Muhurat Kitne Hote Hain – जानिए मुहूर्त कितने प्रकार के होते हैं और महत्व

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Muhurat Kitne Hote Hain – Muhurat kitne prakar ke hote hain  – Types of Muhurat in hindi – आपने अक्सर शुभ मुहूर्त और अशुभ मुहूर्त के विषय में सुना होगा, दरअसल हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मुहूर्तो को विशेष महत्व दिया जाता है  लेकिन क्या आप यह बात जानते हैं कि प्राचीन काल में मुहूर्त शब्द का उपयोग कुछ देर या दो घण्टे के रूप में किया जाता था। वास्तव में मुहूर्त का अर्थ ‘समय’ से ही लगाया जाता है, लेकिन आगे चलकर मुहूर्त को शुभ मुहूर्त और अशुभ मुहूर्त में बांट दिया गया। हिंदू धर्म के मुताबिक ही मुहूर्त को शुभ और अशुभ के रूप में बांटा गया है। कहा जाता है कि शुभ मुहूर्त में ही व्यक्ति को अपने सभी अच्छे कार्य करने चाहिए। यदि वह शुभ मुहूर्त में कोई नया कार्य शुरू करता है तो उसे उसमें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है इसलिए शुभ मुहूर्त को विशेष मान्यता प्रदान की जाती है। अधिकतर लोग अपने कार्यों को शुभ मुहूर्त में ही संपन्न करते हैं। इनके अंतर्गत भी कई प्रकार के मुहूर्त होते हैं, जिन के विषय में आज हम अपने लेख के माध्यम से आपको बताने वाले हैं।muhurat kitne hote hain

Muhurat Kitne Hote Hain – Muhurat kitne prakar ke hote hain  

मुहूर्त हिंदू कैलेंडर में निमेश, काठ और कला के साथ समय के लिए माप की एक हिंदू इकाई है। ऋग्वेद में हम केवल “क्षण” का ही अर्थ पाते हैं। परंपरागत रूप से, हिंदुओं के बीच किसी विशेष मुहूर्त की गुणवत्ता के आधार पर धार्मिक समारोह आदि जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को शुरू करने या शुरू करने से बचने के लिए मुहूर्त को माना जाता है। वैदिक शास्त्र भी आमतौर पर एक या एक से अधिक मुहूर्तों को अनुष्ठान और अभ्यास करने की सलाह देता है। वर्तमान ब्रह्म-मुहूर्त वर्णाल विषुव के दौरान सुबह 6:00 बजे से ठीक पहले शुरू होता है। वर्तमान में, जीव-अमृत और विष्णु में सूर्योदय से पहले दो गोधूलि मुहूर्त शामिल हैं।

Muhurat kitne prakar ke hote hain  

यहां आपको कुल 15 मुहूर्त के विषय में बताया जा रहा है।

रौद्र –  यह पहला मुहूर्त है, यह रुद्र से सम्बंधित कार्य हेतु उपयोगी है।

श्वेतवेत – इस मुहूर्त में गृहप्रवेश, गृहनिर्माण आदि कार्य होते हैं

मैत्र –  इस मुहूर्त में सगाई व प्रणय निवेदन आदि कार्य किए जाने चाहिए।

 सारभट्ट –  शत्रुनाश हेतु कार्य इस मुहूर्त में फलदायी होते हैं।

 सावित्र –  इसमें यज्ञ, विवाह, जनेऊ आदि देव कार्य करना चाहिए।

वैराज – इसमें शासक को पराक्रम सम्बंधी कर्म प्रारम्भ करना चाहिए।

विश्वावसु – यह मुहूर्त सभी प्रकार के उत्तम शुभ कार्यों के योग्य है।

अभिजीत –  दिन के मध्य में पड़ने वाला यह मुहूर्त सभी व्यावहारिक कार्यों हेतु उत्तम है। यह मध्य दिन में ही नहीं, रात्रि के मध्य में भी होता है। स्वतंत्रता के समय यही रात्रिकालीन मुहूर्त था, जिसके कारण भारत-पाकिस्तान के बीच आज तक मनमुटाव चला आ रहा है। यदि यह दिन के अभिजीत मुहूर्त में होता, तो आज स्थितियां अलग ही होतीं।

 रोहिण – कृषि कार्य हेतु यह मुहूर्त सर्वोत्तम है।

बल – इसमें शत्रुओं पर विजय, सम्पत्ति प्राप्त करने जैसे कार्य प्रशस्त होते हैं और यह मुहूर्त सफलता प्रदान करने वाला है।

 विजय –  इसमें मंगल कार्य, मुकदमा दायर करना उत्तम माना जाता है।

 नैऋत – शत्रु राष्ट्रों पर हमला, आतंकवादियों के दमन की कार्यवाही करने से शत्रु का नाश होता है।

वरुण – इसमें जलीय खाद्य पदार्थों की बुवाई उत्तम फल देती है।

 सौम्य –  इस मुहूर्त में सौम्य, शुभ व मांगलिक कार्य करने चाहिए।

 भग –  भाग्य के देवता को भग कहते हैं, जो ‘ऐश्वर्य’ का सूचक माना जाता है। यह मुहूर्त सुख-सौभाग्य और ऐश्वर्यवर्द्धक होता है।

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मुहूर्त का चयन

मुहूर्त की गणना हिंदू कैलेंडर के आधार पर की जाती है जिसे आमतौर पर हिंदू पंचांग कहा जाता है। मुहूर्त की गणना कई चरों के आधार पर की जाती है जैसे गतिविधि की प्रकृति, उस व्यक्ति की कुंडली जिसे कार्य करना है, ग्रह स्थिति, चंद्र दिवस और ‘नक्षत्र’ की अवधि के दौरान इसे किया जाना है। इन सभी शुभ मुहूर्तों की सामान्य अवधि शुभ मुहूर्त बनाती है।

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मुहूर्त का महत्व

शुभ मुहूर्त के द्वारा, यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति प्राकृतिक शक्तियों के विरुद्ध नहीं जा रहा है और सभी ब्रह्मांडीय शक्तियों के अनुकूल होने पर एक शुभ और महत्वपूर्ण कार्य शुरू कर रहा है। एक तरह से किसी घटना का मुहूर्त उस घटना की कुंडली को परिभाषित करता है इसलिए अच्छे भविष्य के लिए शुभ मुहूर्त अनिवार्य है।

जन्म कुंडली या जन्म पत्रिका और मुहूर्त आपस में जुड़े हुए हैं क्योंकि यदि कोई व्यक्ति अपनी जन्म कुंडली के अनुसार शुभ मुहूर्त पर शुभ कार्यों और घटनाओं को करता है, तो उसे खुशी होगी और समस्याएं भी कम हो सकती हैं। यह किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली द्वारा प्रदान की गई बाधाओं का मुकाबला करने और उसमें उल्लेखित नुकसान को बेअसर करने या दूर करने में मद्द करता है इसलिए, जब भी आप अपने जीवन का कोई महत्वपूर्ण कार्य करने जा रहे हों, तो उसे शुभ मुहूर्त के अनुसार ही करना चाहिए। मुहूर्त उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है जिनकी जन्म कुंडली नहीं है या किसी भी दोष से पीड़ित हैं। ऐसा देखा जाता है कि शुभ मुहूर्त में ये अपने कार्यों को करने में सफल होते हैं। इस प्रकार मुहूर्त का महत्व वैदिक काल से चला आ रहा है, वर्तमान समय में भी लोग मुहूर्त के अनुरूप ही अपने कार्य को करना उचित समझते हैं।

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