Padmanabhaswamy Mandir ke bare mein – क्या है पद्मनाभस्वामी मंदिर के सातवें दरवाज़े का रहस्य?

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Padmanabhaswamy mandir ke bare mein – भारत में कई ऐसे हिंदू मंदिर हैं जो भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध हैं| ऐसा ही एक मंदिर केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम में स्थित है जिसे   पद्मनाभस्वामी मंदिर के नाम से जाना जाता है| यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। ये मंदिर कई रहस्यों से भरा हुआ है और इन रहस्यों को आजतक कोई नहीं जान पाया है। तो आपको इस मंदिर के बारे में बताते हैं।padmanabhaswamy mandir ke bare mein

Padmanabhaswamy mandir ke bare mein – पद्मनाभस्वामी मंदिर के बारे में

कहां स्थित है पद्मनाभस्वामी मंदिर?

  • यह मंदिर केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम में स्थित है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है|
  • मंदिर का रहस्य और भव्यता हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है|

मंदिर के बारे में? – know about padmanabhaswamy temple trivandrum

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  • पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत में 108 पवित्र विष्णु मंदिरों में से एक है|
  • यहां भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को ‘पद्मनाभ’ कहा जाता है और इस रूप में विराजित भगवान यहाँ पर पद्मनाभ स्वामी के नाम से विख्यात हैं।
  • मंदिर के निर्माण में महीन कारीगरी देखने को मिलती है, जो हर दर्शनार्थी को अपनी ओर लुभाती है|
  • मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है जिसे देखने के लिए हज़ारों भक्त दूर दूर से आते हैं|
  • यहाँ भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं|
  • मंदिर की मुख्य मूर्ति लगभग 18 फीट लंबी है|
  • मूर्ति के आसपास भगवान विष्णु की दोनों रानियों श्रीदेवी और भूदेवी की मूर्तियां स्थापित की हुई हैं|
  • मुख्य कक्ष में जहां विष्णु भगवान की लेटी हुई मुद्रा में प्रतिमा है, वहां कई दीपक जलते रहते हैं और दीपक के उजाले में विष्णु जी दर्शन होते हैं|
  • मंदिर के गलियारे में अनेक स्तंभ बनाए गए हैं जिन पर सुंदर नक्काशी की गई है|
  • मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने के लिए पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। यहाँ केवल हिंदुओं को आने की अनुमति दी जाती है|
  • साल में दो बार यहाँ बड़े लेवल पर उत्सवों का आयोजन किया जाता है|
  • मंदिर का गोपुरम द्रविड़ शैली में बनाया गया है । इसका परिसर बहुत विशाल है जो कि सात मंज़िला ऊंचा है|
  • यहाँ पास ही सरोवर भी है जिसे ‘पद्मतीर्थ कुलम’ के नाम से जाना जाता है|

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मंदिर का इतिहास  – Padmanabhaswamy temple

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  • साल 1733 ई. में इस मंदिर का पुनर्निर्माण त्रावनकोर के महाराजा मार्तड वर्मा द्वारा करवाया गया था|
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार यहाँ से भगवान विष्णु की प्रतिमा मिली थी जिसके बाद यहां मंदिर का निर्माण करवाया गया|
  • ऐसी मान्यता है कि तिरुअनंतपुरम नाम भगवान के ‘अनंत’ नामक नाग के नाम पर रखा गया है|
  • मंदिर के निर्माण में द्रविड़ एवं केरल शैली का इस्तेमाल किया गया है|
  • मंदिर में गुप्त तहखाना बना हुआ है जिसे साल 2011 जून में सर्वोच्च न्यायालय ने पुरातत्व विभाग तथा अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के निर्देश के बाद खोला गया था, जिसके बाद यहाँ से करीब दो लाख करोड़ की संपत्ति का पता चला था|

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मंदिर से जुड़ी कहानी

  • मंदिर का इतिहास और महाभारत के अनुसार श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम मंदिर में आए थे और यहां पूजा-अर्चना की थी, जिसके बाद ऐसा माना जाता है कि मंदिर की स्थापना 5000 साल पहले कलयुग के पहले दिन की गयी थी|
  • इसके बाद साल 1733 में त्रावनकोर के राजा मार्तण्ड वर्मा द्वारा इसका पुनर्निर्माण किया गया|

Padmanabhaswamy mandir ke bare mein 

क्यों पद्मनाभस्वामी मंदिर को सबसे अमीर मंदिर कहते हैं?

  • कुछ सालों पहले मंदिर के पांच तहखानों में से एक लाख करोड़ से भी ज़्यादा की संपत्ति पायी गयी थी, जिस कारण इसे विश्व के सबसे अमीर मंदिरों में से एक माना जाता है| मंदिर की देखभाल आज भी राजघराना त्रावणकोर राजपरिवार करता है|

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मंदिर के अंदर बंद तिजोरी का रहस्य

  • पद्मनाभस्वामी मंदिर दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है| मंदिर हमेशा अपनी रहस्यमय तिजोरी को लेकर चर्चा का विषय बना रहता है| इस मंदिर की खुफिया तिजोरी को वॉल्ट बी के नाम से जाना जाता है और पारंपरिक रूप से इसे नीलावरस या कल्लारा कहा जाता है|
  • मंदिर के तहखाने खोलने के लिए साल 2011 में आईपीएस अधिकारी सुंदरराजन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी कि मंदिर में रखें खजाने की जांच होनी होनी चाहिए| इसके बाद सात सदस्यीय टीम का गठन किया गया|
  • खजाने की जांच करने पर मंदिर में छह कमरे मिले जिनका नाम ए, बी, सी, डी, ई और एफ रखा गया, लेकिन इन कमरों को खोलना एक चुनौतीपूर्ण काम था क्योंकि कक्ष बी के बारे में ऐसा कहा जाता है कि तहखाना या तिजोरी बी में कई रहस्य छिपे हुए हैं|
  • ऐसा बताया जाता है कि कुछ लोगों ने इस तहखाने को खोलने की कोशिश की थी, लेकिन उस वक्त वहां पर मौजूद सभी लोगों की मृत्यु हो गई|
  • आज भी दरवाज़े के पीछे से पानी और नागो के सरसराने की आवाज़े आती हैं| कहा जाता है कि नाग खजाने के रक्षक हैं|इस तहखाने के दरवाज़े पर न तो ताले लगे हैं और न ही कोई कुंडी, मंदिर के दरवाज़े को मंत्रों द्वारा बंद किया गया है| दरवाज़े बी पर दो नाग के चित्र बने हैं और वहां चेतावनी लिखी है कि इसे खोला गया तो अंजाम बहुत बुरा होगा|
  • ऐसा कहा जाता है कि सदियों पहले, जब मंदिर प्रबंधन ने तहखाने बी को खोलने का प्रयास किया, तो उन्हें लहरों की आवाज़ सुनाई दी थी, तभी से इसे रहस्यमय और डरावना माना जाता है| इसके बाद इसे खोलने का फैसला वापस ले लिया गया|
  • ये भी कहा जाता है कि साल 1930 के दशक में, जब लुटेरों के एक गिरोह ने मंदिर को लूटने की कोशिश की, तो उन्होंने सांपों को देखा था| तबसे माना जाता है कि प्राचीन काल के संतों ने शक्तिशाली नाग मंत्र का जाप करके इसे सील कर दिया था|

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कब यात्रा करें? – Padmanabhaswamy mandir ke bare mein

  • यहां दर्शन करने के लिए अक्टूबर से फरवरी का समय सबसे अच्छा माना जाता है|
  • मंदिर से 600 मीटर की दूरी पर नज़दीकी स्टेशन तिरुवनंतपुरम सेंट्रल रेलवे स्टेशन पड़ेगा|

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