ही कुंभ का आयोजन होता है।

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  • कुंभ मेला मकर संक्रांति के दिन से शुरु होता है, जब सूर्य और चन्द्रमा वृश्चिक राशि में और बृहस्पति मेष राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति के होने वाले इस योग को कुम्भ स्नान-योग कहते हैं।Kumbh Mela 2019
  • इस दिन को बहुत शुभ माना गया है, क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि इस दिन पृथ्वी से उच्च लोकों के द्वार खुलते हैं।
  • इस दिन स्नान करने से आत्मा को उच्च लोकों और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहाँ स्नान करना स्वर्ग के दर्शन करना जैसा माना जाता है।
  • कुंभ का प्रमुख आकर्षण साधु-संतों के 13 अखाड़े होते हैं। शंकराचार्य ने आठवीं सदी में 13 अखाड़े बनाए थे। तब से वही अखाड़े बने हुए हैं। लेकिन इस बार एक और अखाड़ा जुड़ गया, जिसके कारण इस बार कुंभ में 14 अखाड़ों की पेशवाई देखने को मिली।
  • इन 13 अखाड़ों को तीन भागों में बांटा गया हैं। शैव संन्यासी संप्रदाय, बैरागी वैष्णव संप्रदाय और उदासीन संप्रदाय का अखाड़ा।
  • अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों की मौजूदगी में शाही स्नान की तारीख तय की जाती है।
  • कुंभ की प्रमुख तिथियों के दिन इन अखाड़ों के साधु-संत पूरे धूम- धाम के साथ शाही स्नान करने निकलते हैं।
  • इस शाही स्नान के लिए प्रशासन अखाड़ों से संगम तट तक संतों के लिए विशेष तैयारियां करता है, जिस पर सिर्फ अखाड़े ही चल सकते हैं।

Kumbh Mela 2019

  • साधु संन्यासियों द्वारा कुंभ का पहला स्नान किया जाता है, जिसे शाही स्नान कहते हैं।
  • साधु संन्यासियों के स्नान करने के बाद आम लोगों को स्नान करने की अनुमति दी जाती है। ये शाही स्नान सुबह 3 बजे से शुरू होता है।
  • प्रयागराज में कुंभ का एक अलग महत्व है। कहा जाता है कि प्रयागराज में जहां पर कुंभ मेले का आयोजन होता है, वहीं ब्रह्माण्ड का उद्गम हुआ था और वहीं पर पृथ्वी का केंद्र भी है। 

 

Kumbh Mela 2019

 

  • मान्यता के अनुसार ब्रह्माण्ड बनाने से पहले ब्रम्हाजी ने इसी स्थान पर अश्वमेघ यज्ञ किया था। इस यज्ञ के सबूत के तौर पर दश्वमेघ घाट और ब्रम्हेश्वर मंदिर यहां मौजूद हैं। यही कारण है जिसके चलते प्रयाग का कुंभ इतना प्रसिद्ध है।
  • कहते हैं शाही स्नान के शुभ मुहूर्त पर डुबकी लगाने से अमर होने का वरदान मिलता है। यही कारण है कि कुंभ के शाही स्नान के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा होता है।
  • धार्मिक मान्यता है कि महाकुंभ जब पृथ्वी पर लगता है, तो उस समय देवलोक में भी कुंभ आयोजित किया जाता है। यह एक मात्र अवसर होता है जब स्वर्ग और पृथ्वी दोनों स्थानों पर कुंभ लगता है।
  • कुंभ मेले का शुभारंभ कब हुआ और किसने किया इतिहास के आधुनिक ग्रंथों में इसकी कोई प्रामाणिक जानकारी नहीं है। इसका लिखित प्राचीनतम वर्णन सम्राट हर्षवर्धन के समय का है, जिसका ज़िक्र चीन के प्रसिद्ध तीर्थयात्री ह्वेनसांग द्वारा उनकी किताब में किया गया है।
  • यूनेस्को ने कुंभ मेले को भारत की सांस्कृतिक विरासत के रुप में मान्यता दी है।
  • कुंभ मेला 14 जनवरी मकर संक्रांति से शुरू होकर शिवरात्रि पर खत्म होता है।

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