Mahakaleshwar Temple Ujjain History: जानिए महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में

Please follow and like us:

Mahakaleshwar temple ujjain history in Hindi – सृष्टि के रचयिता व मोक्ष के देवता कहे जाने वाले भगवान शंकर की आराधना करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि सावन के महीने में भोले बाबा को मनाने से व्यक्ति के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, आज के समय में संपूर्ण विश्व के विभिन्न राज्यों में शिवजी के 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं। ज्योतिर्लिंग वे स्थान होते हैं, जहां शंकर भगवान खुद स्थापित हुए थे। प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की स्थापना के पीछे कई सारे रहस्य छिपे हुए हैं। वेद-पुराणों की मानें तो सभी ज्योतिर्लिंगों की अपनी-अपनी मान्यता है। आज हम आपको इन्हीं 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सुप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना व उससे जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में बताने वाले हैं। आइए जानते हैं कि उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर की उत्पत्ति कब और कैसे हुई?

mahakaleshwar temple ujjain history in hindi

Mahakaleshwar temple ujjain history in hindiमहाकालेश्वर मंदिर का इतिहास – Ujjain Mandir ke nirman ki kahani 

महाकालेश्वर मंदिर का इतिहास – Ujjain Mandir ke nirman ki kahani 

  • मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में भी इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है।
  • स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है। मान्यता है कि इसके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। उज्जैन, मां शिप्रा के तट पर बसा हुआ होने के कारण अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है।
  • इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के पालन करता नंद जी की 8 पीढ़ी पूर्व हुई थी।

Must Read:ये मंदिर सदियों बाद भी है अधूरा, मंदिर में है विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग

राक्षस के वध से जुड़ी एक धार्मिक कथा –  Mahakaleshwar Jyotirlinga interesting facts in hindi

  • धार्मिक कथाओं में कहा गया है कि अवंतिका यानी उज्जैन भगवान शिव को बहुत पसंद है। उज्जैन में शिव जी के कई प्रिय भक्त रहते थे। एक समय की बात है जब अवंतिका नगरी में एक ब्राह्मण परिवार रहा करता था। उस ब्राह्मण के चार पुत्र थे। दूषण नाम का राक्षस ने अवंतिका नगरी में आतंक मचा रखा था। वह राक्षस उज्जैन के सभी वासियों को परेशान करने लगा था। राक्षस के आतंक से बचने के लिए उस ब्राह्मण ने भगवान शिव की अर्चना की।
  • ब्राह्मण की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव धरती फाड़ कर महाकाल के रूप में प्रकट हुए और उस राक्षस का वध करके उज्जैन की रक्षा की। उज्जैन के सभी भक्तों ने भगवान शिव से उसी स्थान पर हमेशा रहने की प्रार्थना की। भक्तों के प्रार्थना करने पर भगवान शिव अवंतिका में ही महाकाल ज्योतिर्लिंग के रूप में वहीं स्थापित हो गए।

Mahakaleshwar temple ujjain history in Hindi

कैसा है निर्माण – Mahakaleshwar Jyotirlinga interesting facts in hindi 

  • महाकालेश्वर मंदिर मुख्य रूप से तीन हिस्सों में विभाजित हैं। इसके ऊपरी हिस्से में नाग चंद्रेश्वर मंदिर है, नीचे ओंकारेश्वर मंदिर और सबसे नीचे जाकर आपको महाकाल मुख्य ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजित नज़र आते हैं।
  • जहां आपको भगवान शिव के साथ ही गणेशजी, कार्तिकेय और माता पार्वती की मूर्तियों के भी दर्शन होते हैं। इसके साथ ही यहां एक कुंड भी है जिसमें स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं।

क्यों हैं इतने प्रसिद्ध

  • उज्जैन को प्राचीनकाल से ही एक धार्मिक नगरी की उपाधि प्राप्त है। आज भी यहां भारी संख्या में दर्शन के लिए भक्त आते हैं। दरअसल भगवान महाकाल की भस्म आरती के दुर्लभ पलों का साक्षी बनने का ऐसा सुनहरा अवसर और कहीं प्राप्त नहीं होता है।
  • ऐसा माना जाता है कि जो इस आरती में शामिल हो जाए उसके सभी कष्ट दूर होते हैं, इसके बिना आपके दर्शन पूरे भी नहीं माने जाते हैं। इसके अलावा यहां नाग चंद्रेश्वर मंदिर और महाकाल की शाही सवारी आदि भी पर्यटकों में जिज्ञासा का विषय बने रहे हैं।

Must Read:भगवान नरसिंह के प्रसिद्ध मंदिर, जिनके दर्शन मात्र से पूरी होती हैं मनोकामनाएं

Mahakaleshwar temple ujjain history in Hindi

भस्म आरती क्यों होती है?

  • हर सुबह महाकाल की भस्म आरती करके उनका श्रृंगार होता है और उन्हें ऐसे जगाया जाता है। इसके लिए वर्षों पहले शमशान से भस्म लाने की परंपरा थी, हालांकि पिछले कुछ वर्षों से अब कपिला गाय के गोबर से बने कंडे, शमी, पीपल, पलाश, बड़, अमलतास और बेर की लकड़ियों को जलाकर तैयार किए गए भस्म को कपड़े से छानने के बाद इस्तेमाल करना शुरू हो चुका है।
  • केवल उज्जैन में आपको यह आरती देखने का सुनहरा अवसर प्राप्त होता है। दरअसल भस्म को सृष्टि का सार माना जाता है, इसलिए प्रभु हमेशा इसे धारण किए रहते हैं।

पूजा करने के नियम 

  • नियमानुसार, महिलाओं को आरती के समय घूंघट करना पड़ता है। दरअसल महिलाएं इस आरती को नहीं देख सकती हैं। इसके साथ ही आरती के समय पुजारी भी मात्र एक धोती में आरती करते हैं।
  • अन्य किसी भी प्रकार के वस्त्र को धारण करने की मनाही रहती है। महाकाल की भस्म आरती के पीछे एक यह मान्यता भी है कि भगवान शिवजी श्मशान के साधक हैं, इस कारण से भस्म को उनका श्रृंगार-आभूषण माना जाता है।
  • इसके साथ ही ऐसी मान्यता है कि ज्योतिर्लिंग पर चढ़े भस्म को प्रसाद रूप में ग्रहण करने से रोग दोष से भी मुक्ति मिलती हैं।

Mahakaleshwar temple ujjain history in hindithe story behind the Ujjain Temple of Mahadev

12 रश्मियों से प्रकट हुए थे ज्योर्तिलिंग

  • कहा जाता है कि जब सृष्टि का निर्माण हुआ था उस समय सूर्य की पहली 12 रश्मियां धरती पर गिरी। उनसे ही 12 ज्योर्तिलिंग का निर्माण हुआ है। उज्जैन महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग भी सूर्य की पहली 12 रश्मियों से ही निर्मित हुआ। तब से बाबा महाकालेश्वर का पूजन उज्जैन में होता है।
  • उज्जैन की पूरी भूमि को उसर भूमि कहा जाता है यानी श्मशान की भूमि। भगवान महाकाल का मुख दक्षिण दिशा की ओर है इसलिए भी तंत्र क्रियाओं की नज़र से महाकाल मंदिर का बेहद खास महत्व है।

Must Read:जगन्नाथ पुरी की हैरान कर देने वाली बातें

Mahakaleshwar temple ujjain history in Hindi , जैसी और इंटरेस्टिंग और जानकारी से भरपूर स्टोरीज पड़ने के लिए हमारे फेसबुकट्विटर और इंस्टाग्राम पर हमें फ़ॉलो करें और हमारे वीडियो के बेस्ट कलेक्शन को देखने के लिए, YouTube पर हमें फॉलो करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

The content and images used on this site are copyright protected and copyrights vests with their respective owners. We make every effort to link back to original content whenever possible. If you own rights to any of the images, and do not wish them to appear here, please contact us and they will be promptly removed. Usage of content and images on this website is intended to promote our works and no endorsement of the artist shall be implied. Read more detailed ​​disclaimer
Copyright © 2021 Tentaran.com. All rights reserved.
× How can I help you?