अपने अशुभ मंगल ग्रह को ऐसे बनाएं शुभ, इन उपायों से जीवन में आएंगी खुशियां

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Mangal grah ko majboot karne ke upay – आज इस आर्टिकल में हम आपको बता रहे हैं कि क्या होता है मंगल ग्रह और अगर किसी जातक का मंगल ग्रह कमज़ोर हो, तो उसे किन- किन तरीको से ठीक या जा सकता है। औषधियों द्वारा, यंत्रो द्वारा, रत्नों,  दान, मन्त्रों द्वारा व अन्य तरीकों से इसे ठीक किया जा सकता है। लेकिन इन उपायों को करने से पहले आपका ये जानना बहुत ज़रुरी है कि आपका मंगल ग्रह कितना कमज़ोर है ओर ये जानने के लिए आप हमारी एक्सपर्ट टीम से सम्पर्क कर सकते हैं। कर्क, सिंह, वृश्चिक लग्न के जातकों के लिए मंगल,कारक ग्रह होता है और कारक ग्रह के दान नहीं होते, तो आप अपनी कुंडली दिखाकर हम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं कि कौन सा उपाय आप के लिए बेहतर होगा। इसके लिए आप लेख के नीचे दिए गए पूछताछ पर क्लिक कर जानकारी ले सकते हैं।

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मंगल ग्रह क्या है? – Mangal grah ko majboot karne ke upay

  • मंगल मेष व वृश्चिक राशि का स्वामी है। इसका मूल त्रिकोण मेष का होता है। मकर में उच्च का और कर्क राशि में ये नीच का होता है। इसका रंग लाल है। इसकी जाति छत्रिय है। इसकी दिशा दक्षिण व धातु ताम्बा व सोना है। यह पुरुष ग्रह है। इसका तत्व अग्नि है।
  • प्रतिनिधि पशु लाल बैल है। यह चतुर्थ ,सप्तम,अष्टम दृष्टि से पूर्ण रूप से देखता है। मंगल के मित्र ग्रह सूर्य व गुरु हैं। इसके शत्रु ग्रह शनि, बुध व राहु हैं। काल पुरुष के शरीर में ये भुजाओं का प्रतिनिधित्व करता है। मंगल एक राशि में 45 दिन रहता है। मंगल एक पाप ग्रह है। इसका गुण तमो गुण है।

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मंत्रों और स्रोतों द्वारा मंगल दोष निवारण:-

  • मंगल द्वारा उत्पन्न पीड़ा को समाप्त करने के लिए इसका जाप महत्वपूर्ण है। इसे शुक्ल पक्ष के मंगलवार से शुरू करना चाहिए। मन्त्र जाप के लिए प्रातः काल का समय अच्छा होता है, परन्तु नित्य एक समय पर ही जाप करना चाहिए।

मंगल के लिए वैदिक मंत्र  

  • ऊँ अग्निमूर्धादिव: ककुत्पति: पृथिव्यअयम। अपा रेता सिजिन्नवति।

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मंगल के लिए तंत्रोक्त मंत्र

  • ऊँ हां हंस: खं ख:, ऊँ हूं श्रीं मंगलाय नम:, ऊँ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:।

मंगल का नाम मंत्र 

  • ऊँ अं अंगारकाय नम:, ऊँ भौं भौमाय नम:,

मंगल का पौराणिक मंत्र 

  • ऊँ धरणीगर्भसंभूतं विद्युतकान्तिसमप्रभम। कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम ।।

मंगल गायत्री मंत्र

  • ऊँ क्षिति पुत्राय विदमहे लोहितांगाय धीमहि-तन्नो भौम: प्रचोदयात
  • इन मन्त्रों का ध्यान करने के पश्चात ऊँ अं अंगारकाय नम: की मूंगे की माला से कम से कम 1 माला अवश्य करें हो सके तो ज़्यादा भी कर सकते हैं। मंगल के मन्त्रों की जाप संख्या 10000 है पर कलयुग में इसका चार गुना यानी 40000 जाप करने पर लाभ प्राप्त होता है। फिर इसके दसवें हिस्से यानी 4000 जाप से हवन आहुति दी जाती है। मंगल हवन तब करें जब अग्नि का वास पृथ्वी पर हो, अगर खुद संभव न हो तो किसी योग्य पंडित से जाप करवा लेना चाहिए। इसके बाद जाप और हवन में अगर कोई गलती हो गयी हो तो मंगल देव से उसकी माफी मांगे।

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यंत्रो द्वारा मंगल दोष निवारण

  • भोमश्विनी योग में अथवा अन्य किसी भी शुभ योग में ताम्र पत्र में इस मंगल यंत्र को उत्तीर्ण करें। यंत्र के बीच में मूँगा जड़वाकर मंगल गायत्री से 108 बार जाप करें।
  • यदि शारीरिक पीड़ा अधिक है तो इस यंत्र को भोज पत्र पर अष्टगंध व अनार की कलम से बनाकर कंठ या दाहिनी भुजा पर बांधे अथवा तांबे की अंगूठी पर मंगल यंत्र गुदवाएं और अनामिका उंगली में पहने। मंगल यंत्र का चित्र नीचे दिया जा रहा है।

व्रत-उपवास द्वारा मंगल ग्रह दोष निवारण

  • मंगल ग्रह मंगलवार का स्वामी है। इसको प्रसन्न करने के लिए जातक को मंगलवार का व्रत करना चाहिए। व्रत वाले दिन स्नान करने के बाद हनुमान जी के दर्शन करें तथा साय काल उन्हें भोग लगाकर एक समय मीठा भोजन करें। यह ध्यान रहे कि उस दिन क्रोध न आये व किसी विद्वान पुरुष का अपमान न हो व सात्विक रहें।

औषधियों द्वारा मंगल ग्रह दोष निवारण

  • मंगल ग्रह से निवारण हेतु रक्त चन्दन, बेल की छाल, जटा मासी, खिरैटी तथा गुड़ व हींग को जल में मिलाकर स्नान करना चाहिए।

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रत्न द्वारा मंगल दोष निवारण

  • मंगल का प्रतिनिधित्व रत्न मूंगा है। मंगल दोष निवारण के लिए मूँगा धारण करना चाहिए। इसके लिए मूंगे को शुक्ल पक्ष के सोमवार या गुरुवार को खरीदना चाहिए। मूंगे को खरीदने व जड़वाने के लिए पुष्य नक्षत्र उत्तम है। इसके अतिरिक्त मृगशिरा, चित्रा व धनिष्ठा नक्षत्र भी उत्तम है। नग अखंडित नहीं होना चाहिए।
  • मूंगे को अंगूठी में इस प्रकार जड़वाना चाहिए कि उसका निचला हिस्सा उंगली को छुए। इस अंगूठी को प्रातः काल सूर्य उदय के समय धारण करना चाहिए। इससे पहले अंगूठी को कच्चे दूध में रखे व बाद में गंगा जल से धोएं। अगर गंगा जल नहीं है तो 12 घण्टे पुराण तांबे के पात्र में रखे जल से भी अंगूठी को धो सकते हैं। जल से धोने के बाद अंगूठी को लाल कपड़े पर रखें जिस पर लाल चंदन से मंगल यंत्र बनाया गया हो। यंत्र व अंगूठी की पूजा धूप अगरबत्ती से करें फिर 108 बार मंगल मंत्र पढ़ें। इसके बाद अंगूठी में मंगल देव का वास समझकर अनामिका उंगली में पहन लें। यंत्र को मंदिर में रख कर उसकी नित्य पूजा करें।

मूंगे का विकल्प

  • मूंगा एक मूल्यवान रत्न है। अगर इसे खरीदना संभव नहीं है तो इसके उपरत्नों का प्रयोग किया जा सकता है। लाल स्फटिक, लाल तामड़ा या लाल जर्कन का प्रयोग किया जा सकता है। अगर इनको खरीदना भी सम्भव नहीं तो खैर के पेड़ की जड़ का टुकड़ा लाल धागे में लाल कपड़े में कंठ में धारण करें।

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दान द्वारा मंगल ग्रह दोष निवारण

  • दान करने से भी अनिष्टता दूर होती है। अतः योग्य व्यक्ति को निम्न दान करना चाहिए। मूंगा, ताम्बा,रक्त वस्त्र,रक्त चंदन, लाल मसूर की दाल, गुड़, कस्तूरी तथा दक्षिणा अपने सामर्थ्य अनुसार करें। अधिक पीड़ा होने पर अभिमंत्रित मंगल यंत्र भी दान कर सकते हैं।

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मंगल के प्रत्येक भाव के अनुसार भी अलग -अलग उपाय अपनाए जा सकते हैं, जो निम्न हैं-

प्रथम भाव में मंगल

  • प्रथम भाव में मंगल पीड़ित होने से सॉफ को खाना चाहिए।

द्वितीय भाव में मंगल

  • द्वितीय भाव में मंगल अगर पीड़ित है तो जातक को रेवड़ी और पतासे बहते पानी में बहाने चाहिए। भाइयों व मित्रों की सहायता से कार्य करना चाहिए।

तृतीय भाव में मंगल

  • अगर तृतीय भाव में मंगल पीड़ित है तो जातक को हाथी दांत घर में रखना चाहिए व ताऊ जी की सेवा करें।

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चतुर्थ भाव में मंगल

  • अगर चतुर्थ में पीड़ित है तो तीन धातु सोना,चांदी,ताम्बा के मिश्रण की अंगूठी पहने। दूध में धोकर चावल कम से कम 7 मंगलवार बहते पानी में बहाएं।

पंचम भाव में मंगल

  • यदि पंचम में मंगल पीड़ित है तो सिरहाने पानी रख कर सोएं और सुबह उसे पेड़ पौधों में डाल दे।

छठे भाव में मंगल

  • अगर इस भाव में मंगल पीड़ित है तो चांदी या चावल का दान करना चाहिए।

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सप्तम भाव में मंगल

  • सप्तम में मंगल पीड़ित है तो बुआ व बहन को लाल कपड़े देने चाहिए। स्नान करके लाल कपड़े पहने और तांबे का बर्तन चावलों से भरकर चन्दन का लेप लगाकर हनुमान जी के मंदिर में दें।

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अष्टम भाव में मंगल

  • अगर अष्टम में मंगल पीड़ित है तो तंदूर की रोटी कुत्तो को डाले व गले में चांदी पहने।

नवम भाव में मंगल

  • यदि नवम भाव में मंगल पीड़ित है तो मंगलवार हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाएं व भोग लगाएं। सोने में मूँगा धारण करें।

दशम भाव में मंगल

  • यदि दशम भाव में पीड़ित है तो नित्य हनुमानजी के मंदिर जाकर दर्शन करें व सुंदर कांड का पाठ करें।

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एकादश भाव में मंगल

  • अगर एकादश भाव में मंगल पीड़ित है तो काला-सफेद कुत्ता पाले व हनुमानजी को सिंदूर चढ़ाएं।

द्वादश भाव में मंगल

  • यदि इस भाव में मंगल पीड़ित है तो सबको मीठा खिलाना चाहिए। मंगलवार हनुमानजी के मंदिर में लड्डू बांटने चाहिए।

ये सभी उपाय भाव अनुसार हैं नीचे एक तस्वीर दी जा रही है जिन जातकों को भाव जानकारी नहीं है वो इस तस्वीर से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए हमारी एक्सपर्ट टीम से सम्पर्क करें या पूछताछ पर क्लिक कर प्रश्न पूछें।

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