Mokshada Ekadashi Puja Vidhi – मोक्षदा एकादशी पर करें पूरे विधि-विधान से पूजा, मिलेगी सभी पापों से मुक्ति

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Mokshada Ekadashi Puja Vidhi – एकादशी व्रत के पारण को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है| इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है| मोक्षदा एकादशी व्रत का पारण प्रातःकाल को करना चाहिए| कुछ कारणों की वजह से अगर कोई प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं है तो उसे मध्याह्न (दोपहर)के बाद करना चाहिए। चलिए जानते हैं मोक्षदा एकादशी पूजा विधि, महत्व और कथा।

mokshada ekadashi puja vidhi

Mokshada ekadashi puja vidhi | मोक्षदा एकादशी पूजा विधि

मोक्षदा एकादशी महत्व | (Mokshada Ekadashi Ka Mahatva)

  • मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान श्री कृष्ण की भी पूजा होती है। इस दिन गीता का पाठ करना चाहिए। इस एकादशी को गीता एकादशी भी कहा जाता है।
  • माना जाता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य के लिए स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं और पितरों को भी मुक्ति मिलती है।

मोक्षदा एकादशी 2019 मुहूर्त-  (Mokshada Ekadashi 2019 muhurat)

  • मोक्षदा एकादशी शनिवार 7 दिसम्बर 2019।
  • 8 दिसम्बर को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय -सुबह 07 बजकर 09 मिनट से 09 बजकर 05 मिनट तक।
  • पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – रात 08 बजकर 24 मिनट तक|

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Mokshada ekadashi puja vidhi

मोक्षदा एकादशी व्रत की कथा (Mokshada Ekadashi Vrat Katha)

  • पौराणिक कथा के अनुसार वैखानस नाम का राजा चंपा नगरी में राज करता था, वह चारों वेदों का ज्ञानी था। एक दिन उसने सपना देखा कि उसके पिता नर्क में यातनाएं झेल रहे हैं।
  • तब राजा ने यह सपना अपनी पत्नी को बताया, तो राजा की पत्नी ने उन्हें आश्रम जाने की सलाह दी। राजा आश्रम में गया और वहां गुरुओं से मिला। वैखानस को देखकर पर्वत मुनि ने उनके आने का कारण पूछा, तब राजा ने सारी बात ऋषि को बताई।
  • ऋषि ने राजा को आर्शीवाद देते हुए कहा कि तुम एक पुण्य आत्मा हो, लेकिन तुम्हारे पिता अपने कर्मों का फल भुगत रहे हैं। तुम्हारे पिता ने तुम्हारी मां को अपनी दूसरी पत्नी के कारण यातनाएं दी थी। इसी कारण वे नर्क में यातनाएं भुगत रहे हैं।
  • राजा ने ऋषि से इस समस्या का समाधान पूछा, जिस पर ऋषि ने राजा को मोक्षदा एकादशी का व्रत करने के लिए कहा। राजा ने मोक्षदा एकादशी का व्रत पूरे विधि -विधान से किया। इसके बाद राजा के पिता को नर्क की यातनाओं से मुक्ति मिल गई।

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मोक्षदा एकादशी पूजा विधि (Mokshada Ekadashi Puja Vidhi)

  • प्रातः काल उठकर स्नान करें|
  • स्नान के बाद भगवान कृष्ण और विष्णु जी की मूर्ती स्थापित करें और व्रत का संकल्प लें|
  • उसके बाद विधि-विधान से धूप, दीप, नैवेद्य आदि सामग्री से भगवान का पूजन करें|
  • पूजा के बाद आरती करें और गीता का पाठ करें|
  • अगली सुबह व्रत का पारण करें | ब्राह्मण को अपनी श्रद्धानुसार खाना खिलाएं और ज़रूरतमंदो को दान करें।

Mokshada ekadashi puja vidhi

ध्यान रखने योग्य बातें | (note)

  • कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है।
  • दूसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं।
  • दूजी एकादशी के दिन सन्यासियों, विधवाओं को मोक्ष प्राप्ति के लिए व्रत करना चाहिए। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती है।

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